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**खूँटी पर बँधी है रस्सी**

खूँटी पर बँधी है रस्सी
एक डोर भवसागर की ओर
दूजी डोर धर्मराज की हाथ ।

धरती पर आया है ,
मुसाफ़िर बन कर
तू यूँ डाले है, धरती
पर डेरा ,जैसे की वापिसी
का टिकट ही न हो तेरा
हर एक का है,वापिसी का टिकट
 जीवन की डोर पहुँच रही है,ना जाने
किस-किस की धर्मराज के ,ओर
मौत की खूँटी पर लटकी है,गर्दन
पैर लटक रहे हैं कब्र पर
उस पर असीमित जिज्ञासाओं का मेला
दुनियाँ का मेला, मेले में हर शख्स अकेला
फिर काहे का तू पाले है,जिज्ञासाओं का झमेला,
क्यों करता है, तेरा-मेरा
दुनियाँ है,एक हसीन मेला
इस मेले से नहीं कुछ ले जा पायेगा
आ हम सब मिलकर अपनत्व के बीज डालें
परस्पर प्रेम की पौध उगा लें
भाईचारे संग प्रेम का वृक्ष जब पनप जायेगा
हमारे इस दुनिया से चले जाने के बाद भी
हमारा नाम रह जायेगा ।
मेले का आकर्षण बढ़ जायेगा
हर कोई परस्पर प्रेम का पाठ पड़ जायेगा ।।💐💐💐💐💐




**💐चाँद का दीदार**

💐* करने को चाँद का दीदार   मैंने आकाश की और निगाहें जो डालीं,  निगाहें वहीं थम गयीं💐*
*आकाश में तो झिलमिलाते तारों** की  बारात थी ,सितारों* का सुंदर संसार  असँख्य सितारे** झिलमिला रहे थे। मानों कोई जशन हो रहा हो ***** झिलमिलाते सितारों के बीच  चाँदनी बिखेरते चाँद की चमकीली  किरणें सलौनी और सुहानी।
दिव्य, अलौकिक किसी दूजे जहाँ की परिकल्पना लिये ,मैं कुछ पल को वहीं खो गया। आकाश था,मैं था,सितारों* की बारात थी**  चाँद की चाँदनी थी ,मानों आकाश के  माथे पर सरल, निर्मल,सादगी, के श्रृंगार  की बिंदिया ... चाँद सी लगा के बिंदिया आकाश अपने सादगी भरे श्रृंगार से सबको  आकर्षित कर रहा था ।
सबको अपनी चाँदनी से आकर्षित
करते चाँद कुछ तो खास है तुझमें
जो तेरे दीदार से लोगों के दिलों के फैसले लिये
जाते हैं ।

*दर्द भी मुझे प्यारे हैं *

दर्द भी मुझे प्यारे हैं
सुख-और दुःख जीवन
की नदिया के दो किनारे हैं।

"महत्वकांशाये"

* महत्वकांशाएँ*   आकांक्षाएं तो बहुत होती हैं,
   परन्तु जो "महत्व" की "आकांशाएँ" होती हैं
   वो "महत्वकांशाएँ "होती हैं ।

* मैं जानता हूँ, कि तू बहुत महत्वकांशी
 है, ए मानव,तेरी काबलियत पर मुझे
 यकीन है *
"अभी तो तू कदम,दो क़दम चला है,
मैं नहीं चाहता तेरे क़दम रुक जायें।
तू जीत का जशन मनाना चाहता है ,
बहुत प्रसन्न हो रहा है, अभी तो तू एक
पड़ाव पर ही पहुंचा है ,मंजिल पर नहीं।


यही तेरी मंजिल है, ऐसा हो नहीं सकता
अभी तो तुझे बहुत ऊंची उड़ाने भरनी हैं "

उड़ान अभी बाकी है, अभी तो पंख फडफ़ड़ाएं हैं,
मैं जानता हूँ ,तेरी काबलियत,तेरी सोच से भी ऊँची है ।
अपनी छोटी सी जीत पर यूँ ना इतरा।
नहीं तो पाँव वहीं रुक जाएंगे।

"अहंकार का नशा चढ़ जायेगा
अंहकार के नशे मे तू सब कुछ भूल जायेगा"
जीत अभी बाकी है ,उड़ान अभी बाकी है ,
मंजिलें मिसाल अभी बाकी है ।
तेरे करिश्मों से अन्जान ,पर कद्रदान
अभी बाकी हैं ।



** धरती माँ**

मैं धरती माँ का अपकारी हूँ,
ये धरती न तेरी है, ना मेरी है
ना धरती माँ के लिये कत्ले आम करो
ना धरती माँ का अपमान करो ।
जख्मो से धरती छलनी है ,मत अपने विनाश का
सामान करो ,धरती का सीना जब फट  जायेगा
विनाश ही विनाश हो जायेगा ।

भगवान ने धरती हम मनुष्यों के लिये
बनायी ,धरती का भार मनुष्यों को दिया।

तुम चाहो तो धरती को स्वर्ग बना लो या नरक
मनुष्यों को तो देखो ,अपने बुरे कर्मों
द्वारा धरती को युद्ध भूमि ही बना डाला ।

अरे ये धरती हम मनुष्यों की है ,ये इस धरा का
उपकार है कि उसने हमें रहने के लिये स्थान दिया
जानते तो अग़र धरती ना होती तो हम
*बिन पैंदी के लौटे* की तरह लुढ़कते रहते
प्रकृति के रूप में हमें जो विरासत मिली है
उसका संरक्षण करो , मत इसका भक्षण करो।
अपने हक में तो सब दुआ करते हैं
 काश की सब सबके हित में दुआ
करने लग जाये तो धरती पर स्वर्ग आ जाये ।।



"इस वर्ष विजयदशमी पर, कलयुगी रावणों का अंत करने का निर्णय लें।

*विजय दशमी*
" सच्चाई की बुराई पर जीत का पर्व"
 सतयुग में जब अहंकारी रावण का अत्याचार बढ़ता जा रहा था ,रावण जो परम् ज्ञानी था ,परन्तु अपने अहंकार के मद के नशे में चूर रावण दुष्टता की चरम सीमा को पार करता जा रहा था ,धरती पर साधु,सन्यासी,सरल ग्रहस्थी लोग रावण के अत्याचारों से हा-हा कार करने लगे ,तब धरती को राक्षस रूपी रावण से  पापमुक्त करने के लिये, परमात्मा रामचन्द्र को लीला करनी पढ़ी ,और श्री राम ने लीला करते हुए ,अपनी भार्या सीता को रावण की कैद से आजाद कराने के लिये ,भाई लक्ष्मण ,हनुमान, सुग्रीव,जाववंत, आदि वानर सेना के सहयोग से ,रावण रूपी राक्षस से धरती को पाप मुक्त कराया ।
तभी से आज तक रावण, कुंभकर्ण,और मेघनाद के पुतलों को जला कर गर्वान्वित महसूस किया जाता है ।

आज कलयुग में में भी इस विजय दशमी की बहुत महिमा है ,अच्छी बात है । परन्तु कब तक ?
सतयुगी रावण तो कब का मारा गया । प्रत्येक वर्ष रावण के पुतले को जला कर हम मानवीय जाति शायद यह साबित करना चाहती कि रावण तो बस एक ही था ,और तब से अब तक रावण का पुतला जला कर हम बहुत श्रेष्ठ काम कर रहे हैं ,अजी कुछ भी श्रेष्ठ नहीं कर रहे हैं …

* अमृत और विष*

*जहर उगलने वाला नहीं, ज़हर पीने वाला हमेशा महान होता   है*  *  बनना है तो उस कड़वी दवा की तरह बनिये जो शरीर  में होने वाले रोगों रुपी ज़हर को नष्ट करती है ,ना कि उस ज़हर की तरह जो विष बनकर किसी को भी हानि ही पहुंचता रहता है* * शब्दों का उपयोग बड़े सोच समझ कर करना चाहिये   कुछ लोग कहते हैं ,हम तो दिल के साफ हैं ,जो भी कहते हैं ,  साफ-साफ कह देते हैं ,हम दिल में कुछ नहीं रखते ।  अच्छी बात है ,आप सब कुछ साफ-साफ बोलते हैं ,दिल में कुछ नहीं रखते । दूसरी तरफ आपने ये भी सुना होगा कि ,शब्दों का उपयोग सोच-समझ कर करिये । "मुँह से निकले हुए शब्द "और "कमान से निकले हुए तीर"वापिस नहीं जाते ,कमान से निकला हुआ तीर जहाँ पर जा कर लगता है ,अपना घाव कर जाता है ,अपने निशान छोड़ ही जाता है ,माना कि घाव ठीक हो ही जाता है,परंतु कड़वे शब्दों के घाव जीवन भर दिलों दिमाग पर शूल बनकर चुभते रहते हैं । हमारे प्राचीन, ग्रन्थ,इतिहास इस बात के बहुत बड़े उदाहरण हैं,कि देवताओं और दानवों की लड़ाई के समय *समुद्र मंथन हुआ *उस समय समुद्र से *अमृत और *विष दोनों निकले ,कहते हैं समुद्र मंथन से निकला हुआ विष एक जल…

💐फ़लसफ़ा💐

**💐💐खिले-खिले पुष्पों से ही घर,आँगन महकते है,
   प्रकृति प्रदत्त,पुष्प ,भी किसी वरदान से कम नहीं
   अपने छोटे से जीवन में पूरे शबाब से खिलते हैं💐 पुष्प💐
   और किसी न किसी रूप में काम आ ही जाते हैं
    जीवन हो तो पुष्पों के जैसा, छोटे से सफ़र में बेहद की
    हद तक उपयोगी बन जाते हैं।💐💐

   जीवन का भी यही फ़लसफ़ा है,
  💐 बुझे हुए चिरागों को किनारे कर ,
   जलते हुए चिरागों से ही घर रोशन किये जाते हैं ।
   क्योंकि जो जलता है, वही जगमगाता है ।

 ☺☺  कभी -कभी  यूँ ही मुस्करा लिया करो
   गीत गुनगुना लिया करो ।
  जीवन का संगीत हमेशा
  मधुर हो आवयशक नहीं ।
  हालात कैसे भी हों तान छेड़ दिया करो
  सुर सजा लिया करो,गीत बना लिया करो
  जीवन एक संगीत भी है
  हर हाल में गुनगुना लिया करो ।

 चाँद में दाग है ,सबको पता है
 फिर भी चाँद ही सबका ख्वाब है
 क्योंकि चाँद में चाँदनी बेहिसाब है ।☺☺

* खिलने दो मासूम कलियों को *

*शाम के आठ बजते ही घर में सब शान्त हो जाते थे।
एक दिन न जाने भाई-बहन में किस बात पर बहस छिड़ गयी थी ,बच्चों की माँ चिल्ला रही थी दोनों इतने बड़े हो गये हैं फिर भी छोटी-छोटी बातों पर लड़ते रहते हैं ।

माँ अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही थी कि,बच्चों की बहस खत्म हो ,माँ बच्चों के पास बैठी बोली तुम्हारे पापा, और दादा जी आने वाले हैं ,और तुम्हें पता है, की उन्हें बिल्कुल भी शोर पसन्द नहीं है ,वैसे ही दोनों दिन भर के थके हुए होते हैं ।
बेटी,सान्या दस साल की और बेटा सौरभ पन्द्रह साल का ,लेकिन भाई, बहन की लड़ाई में कौन छोटा कौन बड़ा दोनों अपने को बड़ा समझते हैं ,चलो किसी तरह शांति हुयी ।
माँ बोली आज साढ़े आठ बज गये हैं ,आज तुम्हारे दादा जी और पापा को देर हो गयी है ,अब तुम दोनों शांति से बैठे रहना ,वरना सारा गुस्सा तुम दोनों पर ही निकलेगा ।

इतने मे डोर बेल बजी ,दादा जी ,और पापाजी हाथ-मुँह धो कहना खाने बैठ गये ,माँ  एक सेकंड भी देर नहीं करती थी दोनों को खाना परोसने में,क्योंकि माँ वो दिन कभी नहीं भूलती थी ,जब एक दिन खाना देर से परोसने पर माँ को दादा जी से बहुत फटकार पड़ी थी ,और दादा जी ने उस दिन खाना भी…

👍आत्मविश्वास👍

*आत्मविश्वास *

     " आत्म विश्वास यानि स्वयं का स्वयं पर विश्वास
       अद्वित्य,अदृश्य, आत्मा की आवाज़ है ,आत्मविश्वास"

       आत्मविश्वास मनुष्य में समाहित अमूल्य रत्न मणि है।
       आत्मविश्वास एक ऐसी पूंजी है        जो मनुष्य की सबसे बड़ी धरोहर है।

      आत्म विश्वास ही चींटी को पहाड़ चढ़ने को प्रेरित करता          है ,वरना कहाँ चींटी कहाँ पहाड़।
      आत्मविश्वास विहीन मनुष्य मृतक के सामान है ।

       तन की तंदरुस्ती माना की पौष्टिक भोजन से आती है         परन्तु मनुष्य के आत्मबल को बढ़ाता है         उसका स्वयं का आत्मविश्वास ।

       आत्म विश्वास ही तो है जिसके बल पर बड़ी-बड़ी जंगे             जीती जाती हैं ,इतिहास रचे जाते हैं ।        आत्मविश्वास, यानि, स्वयं की आत्मा पर विश्वास        स्वयं का स्वयम पर विश्वास जरूरी है ,वरना हाथों        की लकीरें भी अधूरी हैं।        कहते हैं हाथों की लकीरों में तकदीरें लिखी होती है         बशर्ते तकदीरें भी कर्मों पर टिकी होती हैं ।

       आत्म विश्वास यानि स्वयं में समाहित ऊर्जा को                    पहचानना और उसे उजागार करना ।        …

**मेरी नियति**

**  ना जाने मेरी नियति
        मुझसे क्या -क्या करवाना
            चाहती है ।

       मैं संतुष्ट होती हूँ
       तो होने नहीं देती
       बेकरारी पैदा करती है ,
       जाने मुझसे कौन सा अद्भुत
       काम करवाना चाहती है ।

       मैं जानती हूँ ,मैं इस लायक नहीं हूँ
       फिर भी मेरी आत्मा की बेकरारी ,
       मुझे चैन से बैठने ही नहीं देती।
       समुन्दर में लहरों की तरह छलांगे
                  लगती रहती है।

      मुझमें इतनी औक़ात कहाँ की मैं
       कुछ अद्वितीय कर पाऊँ ,
          इतिहास रच पाऊँ
       पर मेरी नियति मुझसे कुछ
       तो बेहतर कराना चाहती है।

       तभी तो शान्त समुन्दर में
       विचारों का आना -जाना लगा रहता है ।
       और मेरे विचार स्वार्थ से ऊपर उठकर
        सर्वजनहिताय के लिये कुछ करने को
            सदा आतुर रहते हैं ।

        बस मेरी तो इतनी सी प्रार्थना है परमात्मा से
          की वो निरन्तर मेरा सहयोगी रहे ।
                 मेरा मार्गदर्शन करता रहे ।
       विचारों के तूफानों को सही दिशा देकर
      शब्दों के माध्यम से कागज़ पर उकेरते रहती हूँ।




"अनमोल नगीने "

*हम सदियों से ऐसा ही जीवन जीते आये हैं ,हमें आदत है ,हमारा जीवन यूँ ही कट जाता है ।

 ये सवाल सुनने को मिला जब मैं बस्ती में गयी, जब हमारे घर काम करने वाली बाई कई दिनों तक काम  पर नहीं आयी थी ।
किसी दूसरे घर में काम करने वाली ने बताया कि वो बहुत बीमार है उसे बुखार आ रहे हैं ,और उसे पीलिया की शिकायत भी है ।

जब मैं अपनी बाई की झोपड़ी में पहुँची ,तो वो शरीर मे जान न होने पर भी यकायक उठ के बैठ गयी ।
वह बहुत कमजोर हो चुकी थी ,उसे देख मेरा हृदय द्रवित हो उठा ,मैंने उसे लेट जाने को कहा उसका शरीर बुखार से तप रहा था ,इतने मे कोई कुर्सी ले आया मेरे बैठने के लिये ।
मैंने उससे पूछा तुम्हारे घर में और कौन-कौन है ,बोली मेरे दो बच्चे हैं ,एक लड़का और एक लड़की।

लड़का पन्द्रह साल का है काम पर जाता है , उसे पढ़ने का भी बहुत शौंक है अभी दसवीं का पेपर दिया है ,पर क्या करेगा पढ़ कर ,हम ज्यादा खर्चा तो कर नहीं सकते ,  लड़की भी काम पर जाती है, मैंने पूछा लड़की कितने साल की है ,बोली दस साल की ।
मैं स्तब्ध थी ,दस साल की लड़की और काम ,कहने लगी हम लोगों के यहाँ ऐसा ही होता है, घर में बैठकर क्या करेंगें बच्चे ,बे…

"खुला आसमान"

**उपयोगिता और योग्यता**

          *योग्यता ही तो है ,जो
           अदृश्य में ,छुपी उपयोगिता को
           जन्म देती है।*

          * वास्तव में जो उपयोगी है वो शाश्वत है
           उपयोगी  को योग्यता ही तराशती है ।
          जो उपयोगी है, वो सवांरता है, निखरता है
          और समय आने पर अपना अस्तित्व दिखाता है
          योग्यता ही अविष्कारों की दात्री है।

           आवयशकता जब-जब स्वयं को तराशती है
           असम्भव को सम्भव कर देती है
           युगों-युगों तक अपने छाप छोड़ने में सफल होती है


           गहराइयों का शोध आवयशक है
           वायुमंडल में तरंगे शास्वत हैं।
           उन तरंगों पर शोध, योग्यता से सम्भव हुआ
           योग्यता ने तरंगों के माध्यम से
           वायुमंडल में एक खुला जहाँ बसा दिया ।


           वायु,ध्वनि,तरंगों का अद्भुत संयोग
          योग्यता ने तरंगों की रहस्यमयी शक्तियों का भेद बता             दिया ।
          तरंगों के अद्भुत सामंजस्य ने तरंगों से तरंगों  का मेल                 मिला दिया
          आधुनिक समाज की नींव ही तरंगों पर टिकी है
          शब्द है…

"अनमोल खजाना "

दौड़ रहा था ,मैं दौड़ रहा था
बहुत तेज रफ़्तार थी मेरी ,
आगे सबसे सबसे आगे बहुत आगे
बढ़ने की चाह मे मेरे क़दम थमने का
नाम ही नहीं ले रहे थे ।
यूँ तो बहुत आगे निकल आया था "मैं "
आधुनिकता के सारे साधन थे पास मेरे
दुनियाँ की चकाचौंध में मस्त,व्यस्त ।

आधुनिकता के सभी साधनों से परिपूर्ण
मैं प्रस्सन था ,पर सन्तुष्ट नहीं
जाने मुझे कौन सी कमी अखरती थी ।

एक दिन एक फकीर मुझे मिला
वो फ़कीर फिर भी सन्तुष्ट ,मैं अमीर
फिर भी असन्तुष्ट ।

फ़कीर ने मुझे एक बीज दिया,
मैंने उस बीज की पौध लगायी
दिन -रात पौध को सींचने लगा
अब तो बेल फैल गयी ।
अध्यात्म रूपी अनमोल ,रत्नों की मुझे प्राप्ति हुई
मुझे संतुष्टता का अनमोल खजाना मिला
ये अध्यात्म का बीज ऐसा पनपा कि
संसार की सारी आधुनिकता फीकी पड़ गयी
मैं मालामाल हो गया ,अब और कोई धन मुझे रास
नही आया ,अध्यात्म के रस में जब से मैंने परमानन्द पाया।
वास्तव में अध्यात्म से सन्तुष्टता का अनमोल खज़ाना मैंने  पाया

**धरती और आकाश **

***आकाश ,और धरती का रिश्ता तो देखो
कितना प्यारा है ।
ज्येष्ठ में जब धरती तप रही थी
कराह रही थी ,सिसक रही थी
तब धरती माँ के अश्रु रूपी जल कण आकाश में एकत्रित हो रहे थे।।

💐💐वर्षा ऋतु मैं..........
आकाश से बरस रहा था पानी
लोग कहने लगे वर्षा हो रही है
पर न जाने मुझे क्यों लगा
आकाश धरती को तपता देख रो रहा है
अपने शीतल जल रूपी अश्रुओं से
धरती माँ का आँचल धो-धोकर भीगो रहा है
धरती माँ को शीतलता प्रदान कर रहा है।
धरती माँ भी प्रफुल्लित हो ,हरित श्रृंगार कर रही है
वृक्षों को जड़ें सिंचित हो रही हैं।
प्रसन्नता से प्रकृति हरियाली की चुनरिया ओढे
लहलहा रही हैं ।
फल फूलों से लदे वृक्षों की लतायें
रिम-झिम वर्षा के संग झूल रही हैं
विभिन्न  आकृतियों वाले मेघ भी
धरती पर अपना स्नेह लुटा रहे हैं।
धरती और आकाश का स्नेह बहुत ही रोमांचित कर देने वाला है ।

*मीठा ज़हर **

जख्मों पर मरहम लगाते-लगाते
कब हम सयाने हो गये पता ही नहीं चला ।

अब ना ज़ख्म है
 ना जख्मों के दर्द का एहसास है ।
किसी जमाने मे जो ज़ख्म दर्द बनकर चुभते थे
आज उन्हीं जख्मों का एहसास,जीवन में घोल देता है
एक मीठा सा ज़हर।


दर्द तो बहुत दिया जख्मों ने मगर
कयोंकि? बहुत लम्बे सफ़र तक रहे थे,ज़ख्म मेरे हमसफ़र
कैसे भूल जाऊँ मैं उन मीठे जख्मों की कसक।
माना कि जख्म आये थे जीवन मे बन के कहर ।
जीवन की कसौटी थी मग़र ,
पर इन्हीं से बुलन्द हुआ था, मेरे हौसलों का सफ़र
सीखे थे ,इन्हीं से जिन्दगी के कई सबक ।
 आज कोई जख्म  नहीं
 दर्द भी नहीं ।पर ना जाने क्यूँ
कुरेदता है ये दिल पुराने जख्मों
के निशान
तजुर्बा कहता है जब लम्बे समय तक रहे जो कोई
हमसफ़र , फिर चाहे वो
दर्द ही सही ,अपने से हो जाते हैं  ,मीठे से लगने लगते हैं ,
मीठे जख्मों के ज़हर ।।
माना कि दुखदायी था ,
फिर भीआज मीठा सा लगता है
मीठे जख्मों का जहर,








**हरियाली तीज **

घर की बड़ी औरतें ,अपनी बहू ,बेटियों से कह रही थीं जल्दी करो कल 💐हरियाली तीज💐 है ।

 बाजार से श्रृंगार का सामान भी लाना है ,और नाश्ते का सामान घेवर ,सभी तो तैयार करना है ,और तुम सब तो अपने
ही कामों में व्यस्त हो ,चलो-चलो जल्दी करो ।
फिर घर आकर झूला भी तैयार करना है ।
घर की सभी औरतें तैयार होकर बाज़ार समान लेने चली गयी।

इधर घर पर बूढ़ी दादी ,और उनकी पाँच साल की पौती घर पर थे ,दादी पौती लाड़ लड़ा रहे थे ,दादी अपनी पौती से बोली कल तो मेरी गुड़िया चूड़ियां पहनेगी,मेहन्दी लगायेगी और अच्छे-अच्छे कपड़े पहनेगी ।  पौती बोली हाँजी दादी मैं झूला भी तो झूलूंगी ,दादी मुस्करा के बोली हाँ बेटा ,दादी आप भी मेरे साथ झूला झूलना मैं आपको पकड़ कर रखूंगी ,गिरने भी नहीं दूँगी ।
दादी मुस्करा कर बोली हाँ ,मेरी दादी तो गुड़िया है ।
  पौती ने दादी से पूछा कल आप कौन से रंग की साड़ी पहनोगे ,दादी बोली मैं तो हरे रंग की साड़ी पहनूँगी तुम भी हरे रंग का लहंगा पहनना ,मैंने तुम्हारी माँ से तुम्हारे लिये हरे रंग का लहंगा लाने को कहा है ।
पौती बोली पर दादी मुझे तो लाल और पीला रंग अच्छा लगता है ।
दादी बोली हाँ बेटा रंग तो सब अच्छे …

**रंगों का सामंजस्य**

एक ख्याति प्राप्त खूबसूरत, चित्र
    जिसे देख सब मंत्रमुग्ध हो
    उसे निहार रहे थे।
    चित्र और चित्रकार की चित्रकारी
    के कसीदे पड़े जा रहे थे।

     चक्षुओं का क्या कहना
     नजरें गड़ाये मानों सुंदरता
     अपने में समा लेना चाहते थे
     मानों दुबारा इतनी सुंदरता देखने
      को मिले न मिले
    जिसे देख वाह!वाह!
    स्वतः ही निकल जाता हो।

    आप जानना नहीं चाहेंगे
     उस चित्र का चित्रकार कौन है
     उस चित्र के पीछे का सच।

     कोई भी चित्र यूँ ही खूबसूरत नहीं
      बन जाता है।
      कभी वो भी खाली कैनवास ,यूँ।
      बेतरबीब पड़े रंग ,कहीं रंग ,कहीं
      केनवास ,सब नीरस, अस्त, व्यस्त

      कभी कहीं किसी के नीरस मन में
      में उपजा एक खूबसूरत ख्याल ।
      उस ख्याल ने लगाये विचारों के पंख
      बहुत फडफ़ड़ाएं उसके पंख
      कभी इस दिशा कभी उस दिशा
       जीवन मे खूबसूरती की चाह थी
        रंगों में सामंजस्य बनाना था
         कई बार बिखरे ,मिटे ,आखिर
          कड़ी मेहनत के बाद एक खूबसूरत
           तस्वीर तैयार हुयी जो समाज के लिये
            मिसाल बन गयी
             तारीफ च…
****आओ जीवन के किरदार में सुन्दर रंग भरे***                  💐                                    ************************************
 ** तन के पिंजरे में**
**  शिवशक्ति परमात्मा की
**  दिव्य जोत ***
  आत्मा से ही जीवन का अस्तित्व
  आत्मा बिन शरीर बन जाता है शव।।
  फिर क्यों न आत्मा को ही शक्तिशाली बनायें
  आत्मा को पमात्मा में स्थिर करके जीवन को
  सफ़ल बनाएं ।

**जीवन का सत्य , एक अनसुलझी पहेली
जीवन सत्य है
पर सत्य भी नहीं
पर जीवन क्या है
एक अनसुलझी पहेली ।।

**जीवन एक सराय
हम मुसाफ़िर माना कि सत्य है
सफ़र....बहुत लम्बा सफ़र ।।
सफ़र का आनन्द लो
खूबसूरत यादों को जीवन के
कैमरे में कैद कर लो अच्छी बात है ,
बस यही  साथ  जाना है ।
अच्छी यादें, माना कर्मों की खेती
जैसा बीज ,वैसी खेती ।

जीवन के रंगमंच पर भवनाओं का सैलाब
कर्मो का मायाजाल, ईर्ष्या, द्वेष, लोभ, स्वार्थ
जैसी भावनायें ,भवनाओं में उलझ जाना स्वभाविक
माना कि, सत्य,असत्य,के विवेक का भी बोध है।

कहता है शोध, जीवन है.....
आत्मा की शुद्धि का संयोग
आत्मा की शुद्धि स्वयं में हठयोग
कीचड़ में कमल की तरह खिलते रहना
कीचड़ में रहकर स्वयं को कीचड़
से …

***आखिर कब तक**

आखिर कब तक **

बहुत हो गया चूहे बिल्ली का खेल

ये तो वही आलम है ,घर मे शेर ,बाहर गीदड़

बड़ी-बड़ी बातें करनी तो सभी को आती है

पकड़ो -पकड़ो चिल्लाने से कुछ नही होगा

हत्यारे तुम्हारे ही घरों में घुसकर तुम्हें मार रहे है ।


वाह! वाह! मरते रहो ,मरणोपरांत तुम्हे सम्मान मिलेगा

बड़े-बड़े नेता तुम्हारी मृत्यु पर राष्ट्रीय शोक मनायेंगे

बड़ी-बड़ी योजनाएं बनेगी ,आतंकवादी यों को जड़ से मिटाने की

तुम्हारे नाम पर तुम्हारे परिवार वालों को सहायता राशी भी मिलेगी।


बस-बस-बस बस करो क्यों अपने ही देश की जड़ों को खोखला कर रहे हो ।

अब बातें करने का समय बीत गया है ,कहते भी हैं जो *लातों के भूत
होते है वो बातों से नही मानते *

तुम्हारी सादगी को तुम्हारी शराफ़त को तुम्हारी कमजोरी समझ
आँकवादी तुम पर वार-वार कर रहे है ।

आखिर कब तक कितने माँ के लाल शहीद होंगे ,

☺शिक्षा और सभ्यता ☺

☺**शिक्षा, सभ्यता ,और आधुनिकता,
शिक्षा है, तो सभ्यता आयी ,सभ्यता आयी तो आधुनिकता बड़ी।।*
☺आज की युवा पीढ़ी शिक्षित हुयी
शिक्षा के संग सभ्यता आना स्वभाविक है
उत्तम संजोग है ,सभ्यता ,तरक्की,और उन्न्ति की ऊँचाइयाँ छूना ।👍
क्या सभ्यता ,सिर्फ अत्यधिक धनोपार्जन और ब्रेंडड
वस्त्रों तक सीमित है ।
आधुनिकता की दौड़ में सब दौड़ रहे है
 लाभ के लोभ में ,संस्कारों की हानि का कोई  खेद नहीं।।

💐सभ्यता के सही मायने ही नहीं ज्ञात  अत्यधिक धनोपार्जन करना ही ,मात्र  तरक्की का सूचक नहीं ।☺ वातानुकूलित कक्ष में बैठकर कोट,पेन्ट,टाई पहनकर  रौब दार रवैया अपनाने को ही , आधुनिकता ,और सभ्यता की पहचान माना जाने लगा है
हाँ सत्य है सुविधाएं बढ़ना प्रग्रति का सूचक है ।
परन्तु सुविधाओं की आड़ में आधुनिकता
के प्रदर्शन में अपनी संस्कृति को भूल जाना
छोटों को प्यार,स्नेह,बड़ों का आदर करना भूल जाना
ऐसी सभ्यता किस काम की । सभ्यता यानि ,आचरण की सभ्यता , विचारों की विनम्रता ,शिक्षा और सभ्यता एक दूसरे के पूरक हैं ,सच्ची शिक्षा तभी सार्थक है ,जब वह सभ्य आचरण के साथ फलती फूलती है ।।
******************************************

*****स्वयं का नेतृत्व ****

💐💐   कौन किसके हक की बात करता है
    अपने कर्मों की खेती स्वयं ही करनी पड़ती है
    स्वयम ही स्वयम को प्रोत्साहित करो
    काफिले में सर्प्रथम तुम्हे अकेले ही चलना पड़ेगा
     जीत तो उसी की होती है ,जो स्वयम ही स्वयम का
     नेतृत्व करता है।💐💐

** मैंने उस वक्त चलना शुरू किया था
     जब सब दरवाजे बंद थे ,
     पर मैं हारमानने वालों में से कहाँ था
     कई आये चले गए ,सब दरवाजे बंद है
     कहकर मुझे भी लौट जाने की सलाह दी गयी ।पर ,

     मैं था जिद्दी ,सोचा यहां से वापिस नहीं लौटूंगा
     टकटकी लगाये दिन-रात दरवाजा खुलने के इन्तजार
    मैं पलके झपकाए बिना बैठा रहता ,
    बहुतों से सुना था दरवाजा सालों से नही खुला
    पर मेरी जिद्द भी बहुत जिद्दी थी ।

   एक दिन जोरों की तूफ़ान आने लगा ,आँधियाँ चलने लगी
    मेरी उम्मीद ए जिद्द थोड़ी-थोड़ी कमजोर पड़ने लगी
   पर टूटी नहीं ,नजर तो दरवाजे पर थी
   तीर कमान में तैयार था , अचानक तेज हवा का झौंका          आया मेरे चक्षुओं में कोई कंकड़ चला गया ,
   इधर आँख में कंकड़ था , उधर आँधी से जरा सा
 दरवाजा खुला ।
😢
   आँख कंकड़ से जख्मी थी ,पर मैंने निशाना स…

**आभार ब्लॉग जगत **

**आभार ब्लॉग जगत **
**मकसद था कुछ करूं, मेरी दहलीज जहां तक थी वहीं तक जाना था  ,करना था कुछ ऐसा जो उपयोगी हो कल्याण कारी हो , जिसकी छाप मेरे दुनियाँ से चले जाने के बाद भी रहे , बाल्यकाल में महान लेखकों की लेखनी ने प्रभवित  किया  देश की आज़ादी के किस्से वीर शहीदों के किस्से आत्मा को झकजोर देते। दायरा जहां तक सीमित था  लिखकर अपनी बात कहनी शुरू की , यूँ तो किसी का लिखना कौन पड़ता है ,पर फिर भी लिखना शुरू किया । धन्यवाद ब्लॉग जगत का । आज लिखने को खुली ज़मीन है । आसमान की ऊँचाइयाँ है , क्या सौभाग्य है  परमात्मा ने स्वयं हम लेखकों की सुनी शायद । आज ब्लाग जगत के माध्यम से लेखक भी सम्मानित होने लगे ।
** क्या छिपा रहे हो ****   {कविता }

   * क्या छिपा रहे हो
   * कितना छिपाओगे
    *लाख छुपाओगे उजाले को
     💐उजाला किसी झिर्री से बाहर आ ही जायेगा
    💐💐💐💐💐💐
    *जो सच है ,सामने आ ही जाता है
** श्वेत मेघों की ओट में
   वो छुपा बैठा था सच
   बना-बना कर विभिन्न
   आकृतियाँ मोहित कर
   रहा था सभी को ।

  💐 आसमान की ऊँचाइयाँ
   पर जा -जाकर इतरा रहा था।
   उसी में सच्चाई दिखा
   दिल लुभा रहा था   ।

  💐 सुना था सच सामने आ ही जाता है
   अचानक तेज आँधियाँ चली
   सब अस्त-व्यस्त ।
   श्वेत मेघों का पर्दा हटा
   हो गया सब पानी-पानी ।

  शाश्वत था जो वो सामने आ गया
  लाख छुपा सत्य विभिन्न आकृतियों
  वाले श्वेत ,काले ,घने ,मेघों की ओट में ।**💐💐

***मेहनती मजदूर***

💐जीवन :------हर एक के लिये जीवन की परिभाषा अलग-अलग है ।
जब तक हम स्वयं तक सीमित रहते हैं ,तब तक हमें जीवन वैसा ही लगता है ,जैसा हम देखते और सोचते हैं। परन्तु जब हम स्वयं से बाहर निकल कर समाज,देश, दुनियाँ को देखते हैं ,तब ज्ञात होता है ,कि जीवन की परिभाषा सब के लिये भिन्न -भिन्न है ।

💐मनुष्य जब तक स्वयं तक सीमित रहता है ,वो सोचता है ,कि सबसे ज्यादा अभावग्रस्त वो ही है ,जितनी मुश्किलें और बंदिशें उसके पास हैं ,उतनी किसी के हिस्से में नहीं । परन्तु जब हम अपने घर से बाहर निकलकर देखते हैं तो ऐसे-ऐसे कष्टों में लोग जी रहे होते है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते ,तब हम पाते हैं कि हम तो बहुत बेहतर जीवन जी रहे है ,अभी तक हम बस यूँ ही रोते रहे ।
मन ही मन को ढांढस बन्धता है ,कहता है ,देख ये कैसे -कैसे जीवन जी रहे हैं ।

एक बार तपती दोपहरी में मेहनती मजदूरों को काम करते देख दिल पसीजा साथ में ही उनकी पत्नियां बच्चे सब के सब लगे हुए थे। कोई महिला इंठों का तसला सिर पर उठाए कोई रेते का बच्चे भी वहीं खेल रहे हैं मिट्टी में उन्हें कोई चिन्ता नहीं ।
आखिर मैं एक मजदूर से पूछ बैठा तुम इतनी मेहनत करते ह…

💐**बचपन से हमने देखा है**💐

💐भारत की पृष्ठ भूमि पर हर   मज़हब शान से जीता है ।💐  बचपन से हमने देखा है ,  चाहे मुबारक* ईद* हो या* दीवाली *  हमारे लिये अवकाश संग खुशियों  की सौग़ात का   तोहफ़ा होता है।💐💐 हम तो ईद हो या दीवाली सबमें प्रफुल्लित होते हैं । 💐👍मुबारक ए ईद💐पर भी इबादत अमन चैन की      दुआ संग हर्षोल्लास से खुशियां बाँटी जाती है    और जी जाती है।  *दीपावली पर भी प्रभु प्रार्थना संग   खुशियाँ बांटी जाती हैं ,और ज्ञान के   प्रकाश का उजाला किया जाता है ।   तातपर्य सभी का एक है ,अमन-प्रेम सुख -शांति का संदेश । 💐💐रामायण, हो या कुरान सभी तो प्रेम संग  भाईचारे का संदेश देते है । हमने तो बचपन से खुशियों को बाँटने की  परम्परा निभायी है । ईद हो दीवाली हमारे चेहरों पर हर पल खुशी आयी है हमने तो हर त्यौहार पर भाईचारे की रीत निभायी है ।

नकारत्मकता से सकारात्मकता की और***

**नकारत्मकता से सकारात्मकता की और***
                ****************************💐💐

**करने को तो मैं कुछ अच्छा चला था जमाने में,
 एक रोग मुझे लग गया ।
 दूसरों की बुराइयाँ ,और कमियाँ निकालने में मैं व्यस्त हो    गया ।😢

☺व्यस्त इतना हुआ कि ?

करने को तो मैं कुछ अच्छा चला था जमाने में
मुझे ही रोग लग गया ,बुराइयाँ देखते-देखते
मैं ही अब बुरा हो गया ।😢

अचानक मेरी दृष्टि बदली,मेरी आत्मा से आवाज आयी
वो मुझे धिक्कारने लगी......
शर्म से मेरी आँख झुक गयी
अश्रुओं ने मेरी की धुलाई😢😢

मेरी आत्मा ने ,परमात्मा के आगे
शीश झुका के क़सम अब खायी
नहीं देखूँगा ,में किसी की बुराई।☺

बुराई को अच्छाई में बदलने की मेरी सोच बन आयी
नकारात्मक से सकारात्मक दृष्टि मैंने पायी
नकरात्मक सोच से करके विदाई
अब सकारत्मकता के बीज मैं बोता हूँ 💐

बुराईयों की झाड़ काट-काट कर
अब अच्छाइयों के बीज बोता रहता हूँ💐💐
भले ही कुछ वक्त लगे ,पर एक दिन तो
बुराइयाँ खत्म हो जायेंगी ,अच्छाइयों
की फ़सल लहलहायेगी ।💐💐💐💐💐
बहाने बाजी से बचिये *
**********************
सामने पहाड़ है , या गहरी खायी है,पहाड़ को हम
हटा नहीं सकते ,खायी में हम कूद नहीं सकते ।

रास्ते हमे बनाने हमें किस तरह बनाने है
ये हमारी सोच, और मेहनत है।

**जब हम रास्ते पर चलते हैं ।
तो टेढ़े-मेढे ,ऊँचे-नीचे सीधे सपाट
हर तरह के मोड़ आते हैं ,जिन्दगी में
परन्तु हमें उनपर चलना पड़ता है ।

रास्तों के बहाना बनाकर रुकना यानि
हम मानसिक रूप से कमजोर हैं ,बहाने बाजी
का बहाना बना रहे हैं।
मेहनत हम स्वयं नही करते और दोषारोपण
दूसरों पर करते हैं ।
इसलिये उठिये बहानेबाजी छोड़िये
अपनी असफलता का दोषारोपण किसी
किसी दूसरे पर करने से बचें ।।
ढूंढिये कमी कहाँ है ।
और उस कमी को दूर करके अपनी किस्मत
के केनवास में रंग खुद भरिये ।**

**मोबाइल और इनटर नेट **

***माना की मोबाइल आधुनिक जीवन की बहुत बड़ी आव्यशकता और उपयोगी भी है। परन्तु इसका दिन-रात आव्यशकता से अधिक उपयोग मानव को एक लत के रूप में लग रहा है।

माना कि इनटरनेट से सब जानकारी मिलती है ,पर जब से इंटरनेट का उपयोग अधिक बढ़ गया है ,तब से मनुष्य ने अपने दिमाग़ का उपयोग करना कम कर दिया है ,जो मनुष्य की सृजनात्मक शक्ति को श्रीण कर रहा है ।

*समय रहते इस मोबाइल नाम की लत से छुटकारा नहीं मिला तो एक दिन मनुष्य
मानसिक तौर पर अकेला और अपंग हो जायेगा ।*

*आतंकवाद की जड़ों को उखाड़ फैंको*

*आखिर कब तक कितनी माताएं ,कितने लाल जन्मती    रहेंगी ,और देश को समर्पित करती रहेंगी ।

 वाह!  कितनी महान हैं ये माताएं ,पूजनीय हैं ,वंदनीय है ।*
 "आखिर कब तक कितनी माताओं के लाल शहीद होते रहेंगें।
 सरहद पर तैनात सैनिक ,हम सब की रक्षा की खातिर
 क्या बस शहीद होने के लिये हैं , माना कि ये उनका कर्म है
  धर्म है । *

  *हाय! बड़ा दर्दनीय है ये ,निन्दनीय है ये
  वो भी किसी माँ के लाडले हैं, किसी के भाई ,
  मित्र, और पति ,क्या उनकी जान की कीमत बस
  शहीद होना ही है ।*

 "बस करो आतंकवाद के आगे यूँ हर पल मरना
 वो चार मारे हमारे सैनिक उस पर फिर चार मारे छः मारे ।
 इस तरह आतंकवाद खत्म होने वाला नहीं
 आंतकवादी को जड़ से उखाड़ फैंकना है।

 ढूँढ़ो आँतकवाद की बुनियाद को ,यूँ पल-पल मरने से
 बेहतर है ,उखाड़ फैंको उनकी जड़ों को ,हिला दो आतंकवादियों की बुनियादों को ।

वो हमें डरा -डरा के हमारी जड़ें हिला रहें हैं
अब वक्त आ गया है बहुत हो गया ।
उखाड़ फैंको आतंकवाद को चाहे जो भी हो
आँकवादी अपनी आने वाली नस्लें भी खराब कर रहें है
जहरीले विचारों का जहर आगे अपने ही कुटुम्ब को भी परोस रहे है ।

जिस तरह" श्…

💐💐**संघर्ष -यानि संग-हर्ष जियो **💐

*जीवन है तो संघर्ष है *
यूं तो प्रकृति प्रदत्त सब और सम्पदा है 💐
जीवन को तो जीना है ,क्यों ना फिर
संग-हर्ष जियो ।💐
 समय का पहिया घूम रहा है
  युग परिवर्तन हो रहा है ।
  परिवर्तन प्रकृति का नियम है ।
  अविष्कार भी आवश्यकता का कारण है
  मानव बुद्धि में उपजे अणुओं ,
  मानव की दिव्य आलौकिक बुद्धि
  ने दुनियाँ को नये-नये आयाम दिये हैं
 आकाश क्या अन्तरिक्ष  में भी मानव के
 कदम पढ़े है ।
 वो चाँद जिसकी खूबसूरती को मनुष्य निहारता है
गजलें और नग़मे बनाता है ,जिस चाँद को देख महिलाएं
व्रत उपवास पूर्ण करती हैं ,उस चाँद पर जाकर वैज्ञानिक
सत्य परख आया है ।💐
मनुष्य का जीवन प्रग्रति यानि आगे बढ़ते रहने का नाम है
रुक गया तो थम गया
जीवन का अन्त हो गया ,संघर्ष जीवन का मंत्र है ।
खुशहाल जीवन का यंत्र है ।💐💐💐💐

*मेरे ख्वाब*

**जाने किसकी दुआ रंग ला रही है ,
 ख्वाबों के गुलिस्तान की क्यारियों से
 भीनी सी ,और मीठी सी सुगन्ध आ रही है *।

 " मैंने ख्वाबों में जो सपने बुने थे
  उन सपनों में मेरी वफ़ा शायद रंग
  ला रही है "।
  *ख्वाबों के सच होने का ना मुझको
  यकीन था ,ख्वाबों को देखना ,निंद्रा
  में आना ,फिर टूट जाने पर यकीन था* ।

  *मेरे ख्वाबों में निष्फल कर्म का अर्श था।
  आत्मा की आवाज़ को परमात्मा का संदेश
   जान बस कर्म करते रहने का जज़्बा था।
   शायद वही जस्बा ए कर्म ,मुझे रास आ गया
    दरिया की तरह में भी बहता रहा ।*

    *आत्मा का परमात्मा से सम्बंध हो गया
      जो उसका था सब मेरा हो गया ।
       मेरा जीवन सफ़ल हो गया ।
            सफ़ल हो गया* ।।
***लोहा** ******
*आज मैं अपने मित्र से मिलने अस्पताल गया ,बहुत ही कमजोर हो गया था मेरा मित्र ,डॉक्टरों से पूछने पर पता चला उसका ब्लड प्रेशर बहुत बढ़ गया था ,शायद उनको चिन्ता है ।जो इन्हें अन्दर ही अन्दर खाये जा रही है ।
मैं अपने मित्र के कमरे में उससे मिलने गया वह अभी सो रहा था ,शायद डॉक्टर ने दवा दी थी उससे नींद आ गयी थी ।
मैं अपने मित्र के लिये फूलों का गुलदस्ता ,थोड़े फल और जूस ले गया था । मैं खाली बैठा-बैठा सामने पड़ी मैगज़ीन उठा कर पढ़ने लगा ।
थोड़ी देर में मेरे मित्र की आँख खुली ,मैं तो एक लेख पढने मैं व्यस्त था । मेरा मित्र सामने पड़े फूलों को देखकर फूलों की तरह मुस्करा रहा था ,एकाएक मेरी नज़र मेरे मित्र पर पड़ी ,मैं बोला क्या भाई हमेशा ऐसे ही नही मुस्करा सकते मित्र बोला तुम अगर रोज यूं ही मुझसे मिलने और ये खिले फूल मेरे लिये लाते रहो तो मेरे को कोई गम नहीं ।
इतने में नर्स आ गयी दवा का समय हो गया था ।
नर्स के जाने के बाद मित्र बोला यार कुछ मीठा खिला दो ये कड़वी दवाओं से मुँह कड़वा हो गया है ,मैंने उसे सेब काट कर खिलाया ,
मैंने अपने मित्र से पूछा यार तुम्हें किस बात की चिंता है ये जो चिन्ता है ना,…

****कामयाबी**

💐💐💐*क़ामयाबी*💐💐💐💐

*कामयाबी * अपने-अपने जीवन में हर कोई सफ़ल होना चाहता है । और हर किसी के लिए कामयाबी के मायने अलग-अलग हैं। आज के आधुनिक समाज में कामयाबी के मायने सिर्फ ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना रह गया है ,वैसे देखा जाये तो ठीक भी है जिसके पास जितना अधिक धन दौलत होगी वो बेशर्ते कामयाब है ,क्योंकि वो अपने पैसे के बल पर दुनिया के सारे सुख हासिल कर सकता है ।
पर हाँ एक चीज जो बहुत अनमोल है और जिससे वास्तव में सुख मिलता है वो है मन की शांति जो धन से नहीं मिलती ,हाँ कुछ समय के लिए आपका मन बहला सकती है ,और फिर वही अशान्ति।
वास्तविक शांति मिलती है जो आपका दिल कहे वो करो जिससे किसी का बुरा न हो धन कमाइये पर अपनी खुशियों को दांव पर रख कर नहीं कहीं कल ऐसा ना हो जिन खुशियो के लिए आपने आज अपनी खुशियाँ दाव पर लगायी ,वो खुशियाँ जीने का जब समय आये तब आपके पास सम ना बचे ।

मेरे लिए तो कामयाबी वो है जहां काम करने में मुझे और मेरी आत्मा को सुकून मिल, मेरे और मेरे समाज के हित मे हो।

मेरा जीवन सफल है ,अग़र मैं जो भी लिखूँ वो कहीँ किसी एक का भी मार्गदर्शन करता हो ,वही मेरे लिए मेरी सच्ची कामयाबी…

*एहसास *

😊* बात हुयी जब एहसास की     एहसास की रूह से    एक और एहसास निकला
☺खुशियों वाले दिन और रात का।

एहसास वो एहसास है,जिसमें
जिन्दगी का हर लम्हा व्याप्त है।💐

💐खुशी हो या गम हो एहसास तो होता ही है।

💐खुशी का एहसास एक नशा है ,जिसे पाकर
इंसान सब भूल जाता है।
पर दर्दे एहसास जिसमे रूह पाक हो
उस दर्दे एहसास की बात बहुत खास है
वह एहसास खुद से मिलाने का बेहतरीन
            एहसास है ।

एहसास की रूह से आह निकली बस करो एहसासों से खेलने का      शौंक ना पालों ।

ये दर्दे एहसास है ,जख्म गहरे दे जाता है  नासूर बनकर जीवन भर चुभन देते रहते हैं।

महफ़िल में मुस्कराते चेहरे पर एक मोती आकर  गिरता है । वह मोती एहसास का दिलों में छुपे         एहसास का ।
जीवन की खुशबू एहसास          जीवन ही एक एहसास
कभी सुख ,कभी दुख,कभी रोशन करने को जग का एहसास।
बहुत खूबसूरत होता है परस्पर प्रेम का एहसास।**😢💐

**निशब्द**

निशब्द

एक व्यापारी था ,जिसका बेटा M.B.A करके आया था । पिता का व्यापार था ,पिता की इच्छा पहले से ही थी कि मेरा बेटा मेरा व्यापार संभाले ।
बेटे ने भी पिता की इच्छा के अनुरूप व्यपार में अपना योगदान दिया नयी तकनीक नये आयाम पिता जी थोड़े नाराज़ थे कि इतने पुराने तौर -तरीकों को मेरा बेटा बदल रहा है, कहते रहे अभी तक हम भी तो कम ही रहे थे और अच्छा ही कम रहे थे ।

लेकिन पिताजी जानते थे कि उनका बेटा बाहर से पढ़कर आया है कुछ तो बदलाव करेगा ही ,बस मन ही मन भगवान से प्रार्थना करते थे कि मेरा बेटा कामयाब हो ।

आखिर बदलाव के साथ बेटे ने पिताजी की गद्दी सम्भाली पिताजी की दुआओं और बेटे की कड़ी मेहनत से एक साल में अच्छा मुनाफा हुआ । बेटे ने पिताजी के चरण स्पर्श करते हुए कहा पिताजी मुझे एक पार्टी करनी है ,एक साल में व्यापार में अच्छा मुनाफा हुआ है ,पिताजी बोले जरूर बेटा पर पार्टी करके अपनी मेहनत का पैसा अपने यार दोस्तों में यूँ ही उड़ा दोगे ,अरे बुला लो अपने खास मित्रों को घर पर अच्छे से पार्टी कर लेंगे ,पर बेटा अगर तुम्हें खुशी ही मनानी है ,तो,किसी अनाथ आश्रम चल कर या वृद्धाश्रम जाकर गरीब जरूरतमंदों पर अपना पै…

💐💐*कृषकों को नमन*💐💐

💐 **कृषकों को नमन**💐

💐💐सर्वप्रथम जीने के लिये *अन्न है आवयशक ।
* मैं कृषक मैं खेत जोतता हूँ उसमें बीज डालता हूँ
मेरी मेहनत रंग लाती है जब खेतों में फ़सल लहलहाती है
मेरे द्वारा उगाया गया अन्न सिर्फ मैं ही नहीं खाता हूँ
ना ही अन्न को गोदामों में भरता हूँ ,की कल मैं उसे ऊँची कीमत
पर बेच पाऊँ।💐

बस मेरी आवयशक आवयशकताएँ पूरी हो जाएं
मैं बस यही चाहता हूँ , पर कभी -कभी तो मैं साहूकार के
लोभ के कारण कर्ज में डूब जाता हूँ ।

मेरे परिवार की कई पीढ़ियों का जीवन कर्ज उतारते बीत
जाता है ,फिर भी वह कर्ज खत्म नही होता ।

*मैं किसान *अगर *अन्न नही उगाऊंगा तो सब भूखे मर
जाओगे ।
दो वक्त की रोटी के लिये ही मानव करता है
दुनियाँ भर के झंझट ।

अंत में पेट की क्षुधा मिटा कर ही पाता है चैन