' हर -हर गंगे '
मै हूँ ,भारत की पहचान ,
भारतवासियों का अभिमान ,मा गंगा कहकर करतें हैं 
सब मेरा सम्मान ,
सबके पाप पुण्य मुझे ही अर्पण ,मै हूँ निर्मलता का दर्पण ,
हिमालय की गोद से निकली ,गंगोत्री है मेरा धाम ,
शिव की जटाओं से नियन्त्रित ,प्रचण्ड वेग ,पवित्रतम गंग धारा। 
सूर्य के तेज से ओजस्वी ,चन्द्रमा की शीतलता लिए ,चांदी सी ,
चमकती ,पतित पावनी पापों को धोती ,गतिशीलता  ही मेरी पहचान  
भक्तों की हूँ ,मई आन बान और शान ,
गंगा जल से पूर्ण होते हैं सब काम ,
भगीरथी सुरसरि गंगे मैया इत्यादि हैं मेरे कई नाम ,  
भक्त गंगे मैया गंगे मैया ,कहकर करते हैं जीवन नैया पार 
युगों युगों से करती आई, भक्तों के जीवन का उद्धार 
अपने भक्तों के पाप पुण्य सब मुझे हैं स्वीकार।

आओ अच्छा बस अच्छा सोचें

 आओ कुछ अच्छा सोचें अच्छा करें , अच्छा देखें अच्छा करने की चाह में इतने अच्छे हो जायें की की साकारात्मक सोच से नाकारात्मकता की सारी व्याधिया...