संदेश

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** पैग़ाम मोहब्बत का **

*दिल के कोरे काग़ज़
 पर कुछ शब्द ,गुमनाम से लिखता हूं *

* मैं तो हर शब्द में मोहब्बत का पैग़ाम लिखता हूं
आगाज़ दर्द से ही सही पर ,
खुशियों के पैग़ाम लिखता हूं *

मोहब्बत करना कोई फ़िज़ूल का शौंक नहीं
ये तो फरिश्तों की नियामत है
सारी कायनात ही मोहब्बत की
बदोलत है , मोहब्बत ही तो सच्ची इबादत है *

**हां मैं नफरतों की वादियों से
तंग आकर मोहब्बतें
पैग़ाम भेजता हूं **

**जितनी तोहमत लगानी है ,लगाओ
हां _ हां मैं इससे _उससे हर शकस
से मोहब्बत करता हूं **

**तोहफा ए मोहब्बतें के लिए
मैं ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करता हूं
इतने सुंदर किरदार को निभाने की
कला जो मुझको मिली ,
अपने किरदार को निभाने की
भरकस कोशिश करता हूं *



”मंजरी”

“  मंजरी को शहर आकर बहुत अच्छा लग रहा था ।
  अभी कुछ ही दिन पहले वो अपनी मौसी के साथ गाँव से शहर घूमने आ गयी  थी ।
  शहर की भागती दौड़ती चकाचौंध से भरी ज़िन्दगी मंजरी को लुभा रही थी ।
 घर में मौसी -मौसा उनके चार बच्चे तीन  लड़कियाँ और एक चौथा भाई जो अभी पाँच ही साल का था सभी लगभग आठ  दस बारह साल के थे ,मंजरी की उम्र भी बारह वर्ष ही थी ।सभी बच्चे मिलकर ख़ूब मस्ती करते थे ।
मौसा मज़दूरी करते थे ,मौसी भी चार पाँच घरों में सफ़ाई का काम करती थी ।
 कुछ दिन तो मौसी -मौसा को मंजरी बहुत अच्छी लगी परन्तु अब मंजरी मौसा की आँखो को खटकने  लगी ।मौसी -मौसा अपने ही परिवार को मुश्किल से पाल रहे थे ,अब ये मंजरी का खर्चा और बड़ गया था ।
अब मौसी मंजरी को गाँव वापिस लौट जाने की सलाह देने लगी ।

लेकिन मंजरी गाँव जाने को बिलकुल भी तैयार नहीं थी ।

एक दिन की बात है ,मौसी की तबियत अच्छी नहीं थी उस दिन काम का बोझा भी ज़्यादा था ,और आज तो मौसा भी ज़्यादा पीकर आये थे ,घर में बहुत हंगामा हुआ ,मौसी बोल रही थी एक तो घर में वैसे ही खाने वाले ज़्यादा और कमाने वाले कम ऊपर से तुम शराब पीकर पैसा उड़ा रहे हो ,घर में त…

**सच्चा मित्र **

**** 
          **सच्चे मित्र से मिलने की खुशी और मन में
          कशमकश करते , कई प्रश्न ,कई बातें ,यूं ही             बयान हो जाती है ,जब लगता है ,कोई अपना मिल गया है ,अब कुछ कहना इतना जरूरी नहीं,क्योंकि वो मेरा मित्र है, वो मुझे देख कर ही मेरे  दिल में क्या चल रहा  है सब जान जाएगा ।

       ** हर बार सोचता हूं
            आज उसे दिल के सारे
            हाल बता दूंगा ,शब्द जुबान
            पर होते हैं ,मैं बोल भी नहीं पाता
            वो मुझे देखकर यूं मुस्कराता है
                *जैसे सब समझ गया *
            वो  मेरा मित्र, कुछ अलग है दुनियां से ।
            मेरा सहयोगी तो है ,पर जताता नहीं
            मैं जानता हूं,वो प्रेरणा बनकर मुझे
            प्रेरित करता रहता है, क्योंकि वो मुझे ही
            योग्य और समझदार बनना चाहता है ।

         **घंटों बैठ कर मैं उससे बातें करता रहा,ना जाने   क्या _ क्या.......
   आज पता नहीं  उससे बातें करने के लिए मेरे पास इतना समय कहां से आ गया था ।
वरना , मेरे कितने काम यूं ही रुके रहते थे कि आज समय नहीं है कल करूंगा, प्रतिदिन का यही बहाना, आज…

**हां मुझे आगे बढ़ने का शौंक है ***

*****हां मुझे आगे बढ़ने का शौंक है **
  **परंतु किसी को पीछे करके नहीं
  *आगे बढ़ना प्रकृति का नियम है।
  और अपने जीवन के अंतिम क्षण
  तक मैं आगे बढ़ने का प्रयास करती रहूंगी **

  **जीवन प्रतिस्पर्द्धा नहीं ,
  प्रतिस्पर्द्धा कीजिए स्वयं से
  स्वयं के परिश्रम से,संयम से**

  परंतु किसी को धक्का देकर करके नहीं
  मुझे स्वयं की जगह स्वयं बनानी है ।

   मैं किसी का स्थान लूं ये मुझे
   मंजूर नहीं
   मेरा स्थान मेरे कर्म ,मेरे धर्म
  ओर मेरे प्रयास पर निर्भर है ।

  ना मुझे किसी से कोई प्रतिस्पर्द्धा है
  ना किसी से वैर ,मेरी अपनी मंजिल
  मेरा अपना सफर,
 **मैं अगर अपने कर्मो के बल पर आगे बढ़ती हूं
  तो यह कदापि नहीं की मैं किसी का स्थान लेना      चाहती हूं **
 **या मै किसी को पीछे करना चाहती हूं
 मेरा तो हरदम यही प्रयास रहेगा कि,
 सब आगे बढ़े ,सब अपनी मंजिल स्वयं बनाएं 
 सब समृद्ध हों ,सबका विकास हो ।

  ****मैं सूरज की तरह चमक सकता हूं
  पर सूरज की जगह ले पाना असम्भव ही ,
  नहीं ,नामुमकिन हैं।
  माना कि मैंने बहुत बड़ी बात कह दी ।


  मैंने अक्सर देखा है ,कुछ बढ़े व्यक्ति
  स्वयं से पद में छो…

***इस दीपावली *****

**************
**
प्रत्येक वर्ष की भांति ,
इस वर्ष भी दीपावली से पूर्व
स्वच्छता अभियान जोरों से चला
घर ,आंगन भरपूर सुसज्जित हुआ
भगवान विष्णु मां लक्ष्मी,के स्वागत में
आंगन में  रंगोली सजाई
पुष्पों की माला बनाई
चमचमाती झालरें जगमगाई
खील ,पतासे और मिठाइयां भी आयीं
इस बार घर के संग संग मन के मैल भी साफ किये जिन घरों के द्वार कई वर्षों से नहीं खटखटाए थे ,
उन सब के द्वार खटखटाए ,दिल के सारे शिकवे मिटाए ,पुराने मित्रों से मिलकर ,प्रेम केअश्कों की धारा से एक दूजे के गम मिटाए ।
कीमती उपहारों के आदान प्रदान की बजाए ,कुछ मिठाइयां,कुछ कपड़े,फल,उपहार ,निर्धन जरूरतमंद बच्चों में बांट आए।
इस दीपावली हम मिट्टी के दीपक ही खरीद कर लाये
आमावस्या की रात में ,
भगवान विष्णु और लक्ष्मी के स्वागत में कुम्हार की
मेहनत से बने दीपक ही सजाए,
दीपकों की माला से सुशोभित आंगन देख
भगवान विष्णु ,लक्ष्मी जैसे  हमारे घर अाए
वैसे ही सबके घर अाए यही कामना लिए हम सबको शुभ दीपावली के कह अाये ।
सबके मंगल कामना की दुआ भी कर अाए ।******







**नया दौर, नयी सोच **

*****
 "आज फिर से ये सवारी किधर चली बन -ठन के .......  ओहो ! अम्मा जी किसी को टोकते नहीं जब वो किसी जरूरी काम से जा रहा हो ।
अम्मा जी ,व्यंग करते हुए बोली,जरूरी काम -
अब तुम्हे क्या जरूरी काम है , तुम्हारे सारे काम तो तुम्हारे बच्चे कर देते हैं ,ऑनलाइन घर पर बैठे - बैठे ,तुम्हे  क्या काम है ,मै जानती हूं ।
 क्या काम है,जरा  बताओ आप तो अन्तर्यामी हो अम्मा, मुझे पता है,आपको मेरा अच्छे से तैयार होने पर शंका होती है। अम्मा बोली नहीं बेटा शंका क्यों होगी ,तेरी बेटी की शादी हो गई,और चार पांच साल में बेटे की भी हो जाएगी ,तेरी बहू आएगी , बेटा बोला मैं समझ गया की आप क्या कहना चाहती हो की मेरी उम्र हो गई है , मैं बूढ़ा हो गया हूं ,नहीं अम्मा मैं बूढ़ा नहीं हुआ हूं और ना होंगा अभी मेरी उम्र ही क्या हुई है ..... हंसते हुए बोला ।
अम्मा बोली जा जो तेरी मर्जी वो कर मेरा क्या ,
जब बहू - बेटा हंसेंगे ना तब अक्ल आयेगी .....
बेटा अम्मा के पास आकर बैठ गया ,और बोला अम्मा ,लोग क्या कहेंगे ,लोग तो कुछ होने पर भी कहेंगे और कुछ ना होने पर भी कहेंगे ।
अम्मा नवीनता आव्यशक है ,नवीनता हमारे जीवन में नया उत्…

“पुष्प और तितलियाँ “

🌺🌸🌺🌸👌🌺💐💐🌸🌺🎉🌸🌺🌹🌸🌺🌸🌹🌸🌺🌸🌺🎊🎊🎊🎊
        मेरे सुन्दर संसार की बगिया में,
        विभिन्न रंग - बिरंगे पुष्पों की फुलवारी है
        मेरी फुलवारी में तितलियों का भी बसेरा होता है
        फुलवारी , आकर्षक ,मस्त , सुन्दर रंग - बिरंगी तितलियों को
        बहुत भाती हैं , वो प्यारी तितलियाँ , एक पुष्प से दूसरे पर इठलाती हैं
        मानों गीत - हँसी -ख़ुशी के गाती हैं , और कहती हैं ,
        तुम्हारे और हमारे जीवन में बहुत समानता है
        तुम भी अपने छोटे से जीवन काल में सबके जीने का सबब बनते हो
        और हम भी अपने छोटे से जीवन में , किसी की बगिया को महकाते हैं ,
        कभी किसी के दिल को भाते हैं , कभी कोई हमें तोड़ के ले जाता है
        कोई हार बना गले में पहनता है , कोई मंदिर में चढ़ाता है ,
        दुख में हो या सुख में मेरा तो भरपूर उपयोग हो जाता है ,
        अपने छोटे से जीवन में मेरा तो सम्पूर्ण उपयोग हो जाता है
        मैं “ईत्र “बनकर हवाओं को महकाता हूँ ,
        और धरती पर वायुमण्डल में अपना असर छोड़ जाता हूँ ।
        मैं पुष्प हूँ , में मरकर भी अमर हो …

“हौसलों का दामन पकड़ “ “

“हौसलों का दामन पकड़ “

“ तिमिर घोर तिमिर
वो झिर्रीयों से झांकती
प्रकाश की किरण
व्यथित , व्याकुल ,
पराजित मन को ढाढ़स बँधाती
हौंसला रख ए बंदे
उम्मीदों का बना तू बाँध
निराशा में मत अटक
भ्रम में ना भटक
वो देख उजाले की झलक
कर्मों में जगा कसक
नाउम्मीदी को ना जकड़
उजियारा दे रहा है तेरे द्वार
पर दस्तक
तेरा हौसला ही तेरे आगे बढ़ने का सबब
हौसलों ने उम्मीद के संग मिलकर
रचे हैं कई आश्रयजनक अचरज
तेरे हौसलों ने दिखाने हैं अभी कई बड़े- बड़े करतब ।

🌸🎉ख़ुशियाँ बाँटो 🎉🌺

🌸🎉🌟🌟🌟🌟

         “अपनी ख़ुशियाँ  तो सब चाहते हैं
            परन्तु जो दूसरों। को ख़ुशी देकर ख़ुश होते हैं
          उनकी ख़ुशियाँ दिन - प्रतिदिन बढ़ती रहती हैं “

 गाँव में दशहरे के पर्व के उपलक्ष्य  में मेला लगा था  ।
   🌟🌟गाँव वालों में बहुत उत्साह था , मेला देखने जो जाना था , सभी अपने - अपने ढंग से तैयार होकर सज -धज कर कर मेले में जाने के लिये तैयार हो रहे थे ।
 बच्चों में भी उत्साह था , आख़िर गाँव में  कभी -कभार ही ऐसे मौक़े आते थे , की सब एक साथ मिलकर कहीं जायें।

    😊😃 वैदिक और बैभव भी मेले में घूमने जा रहे थे ,दादी का पंखा टूट गया था , दादी को अब मच्छर काटेंगे ,गर्मी भी लगेगी , वैदिक को बहुत चिंता हो रही थी .. दादी का पंखा मिल जाए मेले में वैदिक की दिली  इच्छा थी .....
   साथ में दोनो के माता -पिता भी थे , वैभव और वैदिक की माओं ने सिर पर बड़े-बड़े घूँघट ओड़ रखे थे , की अचानक आगे गड्ढा आया , और दोनो माताओं के पैर लड़खड़ाये और वो गड्ढे में जा गिरी , बच्चे ज़ोर -ज़ोर के हँसने लगे .... तभी दोनो माताओं के सिर से घूँघट हटे , और दोनो झट से उठ खड़े हुई , एक दूसरे को देखत…
चित्र
“  ये धरती अपनी है , नीला आसमान भी अपना है “
  खेलने को खुला मैदान है ,आओ मित्रों खेल खेलें
  हम बन्द कमरों में नहीं रहते , हमारे खेल बड़े-बड़े हैं
  हमें रहने को खुला मैदान चाहिए , सपने देखने को
  चाँद , सितारों का जहाँ चाहिये ।

😊भीड़ 🌟

😊भीड़ 🌟

     “भीड़ बहुत भीड़ है ,
       मैं जानता हूँ ,मैं भी
       भीड़ का ही हिस्सा हूँ
       पर मैं चाहता हूँ ,
       मैं भीड़ ,में रहूँ
       पर भीड़ मुझमें ना रहे
      भीड़ में “मैं” अपनी अलग
      पहचान बनाना चाहता हूँ ।
     भीड़ में अजनबी , अकेला बनकर
     रहना मुझे मंज़ूर नहीं ......
     मैं भीड़ संग भीड़ को अपनी पहचान बनाना चाहता हूँ
     मैं भीड़ में एक सितारा बनकर चमकना चाहता हूँ “


🙏🌺श्री गणेश प्रियं भक्त हृदयेश विशेष 🌺🌺🎉🎉

🙏🙏💐💐“गणेश चतुर्थी”का  पुण्य दिन था , सभी एक दूसरे को शुभकामनायें दे रहे थे ।
    शहर में जगह - जगह पंडाल सज गये थे , “विघ्न हरण ,मंगल करन , गजानन , लम्बोदर ,
     विनायक , गणेश महाराज की मूर्ति स्थापना की सुन्दर बेला , गणेश जी के भजनों से सारा परिवेश भक्तिमय हो रहा      था , सबके दिलों  में हर्षोल्लास की उमंग नज़र आ रही थी ,
गणेश जी की सुन्दर से सुन्दर विशालतम सुसज्जित प्रतिमाओं की स्थापना के वो पल ,
दिन , मन में बस सिद्धि विनायक गणेश जी का ही ध्यान , गणेश जी का श्रिंगार , सेवा , मोदक,प्रसाद , फल, फूल आदि

😊🙏🎉इस बार मेरा बेटा भी जिद्द पर अड़ गया कि वो भी इस “गणेश चथुर्ती”पर  गणेश जी को अपने घर लायेगा । मैं भी हर बार यही कह कर उसे समझाती बेटा “भगवान गणेश जी “तो हमेशा से हमारे साथ है  ।उनकी प्रतिमा भी है हमारे मंदिर में हमारे गणेश जी हमेशा हमारे घर पर ही रहते हैं ।
कहने लगा माँ तुम हर बार कहती हो अगले साल लायेंगे , तुम थोड़े और बड़े हो जाओ , माँ अब इस बार तो गणेश जी घर में आकर रहेंगे , मैं उनकी सेवा करूँगा , मोदक खिलाऊँगा , भोग लगाउँगा भोजन कराऊँगा , भजन गाऊँगा भी , आप देखना म…

🌺🌸लेखक केशव कुमार और पुष्प वाटिका 🌺💐🌹

🌺🌹🌺💐😊
       प्रकृति प्रेमी , घण्टों दरिया किनारे बैठना , आती - जाती लहरों से मानों बातें करना , कभी किसी पहाड़ की चोटी पर     चढ़ जाना , ऊँचाइयों से अपनी धरती माँ को निहारना ........वृक्षों और वनस्पतियों तो मानो , लेखक केशव कुमार की प्रेरणा थे ,उनका तो कहना था की भगवान अगले जन्म में उन्हें वृक्ष बनायें , क्योंकि वृक्ष हर हाल में उपयोगी होता है , कभी
छांव बनता है ,फल देकर किसी की भी भूख मिटाता है , प्राणवायु देता है वृक्ष , उसकी लकड़ी भी उपयोगी होती है , मानो वृक्ष पूर्ण रूपेण उपयोगी व समर्पित होते हैं

    हर दिन की तरह केशव कुमार ,आज भी अपने शहर की मशहूर पुष्पों की दुकान जिसका नाम “पुष्प वाटिका “था , जाकर रूक गये और , रंग-बिरंगे खिले - खिले पुष्पों को निहारने लगे ।  हर दिन की तरह उस फूलों की दुकान पर काम करने वाले एक लड़के ने आकर केशव कुमार को बैठने के लिये एक कुर्सी आगे बड़ा दी , केशव कुमार मुस्कुराते हुए उस लड़के “लम्बू “से से बोले तु अपना काम कभी नहीं भूलता जा दुकान पर , भाई जी का हाथ बँटा ,
वरना वो तुझे ग़ुस्सा करेंगे , हाँ बाबूजी आप सही कहते हैं , मैं जाता हूँ  , तभी एक ग्…

“ मेरे मीठे सपने “

⭐️⭐️ “वो जो मेरे अपने थे ,
  “  मेरे सपने थे “⭐️⭐️
 वो जो मेरे सबसे अज़ीज़ थे
 कब से छुपा के रखा थे
दुनियाँ की नज़रों से
पलकों के दरवाज़ों में बंद करके ।
आज आँखो से छलक पड़े अश्रु बनकर
देख दुनिया का व्यभिचार , आतंकवाद का
घिनौना तांडव ...
मेरे सपने रुदन करने लगे
दर्द में कराहते हुए , कहने लगे
बस - बस करो ,
हमारे पूजनीय , गौतम , राम , रहीम , कबीर ,
विवेकानंद आदि महान विभूतियों ... की धरती पर
ये अहिंसक व्यवहार ....
मुझमें तो सिंचित थे , भारत भूमि के
महान विभूतियों ,दधिचि  ,ध्रुव ,
एकलव्य आदि के चरिथार्थ
मैं हूँ अपने पूर्वजों की , कृतार्थ

⭐️🌸“यूँ तो मेरे सपनों की किताब खुली थी
फिर भी दुनियाँ की नज़रें ना उन पर पड़ी थी ।
“मेरे सपनों का ज़हाँ बहुत ही  हसीन है 🌺🌺
सन्तुष्टता के धन से सब परिपूर्ण हैं
धर्म सबसे बड़ा इंसानियत है
भेदभाव की ना कोई जगह है
सभी सुसंस्कृत , सभ्य आचरण वाले ,
कभी किसी का दिल ना दुखाने वाले
सब सबके प्रिय , मुस्कुराते चेहरों वाले
ख़ुशियों के सौदागर
एक दूजे की त्रुटीयो को माफ़ करने वाले
सबको इंसानियत की राह दिखाने वाले
हिंसा और वैर ,विरोध की झड़ियाँ काटने वाले
अप्नत्व…

“ चैन की तलाश “

“  चैन की तलाश “

ज़िन्दगी भर भटकता रहा , चैन की तलाश में
ठहराव की चाह में , कुछ पल का चैन ,
फिर बैचेनी , ख़ुशियाँ अनगिनत ,
पर सब एक -एक कर
यादों के बक्से में बंद
कहने को सब कुछ
उसी पल का
सब नश्वर
ऐसी ज़िन्दगी
सिर्फ़ भटकाव
क्या करूँ ?
कहाँ से लाऊँ
शाश्वत सुख
कभी ना ख़त्म
होने वाला चैन
“मैं बेचैन “
तभी एक राह दिखायी दी
एक आवाज सुनायी दी
मेरा कनेक्शन परमात्मा से जुड़ा
वहाँ तो शान्ति का सागर था
अभी तो शुरुआत थी मेरी आत्मा
को असीम शान्ति का अनुभव होने लगा
अब वहाँ से आने को मन ना करा
अचानक मानो परमात्मा ने सन्देश दिया
जा औरों को भी ये राह दिखा
वो शान्ति का सागर है , दया का भण्डारहै
वहीं से तु आया है , वहीं से तुझको सब कुछ मिलेगा
तु दुनियाँ में ना भटक इस तरह
बस दुनियाँ  में जी इस तरह
तू बन जाये सबके मुस्कुराने की वजह ......
चित्र
भगवान ने दो हाथ दिये हैं , किसी के आगे फैलाते नहीं , मेहनत करते हैं गंगा किनारे बैठ फूल बेचते है , ना शिकवा करते हैं ना शिकायत ,बस दो वक़्त की रोटी के लिये दिन भर जुगाड़ करते रहते हैं ,गंगे माता का आशीर्वाद बना रहे , यूँ ही ज़िन्दगी कट जाये , बच्चे पड़ लें कुछ बन जाये बस बहुत है ....

🌺🌼🌸मेरा मीत 🌸🌸🌺🌺

🌹🌹🌻🌻🌼🌸💐💐🌸🌸
🌺🌺“मेरा मीत , मेरा गीत ,
मेरे जीवन का संगीत
मेरे मन का मीत ,
तुम से ही मेरे जीवन का गीत
सात सुरों की सरगम मेरा मीत
मीठी धुन में जब बजता है कोई 🎼🎼
गीत , चेहरे की मुस्कराहट में दिखता है मेरा मीत “🌸🌺

🌻🌹🌸🎉🌹“प्रकृति की सुन्दरता में भी मेरा मीत
🌻🌻🌺🌺ख़ूबसूरत बहुत ख़ूबसूरत है मेरा मीत
गुलाब , चम्पा , चमेली ,कमल ...
हवाओं में ख़ुशबुओं  की तरह है 🌈
मेरा मीत .......🌟🌟✨
मेरे सुर , मेरे संगीत ,तुम मेरे
संग -संग रहना .....
मैं जाऊँगी जग जीत .....”⚡️✨🌟🌟⭐️





🌧 “मेघों ने मल्हार जब गाया”⛈

⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈
 “तड़फत दिन -रैन
       बैरी मन”
  कैसी लगन लगा बैठा ये दिल
  भी बेचैन...
  हारी मैं समझा -समझा ,पर
  प्रियतम के विरह में
  बरसते दिन -रात नयन💦💦
  कहीं ना लगता मन
  पागल मन
  पलकें भी ना झपकाते नयन “
  कहीं से आ जाये उसका सजन...
  राह निहारे पल -पल नयन ...

 “ मैं द्वार पर थी खड़ी
   अचानक ,लगी सावन की झड़ी थी🌧🌧🌧🌧🌧
   आँखों में नमी थी💦💦
   दिल में कसक थी
   आकाश ने काली घटाओं की    🌫🌫
   चादर ओढ़ी थी ,
   मेघों ने मल्हार जब गाया  🌨☔️
  “ जी भर आया ....दिल का दर्द
   नयनों से बाहर आया
  आकाश भी रोया , जी भर के रोया “🌧⛈🌩🌨
   वर्षा की बौछारों में ,
   मैंने भी भिगोये , जी भर नयन
   अब दिल का बोझ हल्का हुआ
   आत्मा का आत्मा से मिलन हुआ
   बिन देखे , बिन बोले मेरा तो मिलन हुआ
   मेघों ने मल्हार जब - जब गाया   ⛈💨🎼🎼🎤🎤
   मैंने भी अपना सुर उसके सुर में मिलाया .........🌧🌨🎼🎼🌬🌩☔️☔️🎤🎤










☔️⛈“सावन के झूले “⛈☘️🌿

🌧🎡“सावन के झूले पड़े थे      मन्त्रमुग्ध सब झूल रहे थे     वसुन्धरा से अम्बर की ओर पींगे भर रहे थे “    तभी ....... “अम्बर ने “वसुन्धरा”को जब निहारा 🌎
🌧मेघों से घिर गया अम्बर सारा “ मेघों ने सुन्दर - सुन्दर आकृतियाँ बनायीं ☁️⛈ जो सबके मन को लुभायीं “ बिजली भी चमकी ..... फिर छम के बरसा छम -छम के बरसा  🌧⛈अम्बर से मेघों का बन ,वर्षा का जल सारा  वसुन्धरा  भी प्यासी तृप्त हुईं  हरी-भरी धरती प्रफुल्लित हुई , कोयल ने भी सुमधुर संगीत सुनाया  मयूर ने भी नृत्य से मन लुभाया ।
वृक्षों की डालियों ने बाँहें फैलायी 🌴 प्रकृति ने आवाज लगायीं  सावन की रिमझिम वर्षा है आयीं ☔️ चलो सखियों झूलन की ऋतु है आयी  सुख -समृद्धि और सम्पन्नता का संदेशा लायी ।🎄🌴🍃🍀 धरा ने अम्बर कीओर निहारा  और कहा तुमने तो भिगो दिया  मेरा आँचल सारा,सुखी पड़ी धरती को तुमने तृप्त किया । तुमसे ही मेरा जीवन समृद्ध हुआ  सम्भव नहीं है , तुम बिन जीवन हमारा  जबकि तु एक किनारा मैं एक किनारा  हमसे ही तो सृष्टि का अस्तित्व सारा ।☔️☔️🌧






“काग़ज़ की कश्ती “

🎉” अच्छा हुआ कोई दिल की 🎉”
सुनने वाला नहीं मिला
जो दिल में आया वो
काग़ज़ पर लिख दिया
जो लिख दिया तो,सबने
पढ़ लिया “

“ सबने कहाँ तुमने तो हमारे दिल
का हाल लिख दिया
मैंने तो अपने दिल का हाल लिखा था
सबके दिल का फसाना
आशिके तराना एक ही सा था .....
सबका सवाल एक ही था ......
विचारों का तूफ़ान भी एक ही था ....
फिर सबने मिल बैठ कर अपने दिल का .....
बोझ हल्का कर लिया “🎉🎉🎉

“काग़ज़ की कश्ती बनायीं
स्याही में क़लम डुबाई
दिल की बात शब्दों के
माध्यम से विचारों में परिवर्तित
हो आख़िर दिल से बाहर आयी
सभी उस कश्ती में सवार थे जो थी
मैंने बनायीं “


“आध्यातम और वास्तविकता “

“ भक्ति श्रद्धा है , आस्था है ,शुभ भावनायें हैं “
                             भक्ति को अन्धी दौड़ ना बनाये ,परमात्मा तो सर्वत्र है”

 🎉🎉🎉🎉🎉 भारतीय संस्कृति ,विभिन्न रंगों में रंगी ,अद्भुत ,अतुलनीय है ।
                            इन्द्र्ध्नुष के रंगो में रंगा ,विभिन्न संस्कृतियाँ भिन्न -भिन्न रूप -रंगो से रंगे प्रत्येक प्रान्त की अपनी एक अलग पहचान है ।
 विभिन्न रूप हैं ,भाषायें अनेक हैं , फिर भी “हम भारतीय एक हैं “
वास्तव में भारत में हर एक प्रान्त अपना जीवन जीता है ,अपने -अपने प्रान्त की अतुलनिय ,अद्भुत छ्टा लिए हर प्रान्त इन्द्रधनुष के रंगो की भाँति भारत में सतरंगी छ्टा बिखेरता है ।
भारतवर्ष प्राचीन काल से ही ,भक्ति प्रधान देश रहा है ।
आस्था उस “परमसत्ता परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण , विश्वास ...,

 हमारी भारतीय संस्कृति प्राचीन काल से आध्यात्मिक रहस्यों से प्रेरित है ,और इसका प्रमाण हमारे प्राचीन वेद ,ग्रन्थ,पुराण इत्यादि हैं । आध्यात्मिकता के कई गूढ़ रहस्यों को हमारे आध्यात्मिक  गुरुओं ने अपनी तपस्या के प्रताप से जाना है । आध्यात्मिकता के क्षेत्र म…

🎉🎉“निशान “🎉🎉

“ आऊँगा बहुत याद आऊँगा
   सफ़र में कुचैले निशान छोड़ जाऊँगा “
   सफ़र हो तो ऐसा ,
   राह भी अपनी है,
   मंज़िल भी अपनी
  कारवाँ की तलाश भी अपनी
  तलाश में चाह भी अपनी
  आह भी अपनी .....
  वाह भी अपनी ........
  जब बहारों के जश्न भी अपने
  तो पतझड़ और तूफ़ान भी अपने
  जज़्बातों के हालात भी अपने
  सफ़र भी अपना ।।
“  सफ़र करते -करते मुसाफ़िर हूँ
 भूल गया हूँ , अपने कारवाँ में
 घुल - मिल गया हूँ
 बेशक ये सफ़र है
 मैं मुसाफ़िर हूँ जाने से पहले
अपने निशान छोड़ जाऊँगा
आऊँगा बहुत याद आऊँगा
सफ़र में कूछ ऐसे निशान छोड़ जाऊँगा ।।



✍️“प्रयास”✍️

🎉🎉🎉🎉✍️✍️
                               नियमाते ज़िन्दगी में लुटाता है ,वो हर पल
                               ए मानव तुम सही राह तो चलो ,
                               रास्ते मुश्किल ही सही ,
                               मंज़िल पर पहुँचाता है वो ही
                               वो हमारे हर प्रयास में
                               हमारे विश्वास में है
                              हर मुश्किल हालात में है
                              मंज़िल दूर सही ,पर नामुमकिन
                              कुछ भी नहीं ,
                              चाँद पर पहुँचाता है वो ही
                             अन्तरिक्ष में नक्षत्र गिनवाता है वो ही
                             तू थोड़ा विश्वास तो रख
                             तेरे अन्दर से आवाज़ लगाता है वो ही
                             धरती पर आया है ,तो जीवन सुधार
                             मत रो - रो कर जीवन गुज़ार
                             तुम  धरती पर जीवन का आधार हो
                             अपने जीवन को सुधार तो सही
         …

“योग दिव्य योग शुभ संजोग “

“योग दिव्य योग शुभ संजोग “  ।।
—।।—————।।—————-।।
“संजोग से बनता है जब दिव्य योग
तब कट जाते हैं जीवन के सारे रोग”

योग ,यानि स्वयं पर नियंत्रण
मानसिक योग —-शारीरिक  योग

शारीरिक योग शरीर को स्वस्थ करता है । शारीरिक योग का स्वयं में बहुत महत्व है ।

स्वस्थ तन हो तो मन भी स्वस्थ रहता है ।
शरीर रूपी मिट्टी के दिये में ,दिव्य प्रकाश तभी
सुरक्षित रहेगा ,जब उसमें कोई खोट ना हो ।
“सहयोग यानि संग का योग  जब बनते हैं संजोग  कारण होता है ,योग  संग रहने का योग

योग भारतवर्ष को प्रदत्त
स्वयं सृष्टिकर्ता द्वारा प्राप्त
दिव्य प्रकाशमयी अनुपम भेंट है
शारीरिक एवम् मानसिक योग
संजीवनी अक्षय सम्पदा

तन और मन का संतुलन
है ,मनुष्य जीवन का शुभ संजोग
निरोगी तन ,संतुलित मन
यही है मनुष्य जीवन का शुभ संजोग ।
दिव्य खोज ,दिव्य योग ।

“सुनहरे पंख”

“ पिंजरों से निकल कर पंछी
     जब आजाद हुए ,सुनहरे अक्षरों में
        अपनी तक़दीर
     लिखने को बेताब हुए.....
     छूने को आसमान हम इस क़दर
     पंख फड़फड़ायेंग़े राहों की हर बाधा
     से लड़ जायेंगे ,आसमान में अपने घरौंदे
     बना आयेंगे ,नये इतिहास की नयी इबारत
     लिख जाएँगे किसी के जीने का मक़सद
     बन जायेंगे ।

   “अभी तो पंख फड़फड़ाये हैं थोड़ा इतराएहैं
   खिलखिखिला रहा है बचपन
  मुस्कराता बचपन”
 👫बचपन मीठा बचपन ,
       सरल बचपन
       सच्चा बचपन 👯‍♂️

  “ वो गर्मियों की छुट्टियाँ
    बच्चों के चेहरों पर खिलती
        फुलझड़ियाँ”

 “घरों के आंगनो में लौट आयी है रौनक़
सूने पड़े गली -मोहल्ले भी चहकने लगे हैं ।
बूडे दादा -दादी भी खिड़कियों से झाँक-झाँक कर
देखने लगे हैं , सुस्त पड़े चहरे भी खिल गये हैं
मन ही मन मुस्काते हैं , पर बड़पन्न का रौब दिखाते हैं
आइसक्रीम और क़ुल्फ़ियों की होड़ लगी है
ठंडाई भी ख़ूब उछल रही है
पानी -पूरी भी ख़ूब डुबकी लगा रही है
पिज़्ज़ा ,बरगर ,पस्ता भी सबको लुभा रहे हैं
चिंटू ,चिंकी ,सिद्धु ,निकी भी सब मस्त हैं
सपनों को सच करने को
बड़े बुज़र्गों से…

“ झगड़ा ताक़त नहीं कमज़ोरी है “

“झगड़ा ताक़त नहीं कमज़ोरी है जनाब “
सत्य,प्रेम ,करुणा सबको बाँध रखती है ,और एक जादूयी शक्ति है “।
“झगड़ा करने वाला हमेशा यह सोचता है कि,झगड़ा उसकी ताक़त है ।वह झगड़ा करके सबको चुप करा देगा और कर देता भी है ।
हाँ सच भी कुछ समय के लिये कुछ लोग झगड़े से बचने के लिये चुप भी हो जाते हैं ।
अब तो झगड़ा करने वाले की यह आदत ही बन जाती है ,वो सोचता रहता है यह जो मेरा हथियार है “झगड़ा “बहुत ताक़तवर है सबको चुप कर देता है ।

परन्तु जाने -अनजाने वो ग़लत सोच पल रहा होता है ,झगड़ा कभी भी ताक़त नहीं बन सकता ,झगड़ा एक ऐसा हथियार है जो दूसरे सेज़्यादा स्वयं का ही नुक़सानकर रहा होता है ।

झगड़े को छोड़कर ,अगर अपनी बात को नम्रता से और पूर्ण विश्वास से किसी के समक्ष रखते हैं तो उसका प्रभाव ही अलग होता है
वह प्रेमपूर्ण व्यवहाएक अमिट छाप छोड़ता है सामने वाले की मनःसितिथी पर ...
“ अतः झगड़ा एक ऐसा हथियार है ,जो दूसरे से ज़्यादा स्वयं का ही नुक़सान करता है ,फिर क्यो ना ऐसे हथियार का उपयोग किया जाये
जो सबसे पहलेस्वयं को सुरक्षित रखे ।
सच मानिये प्रेम से कही बात झगड़े से ज़्यादा प्रभावपूर्ण होती ह…

“ झगड़ा ताक़त नहीं कमज़ोरी है “

“झगड़ा ताक़त नहीं कमज़ोरी है जनाब “
सत्य,प्रेम ,करुणा सबको बाँध रखती है ,और एक जादूयी शक्ति है “।
“झगड़ा करने वाला हमेशा यह सोचता है कि,झगड़ा उसकी ताक़त है ।वह झगड़ा करके सबको चुप करा देगा और कर देता भी है ।
हाँ सच भी कुछ समय के लिये कुछ लोग झगड़े से बचने के लिये चुप भी हो जाते हैं ।
अब तो झगड़ा करने वाले की यह आदत ही बन जाती है ,वो सोचता रहता है यह जो मेरा हथियार है “झगड़ा “बहुत ताक़तवर है सबको चुप कर देता है ।

परन्तु जाने -अनजाने वो ग़लत सोच पल रहा होता है ,झगड़ा कभी भी ताक़त नहीं बन सकता ,झगड़ा एक ऐसा हथियार है जो दूसरे सेज़्यादा स्वयं का ही नुक़सानकर रहा होता है ।

झगड़े को छोड़कर ,अगर अपनी बात को नम्रता से और पूर्ण विश्वास से किसी के समक्ष रखते हैं तो उसका प्रभाव ही अलग होता है
वह प्रेमपूर्ण व्यवहाएक अमिट छाप छोड़ता है सामने वाले की मनःसितिथी पर ...
“ अतः झगड़ा एक ऐसा हथियार है ,जो दूसरे से ज़्यादा स्वयं का ही नुक़सान करता है ,फिर क्यो ना ऐसे हथियार का उपयोग किया जाये
जो सबसे पहलेस्वयं को सुरक्षित रखे ।
सच मानिये प्रेम से कही बात झगड़े से ज़्यादा प्रभावपूर्ण होती ह…

कोरा काग़ज़ है ,या हसीन ख़्वाब है ज़िन्दगी 🌸🌸

“यूँ तो कोरा काग़ज़ है ज़िन्दगी
  ये भी सच है ,कि कर्मों का
 हिसाब - किताब है ज़िन्दगी “

 “कोरा काग़ज़ है या हसीन ख़्वाब है
             ज़िन्दगी
दूर से देखा तो आफ़ताब है ज़िन्दगी
-                  -                      -
कहीं समतल कहीं गहरी खाई
तो कहीं पहाड़ सी है ,ज़िन्दगी “

  “पृष्ठ भूमि भी हमारे ही
  द्वारा सृजित है ।
  कर्मों पर ध्यान दे रे बन्दे
  जो आज तू करता है
 वही तेरा कल बनता है “


“ बड़ी कमबख़्त है ये ज़िन्दगी भी
 देखने वाले के लिये हसीन ख़्वाब
जीने वाले के लिए जंग है ज़िन्दगी”


“ किराये के मकान जैसी है
  ये ज़िन्दगी भी
  कब ख़ाली करनी पड़
  जाये कौन जानता है “

“दिया है,प्रकाश है ,साँस है
तभी तक आस है
वरना मिट्टी है ,और राख है “


 “ना शिकवा करता हूँ ,
ना शिकायत करता हूँ
मैं वो श्क्स हूँ जो बेरूखियों
के जहाँ में ,वफ़ा की इबादत करता हूँ “

“ज़िन्दगी के सफ़र में मुसाफ़िर
बनकर रहता हूँ ,
जीता हर लम्हे को हूँ
शिकवा -शिकायतों से दूर रहता हूँ “

“भाग्य को कोसना छोड़ दे बन्दे
तू स्वयं का भाग्यविधता है “




“मोहब्बत खुदा है “

“मोहब्बतों की डोर से बँधे हैं
        हम सब
मोहब्बत ना होती तो हम बिखर
 जाते तितर-बितर हो जाते “

“चाहतों की भी एक फ़ितरत है
चाहता भी उसे है ,जो नसीब में
     नहीं होता”

कहते हैं की मोहब्बत में इंसान खुदा हो जाता है
    खुदा हो जाता है शायद इसीलिए सबसे
             जुदा हो जाता है ।

“ना जाने क्यों लोग मोहब्बत को बदनाम
किया करते हैं ,मोहब्बत तो दिलों में पनपा करती है
         मोहब्बत के नाम पर क्यों ?
        क़त्ल ए आम किया करते हैं “

“मोहब्बत तो रूह से रूह का मिलन है
मिट्टी का तन सहता सितम है “

“मोहब्बत तो जलते हुए चिराग़ों
     में शमा बनकर रहती है ,
जितनी जलती है उतनी ही पाक
        हुआ करती है “

“मोहब्बत के चिराग़ों के हौसलें भी
क्या ख़ूब होते है , आँधियाँ आती हैं
तूफ़ान आते हैं सब स्वाहा हो जाता है
पर मोहब्बत के चिराग़ रूहों में बड़े शान से जलते
रहते हैं “

मोहब्बत ख़ुदा है तभी तो ज़माने से जुदा है
मोहब्बत खुदा की बखशी हुई नियामत है
जो हर किसी को नसीब नहीं होती ।

मोहब्बत की आग से जो ख़ुद को रोशन करता है
वो आबाद है ,परन्तु जो आग संग खेलता है
 उसको जलकर राख हो ही जाना पड़ता है ।









आओ अपने -अपने घरों की रौनक़ें बड़ायें “

👶👧🏼आओ अपने -अपने घरों
   की रौनेकें बड़ायें
   दीवारों पर लगे जाले हटायें
   धूल मिट्टी की परतें हटाएँ ।”

    🧚‍♀️खिलौनों से घर भर जाएँ
    गुड्डे-गुड़िया ,राजा -रानी की
    कहानियाँ सुने सुनायें🧜‍♀️
    कहीं रेडू चलाएँ ,
   लट्टु घुमाये ,लट्टु घुमा-घुमा कर
   सारी दुनिया के चक्कर लगायें
   धरती पर रेंगते -रेंगते बड़े हो जायें
   जिस धरती पर गिर -गिर के सम्भले
    सम्भलते -सम्भालते आज समाज को
   सम्भालने लगे ,आसमा की ऊँचाइयाँ छूने
   लगे हैं ,उस धरती माँ से जुड़े रहें
   आगे बड़े ,परन्तु आगे बड़ने की होड़ में
   अपनी माओं को ना भूल जायें
   एक जन्म देने वाली ,पालना करने वाली
   और एक धरती माँ
  इनका ना अपमान करें ,
  जिनकी ऊँगली पकड़ तुमने
  सम्भालना सीखा ,जिनकी शिक्षाओं
  ने तुम्हें अच्छे संस्कारों से सींचा
 उस माली को ना भूल जाना जिस धरती माँ
की गोद में गिर -गिर के सम्भले
उस माँ से जुड़े रहना
जाओ बच्चों आसमान की ऊँचाइयाँ छूना
परन्तु लौट के घर को आना
ये मतायें आज भी तुम्हारी राह देखती है
कोई फिर से मिट्टी के घर बनायें
माँ के हाथ की सुखी रोटी भी प्रसाद बन जाये ।












“ कन्या दान ,अभिमान ,सम्मान “

🎉💫घर में शादी का माहौल था , चार दिन बाद बहन की शादी है ,भाई को चिंता हो रही थी कहीं कोई कमी ना रह जाये ,
जबकि भाई अपनी बहन से दो साल छोटा था ,लेकिन बहन की शादी के समय था ,इसलिये शायद थोड़ा ज़्यादा समझदारी की बातें करने लगा था ।

  🎉🎉  घर पर दिन  भर मेहमानों का आना जाना लगा रहता था,कभी कोई चाचा ,मौसा ,ताऊजी सभी को अलग -अलग ज़िम्मेदारी सौंप दी गयी थी  ,सभी पूरी तन्मयता से बेटी की शादी की तैयारियों में लगे हुए थे ।
रात्रि का भोजन हुआ था ,सभी बैठे थे , कौन क्या पहनेगा सभी अपनी -अपनी पसन्द बता थे ।
तभी पापा जी बोले ,तुम सबको अपनी -अपनी पड़ी है ,और भी बहुत काम हैं , कितने लोगों को बुलाना है ,फ़ाइनल लिस्ट तैयार करो ,किसको क्या देना है सब लिखो , तभी भाई बोला किसको क्या दोगे बस देते रहो।
पापा जी बोले बेटा बात देने की नहीं होती ,बात तो शगुन की है ,ये सब रीत -रीवाज हैं इन्हें निभाना ही पड़ता है ।
भाई थोड़ा भावुक हो गया ,बोला पापा नहीं पापा  हम अपने जीवन की अनमोल चीज़ अपने दिल का टुकड़ा दे रहे हैं
,मैं अपनी बहन आप और मम्मी अपनी बेटी दे रहे हैं ,अपना सब कुछ तो दे रहे हैं ,अपना सब कुछ अपने कले…

“आग है लगी हुयी “

जिधर नज़र दौड़ायी
 नज़र आया बस कूड़ा ही कूड़ा
 कूड़े के ढेर पड़े हुए हैं
 जगह -जगह ......
 आग लगी हुई है
 चमकते चेहरों पर जब
 नज़र टिकती है ........
तब नज़र आती है एक आग
आग विचारों रूपी
कूड़े के ढेरो की आग
कूड़ा बस कूड़ा ही कूड़ा
जब गहरायी में उतरा तो
नज़र आयी गंदगी ही गंदगी
गन्दगी में पनपते ज़हरीले जीवाणु .....
कीचड़ !कीचड़ में खिलते हुए नक़ली कमल
दिखावटी कमल ,सुगन्ध रहित, पुष्प
उजले वस्त्र,मैले मन
खिलते बगीचों की गहरायी में दलदल
का अन्धा कुआँ
अंतहीन ,लोभ ,भ्रष्टाचार का दलदल
चंद पलों की आनन्द की चाहत में
अँधेरी गुमनाम गलियों में भटकता मानव
बाहर भी कूड़ा , मन के अंदर भी कूड़ा
सिर्फ़ तन को चमकाता ,सजता ,सँवरता
आज का मानव ,बस -बस करो
साफ़ करो ये गन्दगी,
अमानवीयता के अवग़ुणो को जला कर राख करो
बाहर  और भीतर सब साफ़ करो ।



“ ना जाने क्यों भटकता रहता हूँ “

दिन भर दौड़ता रहता हूँ
सुकून की तलाश में ....

सुख की चाहत में
दर्द से सामना करता रहता हूँ
दुखों से लड़ता रहता हूँ

आधी उम्र बीत गयी
सुखों को सहेजने की कोशिश में
जो सुख -शान्ति मिली भी
उन्हें भी ढंग से जी नहीं पाया

सारी उम्र सहेजता रहा ख़ुशियाँ
उन्हें जीने की चाह में
मैं दर्द जीवन में जीवन जीता चला गया

ये मुस्कराहट भी कितने सुन्दर भाव है
चेहरे पर आते ही सारे दर्द छिपा लेती है

अब मैं आज जो है ,उसको जीना सीख गया हुआ हूँ
जो वर्तमान है वही ख़ूबसूरत है ,सत्य है
भविष्य की चिंता में अपना आज खराब नहीं करता
अपने आज को ख़ूबसूरत बनाओ
कल ख़ुद ब ख़ुद ख़ूबसूरत ख़ुशियों भरा हो जाएगा ।



🥀"अक्षय अनन्नत सम्पदा "🥀☘️🌳🌳

🌍🚶‍♀️🏃🏻‍♀️जीवन - मनुष्य और संसार  ............
          ये सृष्टि , सृष्टि में अनेकों ग्रह ....🌕🌝🌒🌏
   इस सृष्टि का सबसे सुंदर ग्रह "पृथ्वी "
परमात्मा ने जब इस सृष्टि की रचना की ,हम मनुष्यों के लिये जो परमात्मा के ही अंश हैं यानि परमात्मा की संताने .....जिस प्रकार एक माता -पिता अपनी संतानों के सुंदर जीवन के लिए व्यवस्था करते हैं ..........
परमशक्ति ,परमात्मा द्वारा पृथ्वी नाम के इस ग्रह को असंख्य सुविधाओं से भर दिया गया  ,प्रकृति में
इतनी सुन्दर व्यवस्था की गयी है ,कि प्रकृति की अनमोल सम्पदाओं के भण्डार कभी ख़ाली नहीं हो सकते ।

सोचने -समझने की अनुपम भेंट ,जिसे हम बुद्धी कहते हैं ।
अच्छा और बुरा परखने की शक्ति .....
प्रकृति की अनमोल सम्पदा, धरती पर परमशक्ति  द्वारा असंख्य खनिज पदार्थों की देन ......

"अविष्कार आव्य्श्क्ता की जननी है "प्रग्रति उन्नति का सूचक है ।
परंतु उन्नति के नाम पर प्रकृति से इतनी अधिक छेड़छाड़ भी उत्तम नहीं कि प्रकृति का स्वरूप ही बिगड़ जाये ।

मेरा आज का विषय है , जबकि प्रकृति द्वारा इस सृष्टि पर सम्पूर्ण व्यवस्था की गयी है इसके बावजूद …

" प्रकृति अनमोल सम्पदा "

🥀🥀  ☘️🍀🌲☘️
    मीठी -मीठी सी शीतल हवाओं का झोंका
    सर्दी के मौसम को अलविदा कहती
    सूर्य की तेज़ ,तपिश का एहसास
    प्रातःक़ालीन शांत वातावरण में
    प्रकृति का आनंद लेता मन
    हरी-भरी घास का श्रृंगार
    करती ओस की बूँदे
    शांत वातावरण
    पक्षियों के चहकने
    की मीठी आवाज
    मानों वातावरण में
    गूँजती संगीत की मधुर तान
    प्रकृति स्वयं में ही सम्पूर्ण
    स्वयं का शृंगार करती 🎉🎉
    दिल कहे बस यहीं ठहर जाये पग
    भागती-दौड़ती ज़िन्दगी से अब थक गया है मन
    हरी -भरी घास पर बैठ कर यूँ ही बीत जाए जीवन
   जाने क्यों भगता -दौड़ता रहता है मन
   प्रकृति में निहित है जीवन का सम्पूर्ण आनंद
   प्रकृति से ना छेड़-छाड़ करो
   उसमें ना ज़हर घोलो
   प्रकृति है अमुल्य सम्पदा
  अनमोल धरोहर प्रकृति का संरक्षण करो ।🌸🌹🥀🥀☘️🍀



🎉🎉🎉🌺🌺 🎉" हाँ मैं औरत हूँ 🎉🌺🌺🏡☕️🏡📖📖🌹🌹🎉🎉

🌺 हाँ मैं औरत हूँ 🌺
मुझ बिन धरती का
अस्तित्व अधूरा है ,
कोई मुझे कुचलता है
तो इसमें मेरा क्या दोष .......
निर्दयी हैं वो ,पापी हैं वो 🌺
क्रूर हैं वो ,
रावण या कंस से भी घिनौने हैं वो
जो अपने ही बाग़ों में खिले गुलाबों
को , कलियों को कुचलते हैं
हाँ मैं औरत हूँ मुझसे ही महकता
सरा जहाँ है ,मैं ही तो सारे जहाँ की 🌺
रौनक़ हूँ ।🌺
मैं स्वयं सिद्धा हूँ ,स्वयं में सम्पूर्ण हूँ ।🌸
मुझमें आत्म बल की सम्पूर्णता है 🎉🎉

🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

रंगों के त्यौहार होली की शुभकामनायें 🌺🌹

💐 होली की शुभकाममनाओं संग
  आओ आज हम रंगो का त्यौहार होली
  मनायें ।🥀

🌺  रंग ऐसा लगायें इस होली की वो
  रंग कभी ना छूटे ।
  परस्पर प्रेम की ऐसी पिचकारी चलायें
  कि दिलों के सारे मैल धूल जायें ।
  भाईचारे के रंग में सब रंग जायें ।🌺

  सब धर्मों का मर्म एक ,मक़सद एक ,🎉
  जो प्रेम ,अमन और शांति का पाठ पढ़ायें ।

 अमानवीयता के भद्दे रंगों से स्वयं को ना
 भद्धा और अभद्र बनाये ।
🌸🌸 आओ इस होली रंगों के त्यौहार में अमन -चैन
संग भाईचारे के रंग में सब रंग जाये 🌸🌸।  

🌹🌺🥀ऐसा रंग चढ़े इस होली कि विश्व कौतुम्बकम
का सपना सच हो जाये ।🥀🌹🌺🌸
आप सभी को होली की शुभ कामनाए ।🌸🌺🌹🥀🎉🎉


"अरमानों का तेज़ाब"

डरता हूँ ,कहीं मुझमें पनपता
तेज़ाब मुझे ही स्वाहा ना
कर डाले ।
तेज़ाब मेरे अधूरे सपनों के
फड़फड़ाते अरमानों का तेज़ाब
अरमानों के पंखों में
सपनों की उड़ान
फड़फड़ाते पंखों से
जब -जब भरने लगता हूँ उड़ान।

मध्य में टकराते हैं ,कई व्यवधान
खोजता हूँ कई समाधान

फिर भी मंज़िले नहीं होती आसान
दिल में जलता अरमानों का तेज़ाब
जो करता रहता है ,हर क्षण मुझे बेताब
जलता रहता हूँ ,अपने ही अरमानों के
तेज़ाब में ,
डरता हूँ ,
कहीं इस तेज़ाब से मेरा
ही ना घर जले ,यह तेज़ाब मुझे ही ना छले
अपने आरमानों के पंखों को
धीमे -धीमे ही सही आगे बड़ाता रहता हूँ
धीमे -धीमे ही सही बहुत आगे निकल आया हूँ
अरमानों के तेज़ाब को अब थोड़ी ठंडक मिलने
लगी है ।
आत्म संतुष्टि का धन जब से मैंने पाया है
मेरा जीवन बन गया शीतल छाया है
अब तेज़ाब से मुझे डर नहीं लगता
क्योंकि अब  अनियंत्रित अरमानों का आब
समा चुका है ,समुन्दर की शांत लहरों में ।











"परिवर्तन शाश्वत है "

परिवर्तन प्रकृति का नियम है।
परिवर्तन ना होने पर जड़ता का
अनुभव होने लगता है ।
जड़ता में सुन्दरता का क्षय होना स्वाभाविक है ।

मौसम में परिवर्तन इसका शाश्वत उदहारण है ।
मौसम में परिवर्तन होता है तो ,प्रकृति खिलती है
फ़सल लहलहाती है ।

 फलतःपरिवर्तन शुभ का संकेत है
 वस्तुतः परिवर्तन सही दिशा में हो ।

 परिवर्तन में नवीनता भी निश्चित है
 नवीनता का स्वागत करें ,मर्गदर्शन करें

आवयश्क नहीं जो कठिन है ,जटिल है वही
सही है ।
कभी -कभी सरलता से भी अच्छे और महत्वपूर्ण
प्रश्न हल हो जाते हैं , सरलता से कही बातें भी उत्तम
दर्जे की हो सकती हैं ।
सदैव एक जैसा रहने पर जीवन बोझिल
सा लगने लगता है
जीवन में जड़ता आ जाती है
परिवर्तन सही दिशा में शुभ संस्कारों के संग
है तो ,उत्तम संकेत हैं ।

सबकी स्वयं की सोच है
किसी को सरलता से मिलता है
किसी को कठिनता से......
कभी कभी सरलता से भी बड़े -बड़े अविष्कार किए जाते हैं
ऊँची और सफल मंज़िलों को प्राप्त किया जा सकता है ।

परिवर्तन को स्वीकार करो
स्वागत करो ,सम्मान करो ,मर्गदर्शन करो ।।

मोहब्बत किसी भी मनुष्य का मूल स्वभाव है "

🎉🎉🎉🎉🌺🌺🌺🌺🌸🌸🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷😊

"मैं मोहब्बत हूँ
किसी भी मनुष्य का मूल स्वभाव हूँ "

मैं मोहब्बत जीती हूँ 😍
एहसासों में ,जज़्बातों में

मोहब्बत का कोई मजहब नहीं
मोहब्बत तो हर दिल की भाषा है ❤️
शब्द नहीं ,अर्थ नहीं ,
निस्वार्थ समर्पण है
दुआओं में ,दर्द में
क्रन्दन में ,क्रोध में
उम्र का बन्धन नहीं
रिश्तों की मोहताज नहीं
उपहार नहीं ,व्यापार नहीं
भावों में जज़्बातों में
मैं मोहब्बत हूँ ,मैं किसी भी
मनुष्य का मूल स्वभाव हूँ
मोहब्बत से ही सींचित
प्रफुल्लित रचना रचता संसार है
विश्व कौटुमबकम का पढ़ाता पाठ हूँ
मैं वो गीत हूँ ,जिसे हर कोई गुनगुनाता है
साज अलग हैं , परन्तु सुरों पर सजते गीतों के
मक़सद वही हैं , बोलना हर कोई चाहता
मोहब्बत की भाषा है ।
साजों-साज से प्रवाहित तरंगों का
मक़सद मोहब्बत है ।
जीवन की दौड़ में मोहब्बत वो दवा है
जो हर रिश्ते पर मरहम लगा उसको सवाँरती है ।

मोहब्बत ही तो हर मनुष्य का वास्तविक स्वभाव है ।