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"अरमानों का तेज़ाब"

डरता हूँ ,कहीं मुझमें पनपता
तेज़ाब मुझे ही स्वाहा ना
कर डाले ।
तेज़ाब मेरे अधूरे सपनों के
फड़फड़ाते अरमानों का तेज़ाब
अरमानों के पंखों में
सपनों की उड़ान
फड़फड़ाते पंखों से
जब -जब भरने लगता हूँ उड़ान।

मध्य में टकराते हैं ,कई व्यवधान
खोजता हूँ कई समाधान

फिर भी मंज़िले नहीं होती आसान
दिल में जलता अरमानों का तेज़ाब
जो करता रहता है ,हर क्षण मुझे बेताब
जलता रहता हूँ ,अपने ही अरमानों के
तेज़ाब में ,
डरता हूँ ,
कहीं इस तेज़ाब से मेरा
ही ना घर जले ,यह तेज़ाब मुझे ही ना छले
अपने आरमानों के पंखों को
धीमे -धीमे ही सही आगे बड़ाता रहता हूँ
धीमे -धीमे ही सही बहुत आगे निकल आया हूँ
अरमानों के तेज़ाब को अब थोड़ी ठंडक मिलने
लगी है ।
आत्म संतुष्टि का धन जब से मैंने पाया है
मेरा जीवन बन गया शीतल छाया है
अब तेज़ाब से मुझे डर नहीं लगता
क्योंकि अब  अनियंत्रित अरमानों का आब
समा चुका है ,समुन्दर की शांत लहरों में ।











"परिवर्तन शाश्वत है "

परिवर्तन प्रकृति का नियम है।
परिवर्तन ना होने पर जड़ता का
अनुभव होने लगता है ।
जड़ता में सुन्दरता का क्षय होना स्वाभाविक है ।

मौसम में परिवर्तन इसका शाश्वत उदहारण है ।
मौसम में परिवर्तन होता है तो ,प्रकृति खिलती है
फ़सल लहलहाती है ।

 फलतःपरिवर्तन शुभ का संकेत है
 वस्तुतः परिवर्तन सही दिशा में हो ।

 परिवर्तन में नवीनता भी निश्चित है
 नवीनता का स्वागत करें ,मर्गदर्शन करें

आवयश्क नहीं जो कठिन है ,जटिल है वही
सही है ।
कभी -कभी सरलता से भी अच्छे और महत्वपूर्ण
प्रश्न हल हो जाते हैं , सरलता से कही बातें भी उत्तम
दर्जे की हो सकती हैं ।
सदैव एक जैसा रहने पर जीवन बोझिल
सा लगने लगता है
जीवन में जड़ता आ जाती है
परिवर्तन सही दिशा में शुभ संस्कारों के संग
है तो ,उत्तम संकेत हैं ।

सबकी स्वयं की सोच है
किसी को सरलता से मिलता है
किसी को कठिनता से......
कभी कभी सरलता से भी बड़े -बड़े अविष्कार किए जाते हैं
ऊँची और सफल मंज़िलों को प्राप्त किया जा सकता है ।

परिवर्तन को स्वीकार करो
स्वागत करो ,सम्मान करो ,मर्गदर्शन करो ।।

मोहब्बत किसी भी मनुष्य का मूल स्वभाव है "

🎉🎉🎉🎉🌺🌺🌺🌺🌸🌸🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷😊

"मैं मोहब्बत हूँ
किसी भी मनुष्य का मूल स्वभाव हूँ "

मैं मोहब्बत जीती हूँ 😍
एहसासों में ,जज़्बातों में

मोहब्बत का कोई मजहब नहीं
मोहब्बत तो हर दिल की भाषा है ❤️
शब्द नहीं ,अर्थ नहीं ,
निस्वार्थ समर्पण है
दुआओं में ,दर्द में
क्रन्दन में ,क्रोध में
उम्र का बन्धन नहीं
रिश्तों की मोहताज नहीं
उपहार नहीं ,व्यापार नहीं
भावों में जज़्बातों में
मैं मोहब्बत हूँ ,मैं किसी भी
मनुष्य का मूल स्वभाव हूँ
मोहब्बत से ही सींचित
प्रफुल्लित रचना रचता संसार है
विश्व कौटुमबकम का पढ़ाता पाठ हूँ
मैं वो गीत हूँ ,जिसे हर कोई गुनगुनाता है
साज अलग हैं , परन्तु सुरों पर सजते गीतों के
मक़सद वही हैं , बोलना हर कोई चाहता
मोहब्बत की भाषा है ।
साजों-साज से प्रवाहित तरंगों का
मक़सद मोहब्बत है ।
जीवन की दौड़ में मोहब्बत वो दवा है
जो हर रिश्ते पर मरहम लगा उसको सवाँरती है ।

मोहब्बत ही तो हर मनुष्य का वास्तविक स्वभाव है ।







"आज और कल"

"आज और कल "


      लोग कहते हैं ,की,आज कल से
      बेहतर है ,मेरा  तो मनाना है ,कि जो
      कल था ,वो आज से बेहतर था ।

      वो कल था,जब हम खुले आंगनो में
      संयुक्त परिवार संग बैठ घण्टों क़िस्से
      सुनते -सुनाते थे , बुर्जर्गो की हिदायतें
      बातों -बातों में कहानियाँ ,मुहावरे,लोकोक्तियाँ
      के माध्यम से हमारी पीढ़ी का मार्गदर्शन होता था ।

      खुले मैदानों में दिन भर जी भर खेलते थे
      साँझ होने पर ,ज़बरन घर पर लौटाया जाता था
      शारीरिक,और मानसिक दोनो ही व्यायाम
      हो जाते थे।
      याद है मुझे ,वो रस्सी कूदना ,कबड्डी खेलना
      पिट्ठु,गिल्ली डंडा , खो -खो ,छूपन छिपायी ,
      ऊँच-नीच व घर -घर इत्यादि खेलना
      मिट्टी में गिरते सम्भलते थे , कोई फ़िक्र ना थी
      कपड़े मैले भी होते थे ।

      मिट्टी के कच्चे घरों में सुख ,चैन की नींद सोते थे
      दीवारें भले ही कच्ची होती थीं ,परन्तु रिश्तों की
      डोर पक्की होती थी ।
      आज घरों की दीवारें भले ही मजबूत होती हैं
      परन्तु रिश्तों की डोर बहुत ही कच्ची होती जा रहीं हैं ।

     हम कभी भी अ…