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**चिराग था फितरत से**

*******चिराग था फितरत से
              जलना मेरी नियति
               मैं जलता रहा पिघलता रहा
               जग में उजाला करता रहा
               मैं होले_होले पिघलता रहा
               जग को रोशन करता रहा *****                "जब मैं पूजा गया तो ,
                जग मुझसे ही जलने लगा ,
                मैं तो चिराग था ,फितरत से
                मैं जल रहा था ,जग रोशन हो रहा था
                कोई मुझको देख कर जलने लगा
                स्वयं को ही जलाने लगा
                इसमें मेरा क्या कसूर"

                **चल बन जा , तू भी चिराग बन
                थोड़ा पिघल , उजाले की किरण
                का सबब तू बन ,देख फिर तू भी पूजा
                जाएगा ,तेरा जीना सफ़ल हो जाएगा **

****रोना बंद करो ****

*"*मेरे मित्र तुम्हें क्या हो गया है, आजकल ....,तुम तो ऐसे नहीं थे ।   तुम रोते हुए अच्छे नहीं लगते ।
 **अमन याद है , तुम्हें ,जब में अपने जीवन से निराश और हताश होकर अपना जीवन ही समाप्त करने चला था, तब तुम ढाल बनकर मेरे आगे खड़े हो गए थे । तुमने मुझमें  मेरा आत्म विश्वास वापिस जगाया था । वरना में तो अपनी जिंदगी से हार मान चुका था।  अब तुम्हारा आत्मविश्वास कहां गया , अमन तुम तो इतने कमजोर नहीं हो  ,अच्छा नहीं लगता,  तुम्हारे मुंह से नकारात्मक बातें सुनना , तुम तो वो   सोच हो जो अंधेरे में भी जगमगाए ..... पत्थरों को भी जीवंत कर दे । वीराने में भी मंगल दीप जला दे ।

   ** हां मेरे मित्र "सजग" कई दिनों से ना जाने क्या  हो गया है मुझे ,
 मैं भी बस रोना ही रो रहा हूं ।
 रोना ...... हा _हा,  हां रोना .....
बस हालातों को दोष दे रहा हूं । मैं भी बस जन सामान्य की तरह ,अगर ऐसा होता तो मैं ऐसा होता , मैं ये कर पाता वो कर पाता । कुछ मेरे जैसा ही नहीं ,तो मैं क्या करूं मैं तो  किस्मत को ही  दोष
 दूंगा । अगर मेरे हक में सब होता तो सही होता।
 मेरी किस्मत ही ऐसी है ......
    तुम्…

** पैग़ाम मोहब्बत का **

*दिल के कोरे काग़ज़
 पर कुछ शब्द ,गुमनाम से लिखता हूं *

* मैं तो हर शब्द में मोहब्बत का पैग़ाम लिखता हूं
आगाज़ दर्द से ही सही पर ,
खुशियों के पैग़ाम लिखता हूं *

मोहब्बत करना कोई फ़िज़ूल का शौंक नहीं
ये तो फरिश्तों की नियामत है
सारी कायनात ही मोहब्बत की
बदोलत है , मोहब्बत ही तो सच्ची इबादत है *

**हां मैं नफरतों की वादियों से
तंग आकर मोहब्बतें
पैग़ाम भेजता हूं **

**जितनी तोहमत लगानी है ,लगाओ
हां _ हां मैं इससे _उससे हर शकस
से मोहब्बत करता हूं **

**तोहफा ए मोहब्बतें के लिए
मैं ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करता हूं
इतने सुंदर किरदार को निभाने की
कला जो मुझको मिली ,
अपने किरदार को निभाने की
भरकस कोशिश करता हूं *