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November, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

*मानवता की पुकार*

बहुत फैल चुका है समाज में जंगलराज जंगली जानवरों का साम्राज्य खूंखार भेड़ियों की दरिंदगी तबाह हो रही है कई बेटियों की जिंदगी असहनीय है यह दर्द मानवता का निभाना होगा फर्ज सर पर चढ़ रहा है बहुत कर्ज अब पूरी करनी होगी अर्ज जंगली भेड़ियों का करना होगा अंत उठाओ तलवार और कर दो वार मानवता की पुकार इंसानियत कर रही है ललकार 😠😡

*मीठा,सरल ,सीधा बचपन*

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मीठा,सरल,सीधा बचपन
बच्चे थे तो अच्छे थे आसमान से भी ऊंचे सपने थे दादी,नानी से किस्से सुनते थे
वीरों के पराक्रम और
महापुरूषों प्रेरक प्रसंग
नैतिकता का देते परिचय
बन जीवन का प्रेरणास्रोत
उन जैसा बनने को करते प्रेरित .....  स्वर्ग से अप्सराएं आती थीं
परियां जादू की झडियों
 से मन की मुरादी बातें पूरी करती थीं चंदा को मामा कहते थे  पक्षियों की तरह चहचहाते थे ऊंची -ऊंची उड़ाने भरते थे खेलकूद ही अपना जीवन था भविष्य तो बड़ों का सपना था दोस्ती भी खूब निभाते थे  कट्टी-अप्पा से रूठते मनाते थे बचपन में बड़प्पन दिखाकर सबको खूब हंसाते थे  सबके मन को भाते थे  शायद तब हम सच्चे थे  अक्ल के थोड़े कच्चे थे  पर बच्चे थे तो अच्छे थे  मैं मुझमें मेरा बचपन बेफिक्र
 होकर जीवन भर जीना चाहता हूं

शब्दों की कारीगरी

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**आत्मविश्वास**

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आत्मविश्वास Like  Rate आत्मविश्वास
© Ritu Asooja Inspirational  1 Minutes 206  5 प्रतिस्पर्द्धा प्रतिस्पर्द्धा के युग में दौड़ता भागता मनुष्य सुधारने को अपना भविष्य अपना वर्तमान दाव पर लगाता