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April, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

**कविता**

--------------क्या आप मेरी बात से सहमत है ?
** * * एक अनपढ़ भी कविता रच सकता है
क्योंकि कविता आत्मा की आवाज है **

** कविता आत्मा की आवाज है
समाजिक समावेश के सुन्दर भाव हैं ।
कविता विचारों की सुमधुर झंकार है
कविता मात्र शब्द नही ,कोई छन्द नही।

कविता कभी समाजिक कुरीतियों के
प्रति उठने वाली आवाज है ,तो कभी
वीर,हास्य,श्रृंगार रस में बंधे शब्दों का सार है ।

कविता अन्तर्मन में उठने वाले द्वन्दों की पुकार है
कविता किसी भी भावपूर्ण मन मे उठने वाले
भावों का सार है । कविता तारीफों की मोहताज नही
कविता स्वयं ही तारीफे अन्दाज है **

** हौंसले **

** अच्छा हुआ मेरी परवरिश
 तूफानों के बीच हुयी ।
 जब मेरी परवरिश हो रही थी
 बहुत तेज आँधियाँ चल रही थीं ,
तूफानों ने कई घर उजाड़ दिये थे ।

क्या कहूँ तूफ़ान ने मेरा घर भी उजाड़ा
मेरा सब कुछ ले लिया ,
मुझे अकेला कर दिया ,
ना जाने तूफ़ान की मुझसे क्या दुश्मनी थी
मुझे अपने संग नहीं ले गया ,
मुझे दुनियाँ की जंग लड़ने को अकेला छोड़ गया ।
बताओ ये भी कोई बात हुई ,मैं अकेला दुनियाँ की भीड़
मे बहुत अकेला ,कोई अपना न मिला
पर मेरी परवरिश तो आँधियों ने की थी
मैं कहाँ टूटने वाला था । जहाँ रास्ता मिला चलता रहा
धीमे थे कदम मेरे पर कभी रुके नहीं
पर मेरा हौंसला मेरे साथ था ,हमेशा से मेरा सच्चा साथी
मेरे हौंसलों ने कभी हार नहीं मानी ,
शूलों पर चलकर फूलों की राह थी पानी
आज बहुत खूबसूरत है ,मेरी जिन्दगानी
क्योंकि मेरे हौंसलों ने कभी हार नहीं मानी ।।*****



**अक्षय पात्र**

गाँव में हर किसी को यह ख़बर थी ,कि, "राम सिंह " के घर मे *अक्षय पात्र*है ,जो उनके पास बहुत प्राचीन काल से है ।

लेकिन किसी ने भी उस "अक्षयपात्र" को देखा नही था ।

यहाँ तक कि राम सिंह के अपने परिवार के सदस्यों ने भी उस अक्षय पात्र को नही देखा था ।किसी को इजाज़त नही थी उस *अक्षयपात्र*को देखने की ।
राम सिंह का परिवार भरा पूरा था ,दो बेटे ,उनकी दो बहुयें ,दोनों बेटों के दो-दो बच्चे ।
रामसिंह ने अपने परिवार में यह घोषणा कर रखी थी ,कि मरने से पहले वह यह *अक्षयपात्र*उसे देगा जो उसकी कसौटी पर खरा उतरेगा ।
कौन नही चाहता कि, "अक्षयपात्र"उसे मिले ,इस कारण से परिवार में सबका व्यवहार परस्पर प्रेम के था ,सब एक दूसरे का यथायोग्य सम्मान करते थे ।
"रामसिंह"बहुत खुश था कि उसके परिवार के सभी सदस्य संस्कारी,और गुणवान हैं ।
घर मे हमेशा सुख-शांति का माहौल रहता सब ही बड़े धार्मिक स्वभाव वाले भी थे  ।
रामसिंह जी का सबसे छोटा बेटा थोड़ा चंचल था ,उसके बहुत मित्र थे जिनके साथ घूमना-फिरना खेलना लगभग लगा रहता था।
अपने पौते के इस व्यवहार से रामसिंह जी थोड़े चिंतित रहते ।
और दिन-र…

**शुभ संकेत**

* शुभ संकेत*

 पथरीली राहें,मिट्टी की गोद,

  कभी चिलचिलाती धूप ,

 कभी आँधी-तूफान में रहकर

 ही एक वृक्ष है फलता-फूलता

तभी तो कहते है ,धैर्य रख ऐ बन्दे

कठिनाइयों  को सहकर एक परिपक्व

मानव है बनता ।।

 सादगी से सौंदर्य निखरता है,

  व्यवहार में हो सरलता, विचारों

  में  हो निर्मलता ,तभी तो कोई

   सफलता की सीढ़ियाँ है चढ़ता ।

   हवाओं में आज मीठी सी महक है,

   शायद फिर से कोई नेकी की राह चला है ।

  किसी के मन मे सर्वजनहिताय का भाव जगा है ।

  तभी तो आज हर दिल को सुकून है

 स्वर्ग धरा पर बना देने का जनून है ।

क्या वो कोई जादूगर है , या तिलसमिया दुनियाँ से आया है ।

 वो तो बहुत शुभ संकेत लाया है ।

उसने निस्वार्थ भाव से सबको अपनाया है ।


** विचारों की खेती**

*****आजकल मैं विचारों की खेती करता हूँ ।
 शब्दों के बीज बोते रहता हूँ ।

 कई क्यारियाँ बन गयी हैं 💐
 उनमे अब फ़सल लहलहाने लगी है ।💐💐

किसी क्यारी में ,कविताएं हैं ,किसी मैं कहानियाँ ,
किसी मे गज़ल ,किसी में कोई लेख, आदि हैं।

बाग हरा-भरा हो गया है ,कभी कविता गुनगुनाती है ,
कभी कोई कहानी मुस्कराती है ।

जिन्दगी बड़ी शान से बीत रही है ।
किसी का मनोरंजन हो रहा है
किसी को प्रेरणा मिल रही है ।

किसी की उदासीनता दूर हो रही है
मैं खुश हूँ, मेरे विचारों की खेती फल-फूल रही है ।।


Sehar : एक राह तो वो होगी, तुम तक जो पहुँचती है

Sehar : एक राह तो वो होगी, तुम तक जो पहुँचती है
 मानव मन की सच्ची अभिव्यक्ति

"*वसुन्धरा**

वसुन्धरा**
जिस धरती पर मैंने जन्म लिया ,
उस धरा पर मेरा छोटा सा घर
मेरे सपनों से बड़ा ।।
बड़े -बड़े अविष्कारों की साक्षी वसुन्धरा
ओद्योगिक व्यवसायों से पनपती वसुन्धरा ।

पुकार रही है वसुन्धरा
,कराह रही है वसुन्धरा ।

देखो तुमने ये मेरा क्या हाल किया
मेरा प्राकृतिक सौन्दर्य ही बिगाड़ दिया ।

हवाओं में तुमने ज़हर भरा
में थर-थर कॉप रही हूँ वसुन्धरा
अपने ही विनाश को तुमने मेरे

दामन में फौलाद भरा
तू भूल गया है ,ऐ मानव

मैंने तुझे रहने को दी थी धरा ।
तू कर रहा है मेरे साथ जुल्म बड़ा

मेरे सीने में दौड़ा -दौड़ा कर पहिया
मेरा आँचल छलनी किया ।

मै हूँ तुम्हारी वसुन्धरा
मेरा जीवन फिर से कर दो हरा -भरा

उन्नत्ति के नाम पर धरा पर है प्रदूषण भरा
जरा सम्भल कर ऐ मानव प्राकृतिक साधनों का तू कर उपयोग जरा

**औकात की बात मत करना **

** एक गाँव मे एक सेठ रहता था ,उसका अपने गाँव में बड़ा ही नाम था कहते हैं ,वह सेठ बहुत बड़ा दानी भी था ।

कोई भी शुभ दिन हो ,कोई त्यौहार हो ,वह सेठ गरीबों को भोजन कराता, भोजन कराने के बाद वह सेठ सबको दक्षिणा भी देता , और कोई जो  कुछ माँगता उसे यथासम्भव देता। सब लोग सेठ के सामने नतमस्तक होते और जय-जय हो सेठ जी की जय हो जय हो कहते ।

 परन्तु उनमें से एक बूढ़ा फ़कीर हाथ जोड़ कर कहता खुश रहो,सेठ जी भगवान आपको और दे ।
सेठ जी काफी समय ... उस बूढ़े फ़कीर की इस हरक़त से सोच में रहते कि बाकी सब लोग तो मेरे सामने नतमस्तक होते हैं, और जय-जयकार बोलते हैं ,और ये फ़क़ीर उल्टा मुझे ही आशीर्वाद देता है ,जैसे ये ही मुझे सब दे रहा हो।

एक दिन सेठ ने उस बूढ़े फ़कीर से पूछ ही लिया,एक बात बता

 प्रश्न :- फ़क़ीर ? तुम्हें भोजन किसने कराया ?

उत्तर:- बुढे फ़क़ीर ने कहा-- जी सेठ जी आपने ।

प्रश्न- सेठ जी ने पूछा तुम्हें पैसे किसने दिये ?

उत्तर:-बूढ़े फ़क़ीर ने कहा --सेठ जी आपने

प्रश्न :-  सेठ जी बोले तो फिर तू मेरे सामने सिर क्यों नही
झुकाता ,ना ही मेरी जय-जयकार बोलता है ,तू फ़क़ीर होकर मुझे आर्शीवाद देता है, औकात क्या है तेरी ?

बूडा …

* धरती पर स्वर्ग जैसा है *ऋषिकेश*

*ऋषिकेश* यह वास्तव में देवों की धरती है
       गौ मुख से प्रवाहित ,गंगोत्री जिसका धाम ,
       अमृतमयी ,निर्मल गँगा माता को मेरा शत-शत
             प्रणाम *

 *  देवों की भूमि है,अमृतमयी गँगा की अमृत धारा है *        " ये जो शहर हमारा है "   * इसका बड़ा ही रमणीय नज़ारा है ,  *  हिमालय की पहाड़ियों का रक्षा कवच है ,*   *  नीलकण्ठ महादेव का वास है     * बदरीनाथ, केदारनाथ,का आशीर्वाद है,*       लक्ष्मण झूला का भी प्रमाण है।    * मन्दिरों में गूँजते शंखनाद हैं ।
    महात्माओं के मुख से सुनते सत्संग का प्रसाद है ।
    निर्मल,शान्त,अध्यात्म से परिपूर्ण सत्संगी वायुमंडल सारा है    वास्तव में प्रकर्ति,और परमात्मा ने इसे खूब सवांरा  है     अद्भुत अतुलनीय ,स्वर्गमयी ये *ऋषिकेश*शहर हमारा है।।

**सुप्रभात**

सुप्रभात **
********
💐वन्दन परमात्मा ,💐
एक और नयी सुबह
नयी-नयी अभिलाषाएं
नव निर्माण को एक और क़दम
नयी पीढ़ी की नयी सोच संग ,
नव सपनों को सच करने की
नयी तरंग ,नया ढँग है ,नयी उमंग
नये इरादे, नयी सीढ़ियाँ ,
नयी दुनियाँ की ,नयी इबारत लिखने को
नयी पीढ़ी के नये क़दम
इस नयी पीढ़ी को ,
नव नूतन समाज की,
बुनियाद रखने को दो
परमात्मा तुम अपने आशीर्वाद
का संग, जीवन की सरगम
फले-फूले नव -नूतन समाज
चाहे नया रूप हो,नया-नया ढँग
सज्जनता संग , प्रग्रति के पथ पर
अग्रसर उन्नति की ऊंचाइयाँ ,छुये
मेरे देश का जन-जन ,
समृद्धि से परिपूर्ण हो मेरे देश
का कण-कण ।

**स्वास्थ्य धन**

* स्वास्थ्य यानी तन-और मन दोनों की सुदृणता *
जहाँ *शारीरिक स्वास्थ्य के लिये पौष्टिक आहार ,व्यायाम ,योगा लाभदायक है।
वैसे ही मन की स्वस्तथा के लिये मैडिटेशन,योगा ,साथ ही साथ विचारों की सकारात्मकता क्योंकि* ज़िंदगी की दौड़ में अगर जीत है तो हार भी है* मुश्किलें भी हैं ,बस हमें अपनी हार और नाकामयाबी से निराश नही होना है ,ये नही तो दूसरा रास्ता अपनाये अपने मन की सुनिए ।

    *हमारे विचार बहते हुए पानी की तरह हैं, और पानी का काम है बहते रहना रुके हुए पानी मे से दुर्गन्ध आने लगती है ।*
 *  जहाँ तन का स्वस्थ होना आवयशक है वहीं मन मस्तिष्क का स्वस्थ होना भी अनिवार्य है *
आज की भागती दौड़ती जिन्दगी में हम मन के स्वास्थ्य पर बिल्कुल भी ध्यान ही नही देते मतलब कामयाबी की सीढ़ियाँ चढ़ते- चढ़ते हम मनुष्य अपने दिमाग़ पर एक बोझ बना लेते हैं, बोझा कामयबी और काम के दवाब का ;

कामयाबी तो मिलती है धन भी बहुत कमाते हैं ,परन्तु अपना सबसे बड़ा धन अपना स्वास्थ्य बिगाड़ देते हैं, किस काम की ऐसी कामयाबी और दौलत जिसका हम सही ढंग से उपयोग भी न कर सकें।
दुनियाँ का सबसे बड़ा धन क्या है ।आम जन तो यही कहेंगे रुपया, पैसा, धन-…

💐पत्थर💐

💐 * पत्थर*💐
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
आज जो तस्वीर लोगों के आकर्षण
का केंद्र है, जिसे निहार लोग कारीगिरी
की तारीफ कर रहे हैं ,वह कहीं किसी राह
पर पड़ा पत्थर ही था ।
किसी की खुबसूरत सोच ने और मेहनत ने उस
पत्थर को भगवान बना दिया ।

* जिस तस्वीर को तराशने में जितना
* अधिक समय लगता है ,वह तस्वीर उतनी ही सुन्दर बनती है ।
पत्थर को भी मजबूत होना पड़ता है तरशने के लिये
* ना जाने कितने युग बीत जाते हैं ,तरशने की हद से गुजरने के लिए
*कर्मों के बीज बोते रहो ,
*समय आने पर ही फ़सल होगी।

बीज डालने के बाद फल आने में समय
लगता है ,समय से पहले फल की चाह करना
मतलब कच्चे फल खाने जैसा हुआ।

सफलता की चाह रखने वालों की
राहें बेशक़ आज फूलों से सजी होंगी
परन्तु उन्होंने भी एक लंबा सफ़र पत्थर सी
मुश्किल राहों पर होके गुजारा होगा ।