कवारनटाईन का उद्देश्य

राघव:-  वनवास जैसा ही तो है।

 राघव :- चौदह दिन के लिए कवारनटाइन हूं , कैसे बीतेंगे ‌‌‌चौदह दिन .....

सिया :- राघव , तुम्हें तो सिर्फ चौदह दिन के लिए अलग रहना है तो तुम्हें इतनी परेशानी हो रही है । श्री राम सीता लक्ष्मण जो एक राजा की संतान थे ,राजमहल में रहते हुए समसत सुख सुविधायेओं के बीच जीवन यापन कर रहे थे , उन्होंने राजमहल के समस्त सुख वैभव को‌‌ पल में त्यागकर वनवास में आने वाली ‌ कठिनाई‌ यों के बारे में तनिक भी ना सोचते हुए सहर्ष चौदह साल का वनवास स्वीकार किया था।

 राघव :- वो सतयुग था ,और सतयुग की बात अलग थी , मैं साधारण मानव हूं ।

सिया: - राघव तुम्हें अलग तो रहना पड़ेगा , तुम्हारे तन के अन्दर वाईरस रुपी ने प्रवेश कर लिया है ,और तुम्हारे जैसे अनगिनत लोगों के शरीरों में यह वाइरस रूपी राक्षस प्रवेश करके तबाही मचा चुका है और कई लोगों को तो मौत के घाट उतार चुका है । 

अब  तुम क्या चाहते हो , तुम्हारे से यह वाइरस रुपी राक्षस और बचे स्वस्थ लोगों के शरीरों में घुस कर तबाही मचा दे।

राघव;- अरे नहीं -नहीं  जैसे राम ,सिया,लक्ष्मण के वनवास के पीछे कई विषेश कार्यों को सम्पन्न करना था । ऐसे ही हमें भी इस कवारनटाईन काल में कुछ अधूरे कार्य पूर्ण करने होंगे  ।

वाईरस रुपी शत्रु राक्षस से बचना है ,और अपने परिवार को समाज को बचाना है ..... जिसके लिए हमें बहुत कुछ सीखना होगा तैयारी मां करनी होगी

1,कवारनटाईन के बहाने समय मिला है , स्वयं के ऊपर कार्य करने का.... भागती दौड़ती जिंदगी में फुर्सत का जो समय मिला है ,उसका सदुपयोग किजिए ।

चिकित्सकों द्वारा बताई गई दवाईयों का यथासमय सेवन कीजिए ।

व्यायाम और योगाभ्यास को अपनी दिनचर्या में शामिल कीजिए ।

समय मिला है स्वयं के सुधार का ध्यान योग का अभ्यास कीजिए ।

एक बात तो अवश्य समझ आई होगी स्वास्थ्य धन से बढ़ा कोई धन नहीं , स्वास्थ्य ठीक रहेगा तभी संसार के समस्त सुख अच्छे लगते है ।


1,वाइरस रूपी राक्षस अन्य स्वस्थ लोगों के शरीरों में ना प्रवेश करें इस के लिए कवारनटाइन ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌रूप वनवास  को स्वीकार कर अलग रहना होगा ।

2.वाइरस रुपी राक्षस को मारने के लिए मास्क की ढाल सदैव धारण करें ।

3.हाथों को बार बार धोयें , सेनेटाइज करें अनावश्यक रूप से इधर उधर ना छुएं 

4, अनावश्यक रूप से घर से बाहर ना निकले जरूरी सामान लाना है तो घर का एक ही सदस्य एक बार में सारा सामान ले आये।

राम जी के वनवास का उद्देश्य था राक्षसों का अंत रावण जैसे महाज्ञानी , किन्तु अहंकारी राक्षस को मारकर पृथ्वी में रामराज्य स्थापित करना ।






हमसाया

हमसाया हम सब मां का 

मां का प्यार कड़वी औषधि 

का सार, खट्टा मीठा सा 

प्यारा एहसास 

मां की कृति हम सब 

मां की आकृति हम सब 

मां ने हमें आकार दिया 

ज्ञान संस्कारों का वरदान दिया 

मां ने हमें तराश -तराश कर सभ्य 

सुसंस्कृत जीवन जीने का अधिकार दिया 

मां ने ही हमें बनाया, मां ने हमें संवारा 

मां ने हमें संसार में रहने को 

बल, बुद्धिि, विवेक, धैर्य की संजीवनी के 

अमृत का रस पान दिया , मां ने हमें बनाया 

मां का ही हम सब हमसाया 

पिता विशाल कल्पवृक्ष  

जड़ों की मजबूती का साया ।।






मां की महिमा का क्या बखान करूं 



एसी कोई जगह नहीं जहां नहीं होती 



आओ अच्छा बस अच्छा सोचें

 आओ कुछ अच्छा सोचें अच्छा करें , अच्छा देखें अच्छा करने की चाह में इतने अच्छे हो जायें की की साकारात्मक सोच से नाकारात्मकता की सारी व्याधिया...