चंद्रमा ,चांदनी और सरिता

चन्द्रमा ,चांदनी और सरिता 
एक कवि का मन रचने लगा कविता 
दिव्य अलौकिक प्रकृति की रचना
मेरे शब्दों में ना समा पाए ए प्रकृति
तेरी सहज ,निर्मल ,अद्वितीय सुंदरता 
गंगा की अमृत मयी जलधारा
चन्द्रमा की चांदनी में चांदी सा 
चमचमाती गंगा की  निर्मल अमिय जलधारा 
वाह प्रकृति का सुन्दर मिलन अद्भुत ,अतुलनीय 
अलौकिक अकल्पनीय ।


आओ अच्छा बस अच्छा सोचें

 आओ कुछ अच्छा सोचें अच्छा करें , अच्छा देखें अच्छा करने की चाह में इतने अच्छे हो जायें की की साकारात्मक सोच से नाकारात्मकता की सारी व्याधिया...