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***आखिर कब तक**

आखिर कब तक **

बहुत हो गया चूहे बिल्ली का खेल

ये तो वही आलम है ,घर मे शेर ,बाहर गीदड़

बड़ी-बड़ी बातें करनी तो सभी को आती है

पकड़ो -पकड़ो चिल्लाने से कुछ नही होगा

हत्यारे तुम्हारे ही घरों में घुसकर तुम्हें मार रहे है ।


वाह! वाह! मरते रहो ,मरणोपरांत तुम्हे सम्मान मिलेगा

बड़े-बड़े नेता तुम्हारी मृत्यु पर राष्ट्रीय शोक मनायेंगे

बड़ी-बड़ी योजनाएं बनेगी ,आतंकवादी यों को जड़ से मिटाने की

तुम्हारे नाम पर तुम्हारे परिवार वालों को सहायता राशी भी मिलेगी।


बस-बस-बस बस करो क्यों अपने ही देश की जड़ों को खोखला कर रहे हो ।

अब बातें करने का समय बीत गया है ,कहते भी हैं जो *लातों के भूत
होते है वो बातों से नही मानते *

तुम्हारी सादगी को तुम्हारी शराफ़त को तुम्हारी कमजोरी समझ
आँकवादी तुम पर वार-वार कर रहे है ।

आखिर कब तक कितने माँ के लाल शहीद होंगे ,

☺शिक्षा और सभ्यता ☺

☺**शिक्षा, सभ्यता ,और आधुनिकता,
शिक्षा है, तो सभ्यता आयी ,सभ्यता आयी तो आधुनिकता बड़ी।।*
☺आज की युवा पीढ़ी शिक्षित हुयी
शिक्षा के संग सभ्यता आना स्वभाविक है
उत्तम संजोग है ,सभ्यता ,तरक्की,और उन्न्ति की ऊँचाइयाँ छूना ।👍
क्या सभ्यता ,सिर्फ अत्यधिक धनोपार्जन और ब्रेंडड
वस्त्रों तक सीमित है ।
आधुनिकता की दौड़ में सब दौड़ रहे है
 लाभ के लोभ में ,संस्कारों की हानि का कोई  खेद नहीं।।

💐सभ्यता के सही मायने ही नहीं ज्ञात  अत्यधिक धनोपार्जन करना ही ,मात्र  तरक्की का सूचक नहीं ।☺ वातानुकूलित कक्ष में बैठकर कोट,पेन्ट,टाई पहनकर  रौब दार रवैया अपनाने को ही , आधुनिकता ,और सभ्यता की पहचान माना जाने लगा है
हाँ सत्य है सुविधाएं बढ़ना प्रग्रति का सूचक है ।
परन्तु सुविधाओं की आड़ में आधुनिकता
के प्रदर्शन में अपनी संस्कृति को भूल जाना
छोटों को प्यार,स्नेह,बड़ों का आदर करना भूल जाना
ऐसी सभ्यता किस काम की । सभ्यता यानि ,आचरण की सभ्यता , विचारों की विनम्रता ,शिक्षा और सभ्यता एक दूसरे के पूरक हैं ,सच्ची शिक्षा तभी सार्थक है ,जब वह सभ्य आचरण के साथ फलती फूलती है ।।
******************************************

*****स्वयं का नेतृत्व ****

💐💐   कौन किसके हक की बात करता है
    अपने कर्मों की खेती स्वयं ही करनी पड़ती है
    स्वयम ही स्वयम को प्रोत्साहित करो
    काफिले में सर्प्रथम तुम्हे अकेले ही चलना पड़ेगा
     जीत तो उसी की होती है ,जो स्वयम ही स्वयम का
     नेतृत्व करता है।💐💐

** मैंने उस वक्त चलना शुरू किया था
     जब सब दरवाजे बंद थे ,
     पर मैं हारमानने वालों में से कहाँ था
     कई आये चले गए ,सब दरवाजे बंद है
     कहकर मुझे भी लौट जाने की सलाह दी गयी ।पर ,

     मैं था जिद्दी ,सोचा यहां से वापिस नहीं लौटूंगा
     टकटकी लगाये दिन-रात दरवाजा खुलने के इन्तजार
    मैं पलके झपकाए बिना बैठा रहता ,
    बहुतों से सुना था दरवाजा सालों से नही खुला
    पर मेरी जिद्द भी बहुत जिद्दी थी ।

   एक दिन जोरों की तूफ़ान आने लगा ,आँधियाँ चलने लगी
    मेरी उम्मीद ए जिद्द थोड़ी-थोड़ी कमजोर पड़ने लगी
   पर टूटी नहीं ,नजर तो दरवाजे पर थी
   तीर कमान में तैयार था , अचानक तेज हवा का झौंका          आया मेरे चक्षुओं में कोई कंकड़ चला गया ,
   इधर आँख में कंकड़ था , उधर आँधी से जरा सा
 दरवाजा खुला ।
😢
   आँख कंकड़ से जख्मी थी ,पर मैंने निशाना स…

**आभार ब्लॉग जगत **

**आभार ब्लॉग जगत **
**मकसद था कुछ करूं, मेरी दहलीज जहां तक थी वहीं तक जाना था  ,करना था कुछ ऐसा जो उपयोगी हो कल्याण कारी हो , जिसकी छाप मेरे दुनियाँ से चले जाने के बाद भी रहे , बाल्यकाल में महान लेखकों की लेखनी ने प्रभवित  किया  देश की आज़ादी के किस्से वीर शहीदों के किस्से आत्मा को झकजोर देते। दायरा जहां तक सीमित था  लिखकर अपनी बात कहनी शुरू की , यूँ तो किसी का लिखना कौन पड़ता है ,पर फिर भी लिखना शुरू किया । धन्यवाद ब्लॉग जगत का । आज लिखने को खुली ज़मीन है । आसमान की ऊँचाइयाँ है , क्या सौभाग्य है  परमात्मा ने स्वयं हम लेखकों की सुनी शायद । आज ब्लाग जगत के माध्यम से लेखक भी सम्मानित होने लगे ।
** क्या छिपा रहे हो ****   {कविता }

   * क्या छिपा रहे हो
   * कितना छिपाओगे
    *लाख छुपाओगे उजाले को
     💐उजाला किसी झिर्री से बाहर आ ही जायेगा
    💐💐💐💐💐💐
    *जो सच है ,सामने आ ही जाता है
** श्वेत मेघों की ओट में
   वो छुपा बैठा था सच
   बना-बना कर विभिन्न
   आकृतियाँ मोहित कर
   रहा था सभी को ।

  💐 आसमान की ऊँचाइयाँ
   पर जा -जाकर इतरा रहा था।
   उसी में सच्चाई दिखा
   दिल लुभा रहा था   ।

  💐 सुना था सच सामने आ ही जाता है
   अचानक तेज आँधियाँ चली
   सब अस्त-व्यस्त ।
   श्वेत मेघों का पर्दा हटा
   हो गया सब पानी-पानी ।

  शाश्वत था जो वो सामने आ गया
  लाख छुपा सत्य विभिन्न आकृतियों
  वाले श्वेत ,काले ,घने ,मेघों की ओट में ।**💐💐

***मेहनती मजदूर***

💐जीवन :------हर एक के लिये जीवन की परिभाषा अलग-अलग है ।
जब तक हम स्वयं तक सीमित रहते हैं ,तब तक हमें जीवन वैसा ही लगता है ,जैसा हम देखते और सोचते हैं। परन्तु जब हम स्वयं से बाहर निकल कर समाज,देश, दुनियाँ को देखते हैं ,तब ज्ञात होता है ,कि जीवन की परिभाषा सब के लिये भिन्न -भिन्न है ।

💐मनुष्य जब तक स्वयं तक सीमित रहता है ,वो सोचता है ,कि सबसे ज्यादा अभावग्रस्त वो ही है ,जितनी मुश्किलें और बंदिशें उसके पास हैं ,उतनी किसी के हिस्से में नहीं । परन्तु जब हम अपने घर से बाहर निकलकर देखते हैं तो ऐसे-ऐसे कष्टों में लोग जी रहे होते है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते ,तब हम पाते हैं कि हम तो बहुत बेहतर जीवन जी रहे है ,अभी तक हम बस यूँ ही रोते रहे ।
मन ही मन को ढांढस बन्धता है ,कहता है ,देख ये कैसे -कैसे जीवन जी रहे हैं ।

एक बार तपती दोपहरी में मेहनती मजदूरों को काम करते देख दिल पसीजा साथ में ही उनकी पत्नियां बच्चे सब के सब लगे हुए थे। कोई महिला इंठों का तसला सिर पर उठाए कोई रेते का बच्चे भी वहीं खेल रहे हैं मिट्टी में उन्हें कोई चिन्ता नहीं ।
आखिर मैं एक मजदूर से पूछ बैठा तुम इतनी मेहनत करते ह…

💐**बचपन से हमने देखा है**💐

💐भारत की पृष्ठ भूमि पर हर   मज़हब शान से जीता है ।💐  बचपन से हमने देखा है ,  चाहे मुबारक* ईद* हो या* दीवाली *  हमारे लिये अवकाश संग खुशियों  की सौग़ात का   तोहफ़ा होता है।💐💐 हम तो ईद हो या दीवाली सबमें प्रफुल्लित होते हैं । 💐👍मुबारक ए ईद💐पर भी इबादत अमन चैन की      दुआ संग हर्षोल्लास से खुशियां बाँटी जाती है    और जी जाती है।  *दीपावली पर भी प्रभु प्रार्थना संग   खुशियाँ बांटी जाती हैं ,और ज्ञान के   प्रकाश का उजाला किया जाता है ।   तातपर्य सभी का एक है ,अमन-प्रेम सुख -शांति का संदेश । 💐💐रामायण, हो या कुरान सभी तो प्रेम संग  भाईचारे का संदेश देते है । हमने तो बचपन से खुशियों को बाँटने की  परम्परा निभायी है । ईद हो दीवाली हमारे चेहरों पर हर पल खुशी आयी है हमने तो हर त्यौहार पर भाईचारे की रीत निभायी है ।

नकारत्मकता से सकारात्मकता की और***

**नकारत्मकता से सकारात्मकता की और***
                ****************************💐💐

**करने को तो मैं कुछ अच्छा चला था जमाने में,
 एक रोग मुझे लग गया ।
 दूसरों की बुराइयाँ ,और कमियाँ निकालने में मैं व्यस्त हो    गया ।😢

☺व्यस्त इतना हुआ कि ?

करने को तो मैं कुछ अच्छा चला था जमाने में
मुझे ही रोग लग गया ,बुराइयाँ देखते-देखते
मैं ही अब बुरा हो गया ।😢

अचानक मेरी दृष्टि बदली,मेरी आत्मा से आवाज आयी
वो मुझे धिक्कारने लगी......
शर्म से मेरी आँख झुक गयी
अश्रुओं ने मेरी की धुलाई😢😢

मेरी आत्मा ने ,परमात्मा के आगे
शीश झुका के क़सम अब खायी
नहीं देखूँगा ,में किसी की बुराई।☺

बुराई को अच्छाई में बदलने की मेरी सोच बन आयी
नकारात्मक से सकारात्मक दृष्टि मैंने पायी
नकरात्मक सोच से करके विदाई
अब सकारत्मकता के बीज मैं बोता हूँ 💐

बुराईयों की झाड़ काट-काट कर
अब अच्छाइयों के बीज बोता रहता हूँ💐💐
भले ही कुछ वक्त लगे ,पर एक दिन तो
बुराइयाँ खत्म हो जायेंगी ,अच्छाइयों
की फ़सल लहलहायेगी ।💐💐💐💐💐
बहाने बाजी से बचिये *
**********************
सामने पहाड़ है , या गहरी खायी है,पहाड़ को हम
हटा नहीं सकते ,खायी में हम कूद नहीं सकते ।

रास्ते हमे बनाने हमें किस तरह बनाने है
ये हमारी सोच, और मेहनत है।

**जब हम रास्ते पर चलते हैं ।
तो टेढ़े-मेढे ,ऊँचे-नीचे सीधे सपाट
हर तरह के मोड़ आते हैं ,जिन्दगी में
परन्तु हमें उनपर चलना पड़ता है ।

रास्तों के बहाना बनाकर रुकना यानि
हम मानसिक रूप से कमजोर हैं ,बहाने बाजी
का बहाना बना रहे हैं।
मेहनत हम स्वयं नही करते और दोषारोपण
दूसरों पर करते हैं ।
इसलिये उठिये बहानेबाजी छोड़िये
अपनी असफलता का दोषारोपण किसी
किसी दूसरे पर करने से बचें ।।
ढूंढिये कमी कहाँ है ।
और उस कमी को दूर करके अपनी किस्मत
के केनवास में रंग खुद भरिये ।**

**मोबाइल और इनटर नेट **

***माना की मोबाइल आधुनिक जीवन की बहुत बड़ी आव्यशकता और उपयोगी भी है। परन्तु इसका दिन-रात आव्यशकता से अधिक उपयोग मानव को एक लत के रूप में लग रहा है।

माना कि इनटरनेट से सब जानकारी मिलती है ,पर जब से इंटरनेट का उपयोग अधिक बढ़ गया है ,तब से मनुष्य ने अपने दिमाग़ का उपयोग करना कम कर दिया है ,जो मनुष्य की सृजनात्मक शक्ति को श्रीण कर रहा है ।

*समय रहते इस मोबाइल नाम की लत से छुटकारा नहीं मिला तो एक दिन मनुष्य
मानसिक तौर पर अकेला और अपंग हो जायेगा ।*

*आतंकवाद की जड़ों को उखाड़ फैंको*

*आखिर कब तक कितनी माताएं ,कितने लाल जन्मती    रहेंगी ,और देश को समर्पित करती रहेंगी ।

 वाह!  कितनी महान हैं ये माताएं ,पूजनीय हैं ,वंदनीय है ।*
 "आखिर कब तक कितनी माताओं के लाल शहीद होते रहेंगें।
 सरहद पर तैनात सैनिक ,हम सब की रक्षा की खातिर
 क्या बस शहीद होने के लिये हैं , माना कि ये उनका कर्म है
  धर्म है । *

  *हाय! बड़ा दर्दनीय है ये ,निन्दनीय है ये
  वो भी किसी माँ के लाडले हैं, किसी के भाई ,
  मित्र, और पति ,क्या उनकी जान की कीमत बस
  शहीद होना ही है ।*

 "बस करो आतंकवाद के आगे यूँ हर पल मरना
 वो चार मारे हमारे सैनिक उस पर फिर चार मारे छः मारे ।
 इस तरह आतंकवाद खत्म होने वाला नहीं
 आंतकवादी को जड़ से उखाड़ फैंकना है।

 ढूँढ़ो आँतकवाद की बुनियाद को ,यूँ पल-पल मरने से
 बेहतर है ,उखाड़ फैंको उनकी जड़ों को ,हिला दो आतंकवादियों की बुनियादों को ।

वो हमें डरा -डरा के हमारी जड़ें हिला रहें हैं
अब वक्त आ गया है बहुत हो गया ।
उखाड़ फैंको आतंकवाद को चाहे जो भी हो
आँकवादी अपनी आने वाली नस्लें भी खराब कर रहें है
जहरीले विचारों का जहर आगे अपने ही कुटुम्ब को भी परोस रहे है ।

जिस तरह" श्…

💐💐**संघर्ष -यानि संग-हर्ष जियो **💐

*जीवन है तो संघर्ष है *
यूं तो प्रकृति प्रदत्त सब और सम्पदा है 💐
जीवन को तो जीना है ,क्यों ना फिर
संग-हर्ष जियो ।💐
 समय का पहिया घूम रहा है
  युग परिवर्तन हो रहा है ।
  परिवर्तन प्रकृति का नियम है ।
  अविष्कार भी आवश्यकता का कारण है
  मानव बुद्धि में उपजे अणुओं ,
  मानव की दिव्य आलौकिक बुद्धि
  ने दुनियाँ को नये-नये आयाम दिये हैं
 आकाश क्या अन्तरिक्ष  में भी मानव के
 कदम पढ़े है ।
 वो चाँद जिसकी खूबसूरती को मनुष्य निहारता है
गजलें और नग़मे बनाता है ,जिस चाँद को देख महिलाएं
व्रत उपवास पूर्ण करती हैं ,उस चाँद पर जाकर वैज्ञानिक
सत्य परख आया है ।💐
मनुष्य का जीवन प्रग्रति यानि आगे बढ़ते रहने का नाम है
रुक गया तो थम गया
जीवन का अन्त हो गया ,संघर्ष जीवन का मंत्र है ।
खुशहाल जीवन का यंत्र है ।💐💐💐💐

*मेरे ख्वाब*

**जाने किसकी दुआ रंग ला रही है ,
 ख्वाबों के गुलिस्तान की क्यारियों से
 भीनी सी ,और मीठी सी सुगन्ध आ रही है *।

 " मैंने ख्वाबों में जो सपने बुने थे
  उन सपनों में मेरी वफ़ा शायद रंग
  ला रही है "।
  *ख्वाबों के सच होने का ना मुझको
  यकीन था ,ख्वाबों को देखना ,निंद्रा
  में आना ,फिर टूट जाने पर यकीन था* ।

  *मेरे ख्वाबों में निष्फल कर्म का अर्श था।
  आत्मा की आवाज़ को परमात्मा का संदेश
   जान बस कर्म करते रहने का जज़्बा था।
   शायद वही जस्बा ए कर्म ,मुझे रास आ गया
    दरिया की तरह में भी बहता रहा ।*

    *आत्मा का परमात्मा से सम्बंध हो गया
      जो उसका था सब मेरा हो गया ।
       मेरा जीवन सफ़ल हो गया ।
            सफ़ल हो गया* ।।
***लोहा** ******
*आज मैं अपने मित्र से मिलने अस्पताल गया ,बहुत ही कमजोर हो गया था मेरा मित्र ,डॉक्टरों से पूछने पर पता चला उसका ब्लड प्रेशर बहुत बढ़ गया था ,शायद उनको चिन्ता है ।जो इन्हें अन्दर ही अन्दर खाये जा रही है ।
मैं अपने मित्र के कमरे में उससे मिलने गया वह अभी सो रहा था ,शायद डॉक्टर ने दवा दी थी उससे नींद आ गयी थी ।
मैं अपने मित्र के लिये फूलों का गुलदस्ता ,थोड़े फल और जूस ले गया था । मैं खाली बैठा-बैठा सामने पड़ी मैगज़ीन उठा कर पढ़ने लगा ।
थोड़ी देर में मेरे मित्र की आँख खुली ,मैं तो एक लेख पढने मैं व्यस्त था । मेरा मित्र सामने पड़े फूलों को देखकर फूलों की तरह मुस्करा रहा था ,एकाएक मेरी नज़र मेरे मित्र पर पड़ी ,मैं बोला क्या भाई हमेशा ऐसे ही नही मुस्करा सकते मित्र बोला तुम अगर रोज यूं ही मुझसे मिलने और ये खिले फूल मेरे लिये लाते रहो तो मेरे को कोई गम नहीं ।
इतने में नर्स आ गयी दवा का समय हो गया था ।
नर्स के जाने के बाद मित्र बोला यार कुछ मीठा खिला दो ये कड़वी दवाओं से मुँह कड़वा हो गया है ,मैंने उसे सेब काट कर खिलाया ,
मैंने अपने मित्र से पूछा यार तुम्हें किस बात की चिंता है ये जो चिन्ता है ना,…

****कामयाबी**

💐💐💐*क़ामयाबी*💐💐💐💐

*कामयाबी * अपने-अपने जीवन में हर कोई सफ़ल होना चाहता है । और हर किसी के लिए कामयाबी के मायने अलग-अलग हैं। आज के आधुनिक समाज में कामयाबी के मायने सिर्फ ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना रह गया है ,वैसे देखा जाये तो ठीक भी है जिसके पास जितना अधिक धन दौलत होगी वो बेशर्ते कामयाब है ,क्योंकि वो अपने पैसे के बल पर दुनिया के सारे सुख हासिल कर सकता है ।
पर हाँ एक चीज जो बहुत अनमोल है और जिससे वास्तव में सुख मिलता है वो है मन की शांति जो धन से नहीं मिलती ,हाँ कुछ समय के लिए आपका मन बहला सकती है ,और फिर वही अशान्ति।
वास्तविक शांति मिलती है जो आपका दिल कहे वो करो जिससे किसी का बुरा न हो धन कमाइये पर अपनी खुशियों को दांव पर रख कर नहीं कहीं कल ऐसा ना हो जिन खुशियो के लिए आपने आज अपनी खुशियाँ दाव पर लगायी ,वो खुशियाँ जीने का जब समय आये तब आपके पास सम ना बचे ।

मेरे लिए तो कामयाबी वो है जहां काम करने में मुझे और मेरी आत्मा को सुकून मिल, मेरे और मेरे समाज के हित मे हो।

मेरा जीवन सफल है ,अग़र मैं जो भी लिखूँ वो कहीँ किसी एक का भी मार्गदर्शन करता हो ,वही मेरे लिए मेरी सच्ची कामयाबी…

*एहसास *

😊* बात हुयी जब एहसास की     एहसास की रूह से    एक और एहसास निकला
☺खुशियों वाले दिन और रात का।

एहसास वो एहसास है,जिसमें
जिन्दगी का हर लम्हा व्याप्त है।💐

💐खुशी हो या गम हो एहसास तो होता ही है।

💐खुशी का एहसास एक नशा है ,जिसे पाकर
इंसान सब भूल जाता है।
पर दर्दे एहसास जिसमे रूह पाक हो
उस दर्दे एहसास की बात बहुत खास है
वह एहसास खुद से मिलाने का बेहतरीन
            एहसास है ।

एहसास की रूह से आह निकली बस करो एहसासों से खेलने का      शौंक ना पालों ।

ये दर्दे एहसास है ,जख्म गहरे दे जाता है  नासूर बनकर जीवन भर चुभन देते रहते हैं।

महफ़िल में मुस्कराते चेहरे पर एक मोती आकर  गिरता है । वह मोती एहसास का दिलों में छुपे         एहसास का ।
जीवन की खुशबू एहसास          जीवन ही एक एहसास
कभी सुख ,कभी दुख,कभी रोशन करने को जग का एहसास।
बहुत खूबसूरत होता है परस्पर प्रेम का एहसास।**😢💐

**निशब्द**

निशब्द

एक व्यापारी था ,जिसका बेटा M.B.A करके आया था । पिता का व्यापार था ,पिता की इच्छा पहले से ही थी कि मेरा बेटा मेरा व्यापार संभाले ।
बेटे ने भी पिता की इच्छा के अनुरूप व्यपार में अपना योगदान दिया नयी तकनीक नये आयाम पिता जी थोड़े नाराज़ थे कि इतने पुराने तौर -तरीकों को मेरा बेटा बदल रहा है, कहते रहे अभी तक हम भी तो कम ही रहे थे और अच्छा ही कम रहे थे ।

लेकिन पिताजी जानते थे कि उनका बेटा बाहर से पढ़कर आया है कुछ तो बदलाव करेगा ही ,बस मन ही मन भगवान से प्रार्थना करते थे कि मेरा बेटा कामयाब हो ।

आखिर बदलाव के साथ बेटे ने पिताजी की गद्दी सम्भाली पिताजी की दुआओं और बेटे की कड़ी मेहनत से एक साल में अच्छा मुनाफा हुआ । बेटे ने पिताजी के चरण स्पर्श करते हुए कहा पिताजी मुझे एक पार्टी करनी है ,एक साल में व्यापार में अच्छा मुनाफा हुआ है ,पिताजी बोले जरूर बेटा पर पार्टी करके अपनी मेहनत का पैसा अपने यार दोस्तों में यूँ ही उड़ा दोगे ,अरे बुला लो अपने खास मित्रों को घर पर अच्छे से पार्टी कर लेंगे ,पर बेटा अगर तुम्हें खुशी ही मनानी है ,तो,किसी अनाथ आश्रम चल कर या वृद्धाश्रम जाकर गरीब जरूरतमंदों पर अपना पै…

💐💐*कृषकों को नमन*💐💐

💐 **कृषकों को नमन**💐

💐💐सर्वप्रथम जीने के लिये *अन्न है आवयशक ।
* मैं कृषक मैं खेत जोतता हूँ उसमें बीज डालता हूँ
मेरी मेहनत रंग लाती है जब खेतों में फ़सल लहलहाती है
मेरे द्वारा उगाया गया अन्न सिर्फ मैं ही नहीं खाता हूँ
ना ही अन्न को गोदामों में भरता हूँ ,की कल मैं उसे ऊँची कीमत
पर बेच पाऊँ।💐

बस मेरी आवयशक आवयशकताएँ पूरी हो जाएं
मैं बस यही चाहता हूँ , पर कभी -कभी तो मैं साहूकार के
लोभ के कारण कर्ज में डूब जाता हूँ ।

मेरे परिवार की कई पीढ़ियों का जीवन कर्ज उतारते बीत
जाता है ,फिर भी वह कर्ज खत्म नही होता ।

*मैं किसान *अगर *अन्न नही उगाऊंगा तो सब भूखे मर
जाओगे ।
दो वक्त की रोटी के लिये ही मानव करता है
दुनियाँ भर के झंझट ।

अंत में पेट की क्षुधा मिटा कर ही पाता है चैन

*दस्तान ऐ जिंदगी*

💐💐खोजते रहे जिन्दगी भर ,मोहब्बतों के ठिकानों को ,
  ना ठिकाना मिला ना मोहब्बत मिली
   मिली तो बस तड़पते दिल की बेकरारी मिली
   मोहब्बत की चाहत तो मृगतृष्णा हुई ।
    फिर क्या था हमने स्वयं को ही मोहब्बत का
    फ़रिश्ता बना लिया ,मोहब्बत की अखण्ड जोत
    जला डाली ,अब मोहब्बते चिराग है जिससे रोशन
    हमारे जीवन का आफ़ताब है ।*💐💐

*💐सफ़र की शुरआत ही ,बड़ी हसीन थी  फूलों के आशियाने में ,शूलों की भरमार थी । कहने को हम फूलों के संग थे ,पर हमारी  मुलाकात तो हमेशा शूलों के संग हुयी । काँच की दीवारें थी, सच छुपाना मुश्किल था  पर ना जाने कहाँ से हम में ये हुनर आ गया  हमें दर्द छुपाकर मुस्कराना आ गया । जिन्दगी ने हमारे बहुत इनतिहान लिये  हमें चलना भी नहीं आता था ,और हमें पथरीली  राहों पर छोड़ दिया गया चलने के लिये,  बस यूं ही गिरते सम्भलते हम चलना सीख गये  जिन्दगी के सफ़र की शुरुआत इतनी आसान होती  तो हम इस तरह दर्द लिये सरेआम ना होते।
जिस तरह सोना तप कर कुंदन बनता है ।
हम बिखर -बिखर कर निखर गये ।

*****उम्मीद की किरण*****

****उम्मीद ,👍ही तो है, जो मैदान छोड़कर जाते हुए को कहती है
चल एक कोशिश👍 ओर करके देखते हैं,
क्या पता? इस उम्मीद
के साथ शायद☺ इस बार हम जीत जायें ,और वही उम्मीद
हमारी कोशिश की चाबी होती है । जो हमारी किस्मत का
ताला खोलने वाली आखिरी चाबी होती है ।

*****उम्मीदें जिन्दगी की भी खास बात होती है।
हारने वाले के हमेशा साथ होती है ।

जीत की उम्मीद देकर हारते हुए को जीता देती है ,
डूबने वाले को तैरना सिखा देती है
आशा की किरण बनकर संघर्ष करना सिखा देती है ****


*💐💐अंतराल के बाद 💐💐*

💐💐

**** जहाँ दादी और पौतों में प्यार की बात है ,यहाँ यही बात सच है कि,असल से सूद अधिक प्यारा होता है ।
परन्तु इतने सालों का फांसला हो तो......सोच का परिवर्तन आवश्य होता है । यूँ तो दादी अपने पौते से बहुत प्यार करती थी ,परन्तु अपने पौते के मनमौजी स्वभाव से अक्सर नाराज़ रहती थी ।☺
💐क्योंकि दादी चाहती थी ,की जैसा मैं कहती हूँ , मेरा पौता वैसा ही करे ,वो अपने ढंग से अपने पौते को चलाना चाहती थी ।
*परन्तु परिवर्तन प्रकृति का नियम है *
दादी ने घर पर ग्रह शान्ति के लिये पूजा रखवाई थी  ,उनके पौते ने पूजा की सारी तैयारी करके दी ,पर दादी की इच्छा थी कि,उनका पौता पूजा की शुरुआत से लेकर पूजा खत्म होने तक पूजा में ही  बैठे ,  और धोती कुर्ता भी पहने । ....पर दादी भी थोड़ी ज्यादा ही जी जिद्द कर रही थी ,उनके पौते ने कभी धोती नही पहनी थी और न ही वो पहनना चाहता था । उसकी और दादी की ऐसी छोटी -मोटी बहस होती रहती थी  ।
पौता अपनी दादी से कह रहा था दादी कपडों से क्या होता है ,और पूजा -पाठ मन की सुन्दर अवस्था है ,क्या फर्क पड़ता है,भगवान हमारे कपड़ों को थोड़े देख रहा है । हम भगवान को कभी भी किसी भी समय कैसे भी…

💐💐जमाना ख़राब है 💐💐

💐💐कुछ लोग आँखों में पर्दे डाल लेते है ,
और कहते हैं कि ज़माना बड़ा खराब है

💐जमाना तो जैसा था ,और जैसा है वैसा ही रहेगा
...क्या पता ये आपके सोचने का .....
   नजरअंदाज करने का अंदाज हो
    बहाने बाजी की बात हो।👍

   क्योंकि जब पत्थर को तराश कर भी
    भागवान की मूर्ति बना पूजी जा सकती है तो
     तो क्या आप ही जैसे किसी इंसान की
      कमियाँ दूर नहीं की जा सकती ।💐

      खाक कहतो हो जमाना खराब है
       अजी ये तो आपके ही देखने का अंदाज है
        पर्दे के पीछे क्या है ,जमाने को भी
         आभास है ।।💐💐💐💐💐

💐💐 ** माँ एक वटवृक्ष**💐💐

***** माँ* वो वटवृक्ष है, जिसकी ठंडी छाँव में हर
           कोई सुकून पाता है ।
           माँ की ममता सरिता की भाँति , जीवन को पवित्रता,
           शीतलता, और निर्मलता देकर निरन्तर आगे बढ़ते
           रहने की प्रेरणा देती रहती है ।

            मेरा तो मानना है,माँ एक कल्प वृक्ष है ,जहाँ उसके
            बच्चों को सबकुछ मिलता है ,सब इच्छाएं पूरी होती
            हैं ।
           * कभी-कभी माँ कड़वी नीम भी बन जाती है ,
             और रोगों से बचाती है *
           * माँ *दया का सागर ,*अमृत कलश है*
        **दुनियाँ की भीड़ में ,प्रतिस्पर्धा की दौड़ में
           जब स्वयं को आगे पाता हूँ ।
          ये माँ की ही दुआओं का असर है
          जान जाता हूँ ,मैं।*
          वास्तव में माँ एक विशाल वृक्ष ही तो है ,
          जिस तरह *वृक्ष *मौसम की हर मार को सह कर
          स्वयं -हरा भरा रहता है ,और *मीठे पौष्टिक फल* ही
          देता है, ठीक उसी तरह एक *माँ *भी बहुत कुछ
           सहन करके एक सुसंस्कृत,सभ्य ,समाज की स्थापना               को अपनी *संताने* देती है******
           💐💐💐💐💐💐?…

**माँ मैं हूँ ना***

**माँ मैं हूँ ना***
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"मेरे हाथ पर गरम-गरम चाय गिर गयी थी , जिसकी वज़ह से काफ़ी तकलीफ़ थी ,डॉक्टर को दिखा के दवा भी ले ली थी ।

परन्तु एक बात की चिन्ता थी अगले ही दिन हमारे घर पर गुरु जी आने वाले थे , वो अहमदाबाद से आ रहे थे ,मेर हाथ तो जल हुआ था ,हाथ मे छाले थे ,डॉक्टर ने पानी मे डालने से मना किया था और हाथ मे जख्म भी बहुत था , और हमारी कामवाली भी एक हफ्ते छुट्टी पर थी गाँव गयी हुयी थी ,और कोई भी थोड़े दिन के लिए हमारे घर काम करने को तैयार नहीं थी सब बहुत व्यस्त थी ।

मैं यूँ ही चुपचाप अपने कमरे मे बैठी थी चिता थी कल का काम कैसे होगा ।
इतने में मेरा पन्द्रह साल का बेटा आया और बोला माँ क्या हुआ क्या हाथ में बहुत दर्द है ,मैंने सिर हिलाते हुए कहा नहीं बेटा मैंने दवा ले ली है । बेटा बोला तो फिर आराम कर लो , मैने कहा आराम कैसे करूँ बेटा ,कल अहमदाबाद से गुरु जी और उनके चार शिष्य आ रहें हैं ।,उन्हें भोजन करना होगा ,और मेरे हाथ से कुछ होने वाला नहीं है ,बहुत चिन्ता हो रही है बेटा, ।

थोड़ी देर रुक कर मेरा बेटा बोला चिन्ता मत करो ,माँ मैं हूँ ना
माँ बोली तुम क्या कर लोगे बेटा तुम थोड़ी रसोई क…

**मेरा मसीहा ***

*****  मैं जो भी करता हूँ, मेरे फ़रिश्ते के कहे ,अनुसार करता हूँ  क्या लाभ होगा, मैं नहीं सोचता "मैं" वो करता हूँ ,
 जो सबके हित में होता है ।,

 आसमान से कोई फ़रिश्ता आता है,
 जब में गहरी निंद्रा में होता हूँ ,मेरे सिर
 पर प्यार भरा हाथ रखता है ,मेरा माथा
 चूम कर मुझे दुआओं से भर जाता है ।

 जब मैं नींद से जागता हूँ ,तो अपने
 आस-पास किसी को भी नही पाता हूँ।

 पर उस फ़रिश्ते की महक ,
मेरा घर आँगन महका जाती है
मेंरे चेहरे पर बिन बात के मुस्कराहट
आ जाती है ।

मैं चल रहा होता हूँ अकेला ,परन्तु
कोई मेरे साथ चल रहा होता है ।
मैंने उसे देखा तो नहीं पर वो मेरा
मार्गदर्शन कर रहा होता है ,
मुझे अच्छे से अच्छा कार्य करने को
प्रेरित कर रहा होता है ।

मैं भी उसकी ही बात मानता हूँ
कोशिश करता हूँ जो भी करूँ ,
दूसरों की भलाई के लिऐ करूँ
कोई ऐसा काम ना करूँ जिससे दूसरों
को कष्ट पहुँचे ,वो फ़रिश्ता ,मेरा मसीहा ,
मेरी आत्मा में बैठा परमात्मा है ।
जो हर-पल मेरा मार्गदर्शन करता है ।।*****

**कविता**

--------------क्या आप मेरी बात से सहमत है ?
** * * एक अनपढ़ भी कविता रच सकता है
क्योंकि कविता आत्मा की आवाज है **

** कविता आत्मा की आवाज है
समाजिक समावेश के सुन्दर भाव हैं ।
कविता विचारों की सुमधुर झंकार है
कविता मात्र शब्द नही ,कोई छन्द नही।

कविता कभी समाजिक कुरीतियों के
प्रति उठने वाली आवाज है ,तो कभी
वीर,हास्य,श्रृंगार रस में बंधे शब्दों का सार है ।

कविता अन्तर्मन में उठने वाले द्वन्दों की पुकार है
कविता किसी भी भावपूर्ण मन मे उठने वाले
भावों का सार है । कविता तारीफों की मोहताज नही
कविता स्वयं ही तारीफे अन्दाज है **