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*परियां और उनकी रहस्यमयी दुनियां *

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अरे वाह!
    इतना सुन्दर क्या है यह किसी रथ सा प्रतीत होता है ,चार श्वेत मखमली अश्व जो रथ के आगे खड़े थे ,अरे वाह श्वेत मखमली हंस,कोई चमत्कारी रथ लगता है यह.....

   इतने में हवा के संग मीठी सुंगध की लहर सारे वातावरण को महका गई ,सब कुछ रहस्यमयी सा प्रतीत हो रहा था ,तभी मीठी आवाज में हंसने ,खिखिलाने की गूंज से वातावरण और भी मीठा हो गया ,उत्सुकतावश मैंने उस हंसने की आवाज का पीछा किया ...कुछ दूर चलने के बाद मैंने पेड़ों की ओट से देखा श्वेत मखमली वस्त्रों में जिनके कोमल-कोमल से श्वेत पंख भी हैं ,विहार कर रही हैं कुछ झरने के निर्मल जल में स्नान कर रही हैं कुछ पुष्पों को क्यारियों में तितलियों को भांति उड़ रही हैं ,बहुत ही सुंदर दृश्य था , मैं स्वप्न लोक की परियों को साक्षात देख पा रही थी , एक बार को सोचा जाकर उनसे मिली कुछ बातें करूं .... फिर लगा कहीं यह मेरी आहट सुनकर लुप्त ना हो जाए , अब तो मुझे
मुझे यकीन हो गया था यह परियां उसी रथ में बैठकर  आयी हैं । मैं रथ की समीप जाकर छुप गई और परियों के आने का इंतजार करने लगी , आसमान की तरफ देखा तो आसमान में तारे  टिमटिमा रहे थे ,चन्द्रमा भी सोलह कल…

*सवाल *

सवाल क्या है
सवाल होना भी इक सवाल है
सवाल कुछ भी नहीं
और सवालों के सिवाय
जिन्दगी भी कुछ नहीं
सवालों से जन्मा हर
 एक नया सवाल है
हर एक नए सवाल 
का उत्तर ही सवाल का
जवाब है ।

** चिंगारी **

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*** जब लौ बनकर दीपक
में जली सभी दिशाओं
 को  प्रकाशित किया  मैं तेज़ का पुंज, प्रकाश की किरण  चिंगारी थी ,सिमट गई तो  सार्थक हुई,  बिखरी तो तितर -बितर हुई स्वयं भी स्वाहा हुई जहां गिरी वहां  सब राख किया
मेरी चमक में कई बहके -भटके
कईयों ने तो अपने घर भी जलाए
उपयोग की उपयोगिता को तब
सही राह मिली, जब मेरा संयोजन हुआ मैं चिंगारी ,मेरा अस्तित्व प्रकाश
मेरी उपयोगिता तब सार्थक हुई
जब भटकते हुओं को सही राह मिली.....




*सोच *

*ये सोचना की
मृत्यु के बाद शांति मिलेगी मृगतृष्णा सा है
मृत्यु के बाद की किसने जानी
जीवन एहसासों और भावनाओं का बड़ा समुंदर है ,सुख-दुख शांति -अशांति सब मनुष्य मन के भीतर     ही है  *

**खुद को बदलो **

* खुद को बदलो
दूसरों को बदलने की
कोशिश में अपना वक़्त जाया ना करें
स्वयं को बदल कर तो
देखो ,क्या पता आप में सकारात्मक
 बदलाव देखकर जमाना स्वयं में
 बदलाव शुरू कर दे**

*श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव*

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यशोदा के लला
गपियों के गोपाल
मुरलीधर , छलिया
भक्तों के केशव,मनमोहन
श्यामसुंदर ,माधव जिसने
जिस -जिस नाम से पुकारा
कृष्ण दामोदर हो गए उसके प्यारे
अनन्त,अद्वितीय
अलौकिक,निरांकर
मुझमें ही समस्त
सृष्टि का सार
सुव्यवस्थित करने को
सृष्टि पर आचरण और व्यवहार
मुझ अद्वितीय शक्ति को
पड़ता है ,धरती पर अवतार
श्री राम -सीता ,राधे-कृष्ण
नामों का आधार धरती पर
सकारात्मक ऊर्जा का संचार
भादों की कृष्ण जन्माष्टमी पर
पर श्रद्धा ,विश्वास ,और प्रेम से
मनाया जाता है , का हो उद्धार
भाद्र पद की कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है  कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार  मुबारक हो सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार........



*****श्री कृष्ण जन्मोत्सव की शुभकामनाएं

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श्री कृष्ण जन्मोत्सव का पर्व ......
मंदिरों में जगह -जगह श्री कृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी जोरों पर थीं।
बाल गोपाल श्री कृष्ण जन्म के पर्व के लिए बाजारों में सुन्दर -सुन्दर लड्डू गोपाल उनके झूलने के लिए सुन्दर झूले, आकर्षक वस्त्र ,बांसुरीयां मोर पंख आदि सज -सज्जा के सामान सजे हुए थे ,मन तो करता था सब ले लो ,परंतु हमने अपनी आव्यशकता अनुसार सुन्दर-सुन्दर सामान ले लिया था ।
  इसी दौरान हमारा हमारे घर के समीप वाले श्री कृष्ण भगवान के मंदिर जाना हुआ... मंदिरों में भी श्री कृष्ण जी के जन्म उत्सव की खूब तैयारियां चल रही थी कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर चर्चा चल रही थी ,हम भी थोड़ी देर के लिए उस चर्चा को सुनने लगे ।
 तभी एक महिला अपना दुखड़ा रोने लगी ,कहने लगी पंडित जी मैं बहुत परेशान हूं ,मेरी सास को मेरा कोई काम पसंद नहीं आता बस टोकती रहती है ,मेरा पति भी बहुत गुस्से वाले स्वभाव के हैं ।
पंडित जी कुछ उपाय बताईए जिससे मेरी परेशानी दूर हो।
 पंडित जी मुस्कराए और बोले ,बेटी तुम क्या दुःखी होगी तुमसे ज्यादा दुखी और लोग भी  है इस दुनियां में ...
हमेशा दुख का रोना रोने से दुख कम नहीं होता ,त…

**फकीरी बनाम अमीरी**

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दुनियां का सबसे मालामाल बंदा
होता है एक फ़कीर
जो मज़ा नहीं अमीरी में
वो मज़ा है फकीरी में
अमीरी चिंता में डालती है
फकीरी चिंताओं से मुक्त करती है
   नहीं चाहिए दुनियां
की शान- ओ- शौकत ए मेरे मालिक
तेरी बंदगी तेरा गुणगान
करूं वही काम जिससे बड़े तेरा मान
 बस ऐसा हुनर देना मेरे मालिक हम
जिएं तो शान से और मरे तो शान से
दुनियां वाले जब भी हमें याद करें
तो कहें शान से हम भी उनके ख़ास थे
शान से .......


**वक़्त किसी के लिए नहीं रुकता**

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वक़्त की क़दर करना सीखो
 माना कि वक़्त बहुत कुछ दोहराता है
  परंतु लौटता नहीं ,जिन्दगी की सांसों की
गिनती भी वक़्त के साथ कम होती जाती है
 इसलिए वक़्त जाया ना करें .... ये बीता वक़्त है साहब  लौट कर नहीं आता है.....

 **जन्म उत्सव
धरती पर मनुष्य जीवन के
 सफ़र का प्रारम्भ
सफ़र को यादगार बनाईए
जन्म है,सफ़र है,तो लौटना भी होगा ***

**वक़्त रहते जो कर लिया जाए
अच्छा होता है , क्योंकि
कभी -कभी वक़्त ऐसा आता है कि
वक़्त नहीं होता ,और वक़्त आने पर
वक़्त साथ नहीं देता ***

*अक़्स*

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एक तस्वीर खींचनी है मुझे  जो समाज का आईना हो जो कोई भी उस तस्वीर को देखे उसे अपना अक्स नज़र आए हर कोई आईने में देख अक्स अपना स्वयं को सुधारना चाहे निखारना चाहे
**विचारों की सम्पदा **
 **नैन से नैन कुछ इस तरह मिले
दिल के सारे हाल बयां हो गए
ना उनके लब हिले ना मेरे लब हिले
फिर भी नैनों ने दिल के सारे
 राज खोल दिए
 उनके नैनों में कुछ ऐसा जादू था
की हम उनके नैनों के समुंदर में
तैरते रह गए ,नैनों के समुंदर में
जस्बातों का सैलाब था
 दिल का हाल सब नैनों में छिपा था
बिन बोले ही नैनों ने बयां कर दिया**

*उम्मीद की पगडंडी
यूं तो इस पगडंडी ने मेरा बहुत
साथ निभाया ,आखिर थी तो कच्ची पगडंडी ही ना, पगडंडी टूट गई साथ छूट गया
वो कब से मुझे इशारों से समझता था
मैं ही नासमझ था समझ नहीं पाता था
कहता था अपनी अंतरात्मा की आवाज सुन
उम्मीद करनी है तो अपने आप से कर....
मैं तेरे साथ में हूं मगर, मुझ पर विश्वास तो कर**


****तस्वीर***

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चेहरे की तस्वीरें तो बहुत देखीं काश कोई मन के भीतर  क्या चल रहा है ,तस्वीर खींच कर लाताऔर तस्वीर का असली रूप नज़र आता
     **तस्वीर**  ****  तस्वीर के भी दो पहलू होते हैं तस्वीर के दो पहलू होते हैं  जो प्रत्यक्ष है वो सत्य है
किन्तु जो अप्रत्यक्ष है
वो शाश्वत है निसंदेह सत्य है
जैसे की दुग्ध में मक्खन का होना
तस्वीर के वाह्य स्वरूप के
भीतर का सत्य जान पाना ही
तस्वीर के असली स्वरूप को जान पाना है
कहते हैं की तस्वीर किसी भी
मनुष्य के व्यक्तित्व का
आईना होती  है
व्यक्तित्व की ,
परछाई होती है
मनुष्य की पहचान
होती है ,कहते हैं
लोग तस्वीर देखकर
किसी के रूप गुण और स्वभाव
को समझ जाते हैं
और कुछ लोग आकर्षक
तस्वीर देखकर उस पर मोहित हो जाते हैं
क्या तस्वीर हमेशा सच बोलती है
अब तस्वीर निकालने से पहले लोग
वास्तविक परिचय पर लीपा-पोती करा लेते हैं
तस्वीर का असली चेहरा ही छिपा लेते हैं
संभवतः तस्वीर में प्रत्येक स्वयं को आकर्षक
दिखाना चाहता है अपनी एक अलग छवि बनना चाहता है ,काश की ऐसा हो
जैसा हम तस्वीर में दिखना चाहते हैं
वास्तविक जिन्दगी में भी वही गुण धारण कर ले
और जीवन की तस्वीर चेहरे से नहीं अपित…

*स्वतंत्रता दिवस की शुकामनाएं *

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आज"स्वतंत्रता दिवस" के
 शुभ अवसर पर फिजाओं
 में खुशियों की लहर है
वातावरण में मनमोहक सी महक है
अम्बर में आजाद परिंदों की चहक है
प्रतीत होता सब और सहज है
आज वादियों में केसर की महक है
प्रतीत होता सब और माहौल
सुन्दर ,सरस,सरल,और सुगम है
सकारात्मक सोच और निस्वार्थ मोहब्बत
से फिजाओं में चुहुं और सब शुभ मंगलकारी है
बगीचों में गुलमोहर से  खिला-खिला चमन है
आकाश की ऊंचाइयों में भारत माता की शान में  विजय पताका फहराता तिरंगा गर्व से गुन-गुना रहा
भारत मेरी माता मेरा देश मेरा अभिमान है ।


*देश के प्रति सम्मान*

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*सरहद पर तैनात वीर जांबाज
** सैनिकों को मेरा शत शत नमन *
यह मेरा मेरे देश के प्रति सम्मान है
मैं कोई बहुत बड़ी देश भक्त नहीं
फिर भी यह तो एक श्रद्धा है
एक भाव है ,देश के प्रति अपनत्व
की भावना है ,चन्द पंक्तियां
लिखकर स्वयं को देश भक्त
कहलाने का दावा कदापि
नहीं किया जा सकता किन्तु
कहीं ना कहीं ये आग सब में है
देश प्रेम की आग
माना कि हम सिर्फ
चन्द बातें कहकर
स्वयं में जागृत
देशभक्ति की भावना
की मशाल तो जलाए हुए हैं
स्वयं को देश भक्त समझ लेना का भ्रम ही सही
हमारी सोच सकारात्मक तो है
फिर भी एक आग तो है हममें भी
जो हमें अपने देश के बारे में सोचने
लिखने और कुछ कहने को विवश करती है  ।


*अस्तित्व मेरा समुंदर*

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**पूर्ण से शून्य की यात्रा
शून्य से फिर पूर्णता की
यात्रा ,शून्य का शून्य हो जाना ही
पूर्णता की यात्रा है...

कोयले की खान से
हीरे चुन कर लाने हैं
ये जिन्दगी बारूदी
सुरंग है, संभलकर चलना ज़रा ....

बहुत भटका बूंद बनकर
अस्तित्व मेरा समुंदर था
मैं अनभिज्ञ था समुंदर ही
मुझमें था ....

भटकता फिरता हूं दुनियां
 के मेले में,स्वयं की खोज में और
स्वयं का ही अस्तित्व मिटा बैठता हूं....

आया था दुनियां के
मेले में मौज -मस्ती करने को
मेले के आकर्षण में कुछ इस
कदर खोया की घर वापिसी
 का रास्ता ही भूल गया....



*हमारी प्यारी कश्मीरा*

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आज कई वर्षों बाद दो बहनें   बिना किसी आतंक के डर से एक दूजे के घर जाकर मिली। काल्पनिक नाम  एक का जमुना दूसरी का *कश्मीरा* यूं तो यह सिर्फ दो ही बहने नहीं और भी कई भाई बहन हैं भरा-पूरा कुटुम्ब है  ,परंतु आज कई वर्षों के बाद जमुना अपनी बहन कश्मीरा के लिए खुश थी । क्योंकि जमुना और कश्मीरा आस -पास ही रहती थीं ।  काफी समय बाद जमुना का कश्मीरा के घर जाना हुआ.....  कश्मीरा खुश थी कि आज उसे कोई बंदिश नहीं वो अपनी बहन जमुना का अच्छे से स्वागत करेगी ,उसकी आव भगत में कोई कमी नहीं छोड़ेगी।    जमुना:-  कश्मीरा मेरी बहन तू कैसी है कितनी सुन्दर कितनी प्यारी होती थी तुम किसी जमाने में,  क्या हालत हो गई है तुम्हारी ,मुरझा गई हो ,चलो कोई बात नहीं *देर आए दुरुस्त आए* आज तक मैं तेरे घर एक बहन होकर भी ढंग से नहीं आ पाती थी कश्मीरा आज मैं बहुत खुश हूं तेरे लिए कश्मीरा अब हम संग-संग रहेंगे एक दूसरे के दुख-सुख बांट लेंगे ,  कश्मीरा मैं जानती हूं तूने बहुत दुख सहे हैं ,ना कहीं आना ना जाना बंदिशें ही बंदिशें अब सब ठीक हो जाएगा जमुना ने कश्मीरा का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा...     कश्मीरा:-   हां बहन …

* शुभ दिन *

बहुत घायल हुआ कश्मीर अभी तक कश्मीर की सत्ता प्यादों के हाथों में थी  कश्मीर को दर्दनीय लहूलुहान स्थिति  से छुटकारा...   जम्मू कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा ....... आज कश्मीर राजनीति की बेड़ियों से आजाद हुआ .....
यूं तो भारत एक लोकतंत्र देश है ....और अभी तक जम्मू कश्मीर को लोकतंत्र के चुने नेता ही चला रहे थे ,जम्मू कश्मीर की अभी तक की स्थिति से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है .....
बहुत घायल हुआ अभी तक कश्मीर तकलीफों से बचाने के लिए असंख्य सैनिकों ने कुर्बानियां देते आ रहे हैं आखिर कब तक होता ये सब शुक्र है देश के राजनीतिज्ञों का.... जिन्होंने समस्या को तह से ख़तम करने  के लिए बेहतरीन कदम उठाया .....  अभी तक कश्मीर की सत्ता प्यादों के हाथों में थी लेकिन कश्मीर को  दर्द में करहाते देख .....प्रधानमंत्री ने बेहतरीन और कश्मीर के हित का फैसला लिया
😊आज हवाओं में इत्र             की खुशबू🌹 आ रही है            लगता है मेरे मित्रों की मंडली मुस्करा😄😃 रही है ,गुनगुना रही है अपने मित्रों की खुशियों की फरियाद कर रही है🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌸🌸🌸
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*तीज का त्यौहार लेकर आता खुशियों की सौगात*

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पक्षियों के चहकने की आवाज
  खनकती चूड़ियों का आगाज
  सुहागनों के हाथों में रचती पवित्र
   मेहंदी की सौगात आओ सखियों
    झूमे नाचें गाएं आया है हरियाली तीज का त्यौहार
     **सावन का मौसम आया
संग अपने सुख-समृद्धि लाया
वर्षा की फुहारों से धरती का
जल अभिषेक जब होता है
प्रकृति प्रफुल्लित
हरी-भरी हो जाती है
वृक्षों की डालियां अपनी
बाहें फैलाती हैं
झूला झूलन को
सखियों को बुलाएं
प्रकृति संग सखियां भी
सोलह श्रृंगार करती हैं
वृक्षों की ओट में बैठ कोयल भी
मीठा राग सुनाती है
समस्त वातावरण संगीतमय हो जाता है
चूड़ियों की खनक मन को लुभाती है
हरियाली तीज को देवी पार्वती ने भी
सोलह श्रृंगार और कठिन उपवास कर
शिव को प्रसन्न किया था
उस दिन से हरियाली तीज की शुभ बेला पर
सुहागनें उपवास नियम करती हैं
वृक्षों पर झूलों की पींगे जब चड़ती हैं
आसमान की ऊंचाइयों में सखियां
झूल-झूल कर हंसती है
धरती झूमती है
प्रकृति निखरती है
पक्षीयों की सुमधुर ध्वनियों से
सावन में प्रकृति समृद्ध और संगीतमय हो जाती है**