ऊँचाइयां शीर्ष कि

                                                            
                         विधियां जहाँ मिलती है निधियाँ

ऊँचाइयां  बाल कहानी संग्रह जिसमे सत्रह कहानियाँ हैं । प्रतेयक कहानी को इस तरह लिखा गया है की मनोरंजन के साथ -साथ पाठक का मार्गदर्शन हो और उससे  प्रेणना भी मिले ।

~  पहली कहानी  "मोबाइल टेलीविज़न कंप्यूटर"  में बताया गया है ,की" आधुनिक होना उचित है  परन्तु आधुनिकता की दोड़ में भले बुरे के विवेक के साथ अपनी संस्कृति व् उच्च संस्कारो की रक्षा भी होनी चाहिए ''

~दूसरी कहानी '' टिमटिम के सपने ''में मनोरंजन के साथ यह लिखा गया है की सपने देखने पर सबका अधिकार है अपने उज्जवल भविष्य के सपने देखने और उसे पूरा करने का हमारा दायित्व है। 

तीसरी कहानी '' पैगाम ''से यह पैगाम मिलता है की  उच्च संस्कृति एवं संस्कारो  वाले इस देश में धन के बल पर इंसानियत का अपमान होना अत्यंत शर्मनाक है। 

~  चौथी कहानी ''हमारा अधिकार ''

~  पाचवी कहानी " बेटियां '' कहानी दिल को छूने वाली है। उद्देश्य यह है की अंतर बेटे या बेटियों  में नहीं दोष मानवीय सोच का हैआव्य्शाकता  मानवीय सोच बदलने की है जननी का अपमान सवयं का अपमान है। 


 छठी कहानी '' बोझ''  

~  सातवी  कहानी '' सच्ची पूजा ''आव्य्शकता के समय सहायता कर देना ही सच्ची पूजा है। 

~  आठवी कहानी "जीवनदायनी विचारधारा "सवयं के जीने के लिए तो सभी जीते हैं। जीवन वह सफल है। जो सवयं के साथ दूसरों के जीने के लिए भी जिया जाए। 


~ नौवी कहानी  संगठन की शक्ति ;----जो कार्य एक ऊँगली नहीं कर सकती वही कार्य जब एक हाथ की पाँच ऊंगलियाँ मिलकर करती हैं तब वह आसानी से हो जाता है। 

~ दसवी कहानी हंसना संतुष्टता की निशानी है ;----------संतुष्टता-हँसना एक ओषधी है  की निशानी है। 

  
ग्यारवी कहानी माँ -----… धरती  पर सबसे बड़ा वरदान है।        

~    बारहवी कहानी  अनमोल वचन -स्वर्ग नरक -----मनुष्य अपने अच्छे कर्मो से इस धरती को चाहे तो स्वर्ग बना सकता है ,चाहे तो बुरे कर्मो से नरक बना सकता है।       


~ तेरहवी कहानी ------परिवार   ---------परिवार में रहकर जीवन जीने की कला सीखी जा सकती है।   
~ चौदहवीं  कहानी बचपन खट्टी -मीठी यादें ,--------
 बचपन से अच्छे कोई दिन नहीं बचपन की तुलना करना वर्य्थ है।  

  सोनम का क्या होगा ,  बादलों की सैर ,-----कसौटी दोस्ती की,----दोस्ती करना बच्चों का खेल नहीं जिम्मेदारी का रिश्ता है।

                         " सभी कहानियां  अपना महत्व लिए हुए है"
               " जीवन की ऊंचाइयों से परिचय  वास्तविक तात्पर्य है"

आओ अच्छा बस अच्छा सोचें

 आओ कुछ अच्छा सोचें अच्छा करें , अच्छा देखें अच्छा करने की चाह में इतने अच्छे हो जायें की की साकारात्मक सोच से नाकारात्मकता की सारी व्याधिया...