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तुम ना बदलना मेरे अपनों

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बदलेंगी तिथियां बदलेंगे वर्ष
बदलेंगे दिन बदलेंगी रातें
पर तुम ना बदलना
मेरे अपनों तुमसे मेरे जीवन
में प्रेमरस ...
शाश्वत प्रेम की धाराओं में
जीवन की नव नूतन आशाओं
से रोशन रहे जीवन का हर पल
सहर्ष ...
नई खुशियों की नई तारीखें
लेकर आए यह वर्ष

शुभ हो सबके लिए नववर्ष ...

नई तारीखें*******

अब वक़्त आ गया है
 बदल ही दूंगा मैं पुराने
ख्वाबों को नए ख्वाबों में
पुरानी तारीखों को नई तारीखों में
नए इतिहास की नई तस्वीर बनाने को
सुलझा देना है  पुराने सुस्त पड़े
कई मुद्दों को आजाद करने के लिए....

**वक़्त तो वक़्त है
जैसा है उसमें ही
शुभ कर्मों के अंकुर उगा लो
वक़्त के इंतजार में वक़्त जाया ना करो
वक़्त रुकता नहीं किसी के लिए
वक़्त रहते वक़्त की कदर करो
गिनती की सांसों पर कुछ तो रहम करो
बीते वर्षों की और उम्र की
वापिसी नहीं होती
ये तो बस बड़ती हैं
और पल-पल घटती हैं
और अलविदा कहकर
नयी तारीखें लिखती हैं।


स्मरणीय यात्रा

यात्रा यानि जीवन को एक नई ऊर्जा नया उत्साह प्रदान करना। रोजमर्रा की भागती -दौड़ती जिन्दगी ैऔर वही हर दिन ैएक जैसे जीवन प्रक्रिया ,कभी -कभी नीरसता और थकान का कारण बन जाती है। याद है मुझे मेरी वो यात्रा जब हम सब परिवार वाले एकत्र होकर माता वैष्णानों देवी के दर्शनों को गए थे ,लगभग बीस लोग थे हम सब परिवार वाले । हेमकुंड एक्सप्रेस ट्रेन से हम लोग जम्मू पहुंचे ,जम्मू से हम कटरा तक के लिए एक बस में बैठ गए रात भर ट्रेन का सफ़र किया था कटरा तक का रास्ता भी थोड़ा पहाड़ी और घुमाओ दार था हम लोगों को नींद पूरी ना होने के कारण सभी लोग ट्रेन में नींद के झोंकों में एक दूसरों के ऊपर गिर रहे थे कभी कोई एक को जगाता कभी कोई दूसरे को लगभग डेढ़ घंटे के बाद हम कटरा पहुंच गए । कटरा पहुंच कर हमने एक होटल में कमरे लिए अपना सारा समान कमरों में पहुंचाया थोड़ी देर आराम करने के बाद हम सब तैयार होकर हम लोग होटल से निकले ,आखिर भूख भी लग रही थी एक अच्छे से रेस्टोरेंट में बैठकर हमने नाश्ता किया सबने अपने मनपसंद का खाना खाया मैंने तो वहां के राजमा और परांठा खाया जम्मू के राजमा का स्वाद बहुत ही लजीज होता है । अब…

*जीवन मूल्य*

जीवन मूल्यों के उच्च संस्कारों के आदर्शों को धारण करके व्यक्तित्व में निखार आता है।
लेबल लगे उत्पादों से कोई बड़ा नहीं होता यह सिर्फ भ्रम पैदा करता है बड़ा होने का लेबल लगे मंहगे उत्पादों तो पुतले की भी शोभा बढ़ाते हैं।
व्यक्तित्व में निखार आता है सादगी से, सत्यता से ,विनम्रता से परस्पर प्रेम से.... चेहरे पर मेकअप लगा कर तो सिनेमा में लुभाया जाता है।
धन -दौलत को सर्वोपरि समझने वालों सम्मान दो उस शिक्षकों को, शिक्षा को जिसके ज्ञान से तुम्हें ऊंचे पदों प्राप्त हुए।
सम्मान तो वास्तव में उच्च जीवन मूल्यों और उच्च आदर्शों का और नैतिक मूल्यों का ही होता है ,जो जीवन को सर्वसंपन्न कराती है मनुष्य को देखो साधनों को औकात समझ कर इतराते फिरते हैं।

* भारतीय संस्कृति *

*भारतीय संस्कृति एक अमूल्य धरोहर*
    भारत मेरी जन्म भूमि मेरे लिए मां तुल्य पूजनीय है विविध संस्कृतियों विविध धर्मों को स्वयं में समेटे हुए भारतीय संस्कृति अनेकता में एकता का प्रतीक है।
हिन्दू ,सिख,जैन,मुस्लिम,ईसाई आदि कई धर्मों का पालन अपनी -अपनी परम्पराओं से करते हुए भी हम सब हिन्दू हैं हिदुस्तानी हैं ।
भारतीय संस्कृति हमें हर धर्म का सम्मान करना सिखाती है।
रंगों का त्यौहार होली हर रंग में घुलमिल जाने का त्यौहार है ।
दीपावली का त्यौहार प्रकाश उत्सव यानि जीवन के अन्धकार को दूर करना अन्धकार जो मनुष्य मन के भीतर अज्ञान का अन्धकार का अंधेरा है उसे दूर करके सब और ज्ञान का प्रकाश फैलाने का त्यौहार है ।
हम भारतीय जितने उल्लास से होली, दीवाली मनाते हैं उतना ही उत्साह ,अन्य धर्मों के त्यौहारों के मौके पर भी दिखाते हैं ,क्योंकि हम भारतीय प्रस्पर प्रेम और अपनत्व की खेती करते हैं ,भेदभाव, छल -कपट से हम कोसों दूर रहते हैं ।
हम भारतीयों के लिए हर दिन उत्सव है ।
 हां आधुनिक समाज को संदेशा है जितना मर्जी आप पाश्चात्य संस्कृति को अपनाओ  परंतु अपना भला ,बुरा देखकर अपनी भारतीय संस्कृति और सभ्यता को …

डर किस बात का ....

अमन:- अरे भाई क्या कर रहे हो ,इतना दंगा, फसाद  तोड़-फोड़ क्यों और किस लिए .....

 अमान :- देश में नागरिकता बिल आया है सुना है उससे देश की जनता को बहुत परेशानियां झेलनी पड़ेगी देश को नुकसान होगा ।

अमन:- देश को नुकसान वो भी नागरिकता बिल से ऐसे कैसे हो सकता है सरकार तो चाहती है जितने भी शरणार्थी हैं उनको यहां की नागरिकता दे दी जाए और जो नहीं लेना चाहते नागरिकता तो वो यहां रहने के नियमों का पालन करें ...

अमान:- नहीं -नहीं देश में इतनी हिंसा हो रही है कोई तो वजह होगी ।

अमन:- वजह है ,जानकारी का अभाव ,पहले अच्छे से समझो इस बिल में है क्या फिर ......करना जो ठीक लगे ,कुछ विपक्षी लोगों के भकने मात्र से चिंगारी लगाई जाती है ,और वो हिंसा की चिंगारी इतने बड़ी हिंसा का रूप ले लेती है।

अमन :-अच्छा ये बताओ तुम क्या चाहते हो।

अमान:-मैं कुछ नहीं बस सब लोग अच्छे से अमन और चैन से रहें ।

अमन :-अच्छा ये बताओ क्या तुम स्वयं को भारत का नागरिक मानते हो।

अमान:- हां बिल्कुल मैं भारत में जन्मा ,मेरे दादा, पिताजी सब पहले से ही यहीं पर रहते हैं ,उनका पुश्तैनी कारोबार है और शहर में लोग हमारे परिवार की बहुत इज्जत भी…

*दिखावा*

नए में  शुनभागमन करना था तो कोई शुभ कार्य भी करना था, इसलिए हमने *मां जगदम्बा माता रानी* के जागरण का आयोजन किया था ।
 सभी रिश्तेदारों सगे-संबंधियों को और मित्रों को न्योता दिया गया था ।  रात्रि जागरण सर्दियों का मौसम सभी व्यवस्था यथोचित हो आखिर हमारे अतिथि हमारे देव होते हैं   और उनका ध्यान रखना हमारा कर्तव्य, अपनी और से हमने सभी व्यवस्थाएं अच्छे से सुनियोजित की थीं।  लगभग सभी अतिथि मातारानी के जागरण में उपस्थित हुए जिन्हें हमने बुलाया था सभी ने बहुत उत्साह पूर्वक हिस्सा लिया सब बहुत प्रसन्नचित्त थे की उनका स्वागत अच्छे से हुआ और नए घर की बधाइयां देते हुए घर सुन्दर बना है उपमा देते रहे ।  अगला दिन था सब कुछ मातारानी का जागरण सभी कुछ अच्छे से हो गया था मैंने मातारानी को शुक्रिया अदा किया ।  आखिर एक परम्परा और निभानी थी कौन -कौन लोग आए थे क्या-क्या उपहार लाए थे देखने का सिलसिला शुरू हुआ ,लगभग सभी मेहमान आए थे जिनको हमने बुलाया था । तभी एक एक कीमती उपहार पर नजर पड़ी ... अरे ये मेरा बचपन का मित्र है आज बहुत बड़ा आदमी बन गया है,फिर भी इसका बड़पन्न है ये हमारे घर  आया ये मेरा मित्र बचपन …

*मानवता की पुकार*

बहुत फैल चुका है समाज में जंगलराज जंगली जानवरों का साम्राज्य खूंखार भेड़ियों की दरिंदगी तबाह हो रही है कई बेटियों की जिंदगी असहनीय है यह दर्द मानवता का निभाना होगा फर्ज सर पर चढ़ रहा है बहुत कर्ज अब पूरी करनी होगी अर्ज जंगली भेड़ियों का करना होगा अंत उठाओ तलवार और कर दो वार मानवता की पुकार इंसानियत कर रही है ललकार 😠😡

*मीठा,सरल ,सीधा बचपन*

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मीठा,सरल,सीधा बचपन
बच्चे थे तो अच्छे थे आसमान से भी ऊंचे सपने थे दादी,नानी से किस्से सुनते थे
वीरों के पराक्रम और
महापुरूषों प्रेरक प्रसंग
नैतिकता का देते परिचय
बन जीवन का प्रेरणास्रोत
उन जैसा बनने को करते प्रेरित .....  स्वर्ग से अप्सराएं आती थीं
परियां जादू की झडियों
 से मन की मुरादी बातें पूरी करती थीं चंदा को मामा कहते थे  पक्षियों की तरह चहचहाते थे ऊंची -ऊंची उड़ाने भरते थे खेलकूद ही अपना जीवन था भविष्य तो बड़ों का सपना था दोस्ती भी खूब निभाते थे  कट्टी-अप्पा से रूठते मनाते थे बचपन में बड़प्पन दिखाकर सबको खूब हंसाते थे  सबके मन को भाते थे  शायद तब हम सच्चे थे  अक्ल के थोड़े कच्चे थे  पर बच्चे थे तो अच्छे थे  मैं मुझमें मेरा बचपन बेफिक्र
 होकर जीवन भर जीना चाहता हूं

शब्दों की कारीगरी

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**आत्मविश्वास**

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आत्मविश्वास Like  Rate आत्मविश्वास
© Ritu Asooja Inspirational  1 Minutes 206  5 प्रतिस्पर्द्धा प्रतिस्पर्द्धा के युग में दौड़ता भागता मनुष्य सुधारने को अपना भविष्य अपना वर्तमान दाव पर लगाता

उपहार में अपनी मुस्कान दे आया 😀😄😀😃😀😀😃 .......

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उपहारों की होड़ लगी थी
कीमती से कीमती उपहारों
का आदान -प्रदान हो रहा था
मुझे भी देना था कोई उपहार
साधारण नहीं ,सामान्य भी नहीं
अद्भुत,अतुलनीय ,बेशकीमती
उपहारों की खोज बीन में मैंने बहुत
समय गवांया फिर भी मुझे कुछ ना
समझ में आया
अब कहां से और
क्या लाता उपहार
उपहार ने बिगाड़ा मेरा व्यवहार
मैं तो भूल बैठा अपना संस्कार
अब कहां से लाऊं अनोखा उपहार
सब कुछ लग रहा था बेकार
अब किसी चमत्कार का था इंतजार
आखिर जश्न का समय आ गया
मैंने शुभकामनाओं का टोकरा
लुटाया , गले लगाया
 उपहार में अपनी मुस्कान दे आया सारा माहौल खुशनुमा बना आया उपहार में अपना सर्वश्रेष्ठ दे आया ।




*शब्दों ने मुझे संवारा*

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*दिलों में प्रकाशित परस्पर प्रेम की दीपावली * शुभ दीपावली*

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*इस दीपावली दिलो में भी
 सकारात्मक सोच का दीपक जलाएं
 दीपोत्सव
दीपों का उत्सव
दीपों के प्रकाश का
भव्य भ्व्यतम था नज़ारा
मानों स्वर्ग को धरती पर हो उतारा

प्रकाश ही प्रकाश
तिमिर का अंश मात्र भी नहीं
स्वछता नवीनता और प्रकाश
का अद्भुत जलवा
फिर भी मेरे मन के कोने
में कहीं कोई कश्मकश थी बाकी
मन में छुप कर बैठी थी उदासी
शिकवे -शिकायतों का संसार
तभी दीपावली पर स्वच्छता
नवीनता और प्रकाश का तात्पर्य
ज्ञात हुआ
 मैंने मन को ना किया था स्वच्छ
पुरानी चीजों यानि पुराने शिकवों को
ना था बाहर  निकाला, तत - क्षण
मन से पुरानी शिकायतों को बाहर
 निकाल कूड़े दान में दे डाला
नए शुभ सकारात्मक विचारों से
मन में किया उजाला
अब दीपावली का तात्पर्य समझ में आया
अब मन के भीतर और बाहर सब और था उजाला बस उजाला .....




*दीपोत्सव *

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* फितरत*

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**इंसान की फितरत ही ऐसी है
चाहता भी उसे ही है जो उसे
नसीब नहीं होता
चांद की दूरियां उसकी और अपनी
मजबूरियां सब जानता है फ़िर भी रब से
दुआओं में उसको को ही मांगता है
दिल में आस का दीपक जलाए
जिन्दगी भर जलता सिर्फ जलता और
सुलगता ही रहता है **

 *अक्सर देर हो जाती है
कुछ मिनटों का रास्ता
घंटों में तय होता है
नहीं चाहता कहीं रुकना
फिर भी ना जाने क्यों घंटों रुक जाता हूं
उलझ जाता हूं भटक जाता हूं
शुक्र है देर से ही सही लौट कर
घर पहुंच ही जाता हूं **

प्रेम की महक

प्रेम की महक
भी होती है
प्रेमियों के चेहरों पर
मुस्कराहट के रूप
में खिलती है
लब ख़ामोश
ख़ामोश निगाहें
बोलती हैं
ख़ामोश अदाएं
बहुत की वफ़ायें
कभी तो बोलो
कुछ तो राज खोलो
लबों को थोड़ा हिलाओ
लबों की पंखुड़ियों से
कुछ तो पुष्प ए गुलाब
बिखराओ ,जो दिल में
है उसे कभी तो जुबान पर लाओ
यूं नहीं ख़ामोश रहा करते
दिल के राज नहीं छुपाया करते
ये जो गंभीरता की छवि
बनाए बैठे हो दर्दे दिल को
दबाए बैठे हो  इसपर से
पर्दा हटाओ थोड़ा मुस्कराओ
दिल में जो पर परवाह के रूप में
प्रेम छिपाए   बैठे हो
उसमें थोड़ी मिश्री मिलाओ
प्रेम के इत्र से माहौल को
मेहकाओ .....






*अनोखा प्यार *

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*आव्यशक नहीं जो सामने है वो सत्य ही है किसी भी फल की पहचान ऊपरी परत हटाने पर ही पता चलती है *      यार तू रहने दे ,मैं इस दुनियां में अकेला था ,और अकेला ही ठीक हूं मेरा इस दुनियां में कोई नहीं।
   मेरी मां तो पहले ही इस दुनियां से चली गई थी और मेरा पिता वो तो जीते जी ही मेरे लिये बहुत पहले ही  मर गया था ।
जब मैं आठ साल का था मेरे बाप को शौंक चड़ा था मुझे तैराकी सिखाने का ......
क्या कोई पिता अपने बच्चे को ऐसी तैराकी सिखाता है , धकेल दे दिया था मुझे स्विमिंग पुल में और छोड़ दिया था अकेला मरने के लिए,मैं चिल्ला रहा था पापा मुझे निकालो मैं मर जाऊंगा मुझे तैरना नहीं आता है पर मेरा पापा टस से मस नहीं हुआ ,आखिर दस मिनट बाद बहुत मशक्त करने के बाद मैंने हाथ -पैर मार के तैरना ही सीख लिया।
  वैभव बोला हां और आज तू तैराकी चैंपियन भी है और कई अवार्ड भी ले चुका है,जानता है इसके पीछे कौन है ,तेरे पिताजी अगर उस दिन तेरे पिताजी तुझे अकेला ना छोड़ते तो तू आज तैरना ना सीख पाता और इतना बड़ा चैंपियन ना बनता ।
 अरे विशिष्ट अपनी आंखो से देख, अपने चाचा की बनाई बातों की झुठी पट्टी हटा ,गांधारी मत बन आंख…

कुछ तो है ( कश्मकश)

या तो मैं किसी को समझ नहीं पाता
या कोई मुझे समझ नहीं पाता
कुछ तो खामियां होंगी
हममें भी यूं ही कोई किसी
को ंनजरअंदाज नहीं करता
या तो वो मेरी पहुंच से बहुत ऊपर हैं
या फिर मैं उनकी समझ से बाहर
ये समझने ना समझने के खेल में
बड़ी कश्मकश है ,किस के मन में
क्या चल रहा है समझ नहीं आता
किसी को समझो कुछ
और असली चेहरा कुछ और ंनजर आता है
आईने के सामने तो हर कोई
स्वयं को स्वांरता है
जो आईने में ंनजर नहीं आता
किसी भी मनुष्य का चरित्र
उस पर क्यों नहीं ंनजर डालता
जाने क्यों मनुष्य स्वयम के चरित्र
को नहीं निखारता
कहते हैं मन के भाव चेहरे पर
झलक जाते हैं , फिर भी मनुष्य
आत्मिक सौंदर्य पर क्यो नहीं ंनजर डालता
या तो मैं किसी को समझ नहीं पाता
या मुझे कोई समझ नहीं पाता
इसी समझने ना समझने की कश्मकश
में जीवन गुजर जाता है ।


यूं ही कोई महात्मा नहीं हो जाता ********

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*अहिंसा परमोधर्म* *जय जवान जय किसान* मोहन दास करमचंद गांधी  कुछ तो विशेषता अवश्य रही होगी इस शक्सियत में यूं ही कोई महात्मा नहीं कहलाता ।
दे दी हमें आजादी बिना खड़क बिना ढाल साबरमती के संत तुमने कर दिया कमाल ।
हिंसा से हिंसा को मिटाने का प्रयत्न सभी करते हैं ,
और वह काल जब देश में अंग्रेजों का आधिपत्य था ,उस समय की स्थितियों को देखते हुए ,भारतीयों पर हो रहे जुल्म ,उस पर अपने देश के प्रति भारत वासियों का स्वभिमान आत्मसम्मान,  शीश कटा देंगे परंतु शीश झुकाना कदापि मंजूर नहीं था।
गांधीजी की दार्शनिक दृष्टि ने जिसको समझा आखिर कितने और कितने फांसी की सूली पर चड़ते,नहीं मंजूर हुआ होगा .....गांधी ने जाना हम भारत वासियों की सबसे बड़ी पूंजी है आत्मविश्वास, सत्य , अहिंसा की ताकत जिसके बल पर दुश्मनों को भी झुकाया का सकता है पहचाना और उसमें जोश भरना शुरू किया ।
अहिंसा परमोधर्म
 कहते हैं गांधी जी कहते थे कोई  आपके गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल भी आगे कर दो
आज के युग में जब उग्रता सिर चढ़ कर बोल रही है एक हास्य का विषय है , परंतु इसके पीछे का दार्शनिक सत्य समझ पाना एक महात्मा की सोच हो सकती है…

शुभम करोती कल्याणम

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**यहां मेरी भावनाओं की कोई कदर नहीं .....

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प्रेरणास्पद, भावात्मक, काल्पनिक,हास्यास्पद, ( नाटक) श्रीमान जी :- सुनो श्रीमती जी बाहर से  किसी रद्धि वाले की आवाज आए तो उसे रोक लेना। और मुझे बुला लेना  मुझे कुछ बेचना है ।
श्रीमती जी:- अब क्या बेचना है ,अभी परसों ही तो सारा रद्दी  सामान दिया था ,जबकि मैंने कहा था एक दो अखबार बचा लेना अलमारी में बिछाने के लिए चाहिए थे ,तुमने तो एक भी अखबार नहीं छोड़ा था, अब क्या रह गया है कुछ, जो बेचना है ।
श्रीमान जी:- अरे भाग्यवान बस कुछ बेचना है ,बहुत कीमती है, परंतु कोई उनका मोल नहीं जानता ।
श्रीमती जी :- कीमती है और बेचना है,ऐसा क्या है कहीं मेरे गहने तो नहीं ....
श्रीमान जी:- तुम्हारे गहने वो तुम्हारे हैं अभी इतने भी बुरे दिन नहीं आए ,की मुझे ऐसा  कुछ बेचना पड़़े । श्रीमती जी:- अनमोल अजी मुझे तो घबराहट हो रही है आप ऐसा  क्या है जो रद्दी वाले को बेचने वाले हैं ,कहीं आप मुझे तो रद्दी वाले लो तो नहीं दे देंगे ......
श्रीमान जी:- राम -राम..... रद्दी वाला तुम्हें लेकर क्या करेगा , तुम्हें तो मैं ही झेल लूं इतना ही बहुत है.... व्यंग करते हुए श्री मान जी .....
श्रीमती जी:- हां -हां मेरी कीमत तो मेरे …

**दफन**

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** कल मुझे कुछ संस्कार मिले       कफ़न में लिपटे हुए       पड़े थे  मृत के समान  मूर्छित अवस्था में,मानों कोमा में        सांसे ले रहे थे ,       पर मरे नहीं थे,तैयार थे ,       शव शैय्या पर       स्वाहा होने के लिए       क्योंकि मृत के सामान पड़े थे        ले जाया जा रहा था उन्हें अंतिम संस्कार       के लिए .......       तभी कुछ हलचल हुई,       एक आस जो बची थी       जीवंत हो उठी ,संस्कारों ने         लम्बी सांस ली...... इंसानियत          भी मुस्करा उठी ,खिलखिलाने लगी....          शुभ मंगल संस्कारों की सांसे चलते देख....

*बेटियां *

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बेटियां इन कलियों की अहमियत तो उन बागवानों से पूछो , जिन बागों में यह खिलती हैं

घर आंगन महकाती हैं  रौनकें बढ़ाती हैं  बेटियां दो घरों की आन-बान  और शान होती हैं  एक घर की जड़ों में  फलती -फूलती और संस्कारित होती है  दूजे घर की इज्जत नींव और जड़ों को पोषित करने की जिम्मेदारियां निभाती हैं  बेटियां एक नहीं दो -दो घरों की रौनक और शान बढ़ाती हैं । बेटे वंशज होते हैं तो बेटियां उपजाऊ धरती होती हैं  भूमिका में दोनों की अहमियत सामान होती है ।


**सुप्रभात **

सुप्रभात सकारात्मक सोच के
साथ करें नये दिन की नयी शुरुआत
क्यों सोचें किसी ने क्या किया हमारे साथ
हमारे स्वयं के कर्म बनते हैं हमारी पहचान
स्वयं के शुभ कर्मों से रचना है हमें इतिहास

*विचार शून्य जीवन का क्या आधार *

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** *किसी अद्वितीय असीमित,
  शक्तिशाली विचार से ही प्रारम्भ
  हुआ होगा धरती पर जीवन

  विचारों का खेल है सारा
  विचारों से ही संसार का
  अद्भुत नजारा......
  विचारों से ही सृष्टि की सभ्यता विकसित
   मनुष्य में विद्यमान विचारों ने धरती को खूब
   संवारा ......

   मेरा तो मानना है कि विचारों की नींव
   पर ही टिका ही संसार सारा
   विचार ही तो हैं जीवन का आधार ......
   जीवन का सार ,विचार ना होते तो तब
   कहां सम्भव था धरती पर प्रेम और सौहार्द.....

  विचार माना की अद्वितीय शक्तियों का
  सार ,शक्ति का आधार ,जैसे मनुष्य जीवन
  में प्राण रक्त का संचार,हृदय गति का आधार ....
  विचारों के भी दो प्रकार :-
  जहां असुर विचार :- संहारक विनाशकारक
  सुर विचार शुभ दैवीय विचार :-उत्थान करक

 *विचारों के द्वंद्व में उलझा      तब समझा ,विचार शून्य   सब निरर्थक ,निराधार ,  विचार ही जीवन का आधार

  विचारों के चयन की ना होती महिमा
  तो क्यों कहते ,शुभ और अशुभ विचार
  नकारात्मक और साकारात्मक सोच
  जब मनुष्य की सोच ही उसके काम
  बनाती और बिगाड़ती है तो विचारों
  का ही तो हुआ खेल सारा....



सोचना पड़ा

*मैं वो भाषा हूं जो सबको समझ आ जाती हूं मैं ना कुछ बोलती हूं ,ना कुछ कहती हूं फिर भी लोगों के दिल में उतर जाती हूं *
*सोचना पड़ा खुदा को भी सच्ची मोहब्बतों के कुछ चिरागों को नफरतों की आंधियों के आगे भी ना बुझते देख अपने चक्षुओं को अश्कों से भिगोना पड़ा सोचना पड़ा खुदा को भी मोहब्बत के नाम पर फ़ना होना पड़ा*
*भावनाएं भी क्या चीज हैं जीवन का आधार ,जीवन का सार है भावनाओं से रहित जीवन निराधार हैं भावनाएं नदिया का बहता जल लहरें उतार -चढ़ाव,  फंसना यानी भंवर में फंसना भावनाओं की लहरों संग सामंजस्य बिठा कर जीवन नैय्या पार करना ही जीवन यात्रा की सफलता ....*

*हिंदी हिन्दुस्तान की आत्मा उसका गौरव*

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🙏🙏🎊🌹हिंदी मेरी मात्रभाषा अन्नत है,शाश्वत है, सनातन है , हिंदी किसी विशेष दिवस की मोहताज नहीं जब तक धरती पर  अस्तित्व रहेगा तब तक हिंदी भाषा का अस्तित्व रहेगा 🙏🌹🌹🎊🌸🌺🙏

“ हिंदी  मेरी मातृभाषा माँ तुल्य पूजनीय ''       🙏🙏

  😊😃जिस भाषा को बोलकर  मैंने अपने भावों को व्यक्त किया ,जिस भाषा को बोलकर मुझे मेरी पहचान मिली ,मुझे हिंदुस्तानी होने का गौरव प्राप्त हुआ   ,                            उस माँ तुल्य हिंदी भाषा को मेरा शत -शत नमन।

भाषा विहीन मनुष्य अधूरा है।
 भाषा ही वह साधन है जिसने सम्पूर्ण विश्व के साथ जनसम्पर्क को जोड़ रखा है जब शिशु इस धरती पर जन्म लेता है ,तो उसे एक ही  भाषा आती है वह है,  भावों की भाषा ,परन्तु भावों की भाषा का क्षेत्र सिमित है।
मेरी मातृभाषा हिंदी सब भाषाओँ में श्रेष्ठ है।  संस्कृत से जन्मी देवनागरी लिपि में वर्णित हिंदी सब भाषाओँ में श्रेष्ट है।  अपनी मातृभाषा का प्रयोग  करते समय मुझे अपने  भारतीय होने का गर्व होता है।  मातृभाषा बोलते हुए मुझे अपने देश के प्रति मातृत्व के भाव प्रकट होते हैं।   मेरी मातृभाषा हिंदी मुझे मेरे देश की मिट्टी  की …
श्री राधे -राधे

श्री राधे नाम की रस धारा हो
और कृष्ण नाम का सहारा हो
 अमृत्मयी विचारधारा तो उसके
जीवन का अद्भुत ,अतुलनीय स्वर्ग सा नजारा हो

फ़िक्र का क्यों जिक्र करूं
जब श्री  कृष्ण मित्र हमारा हो
श्री राधे नाम के इत्र से महकने
लगी है मेरे जीवन की बगिया
अब मेरे संग मेरे अंतर्मन में रहने
लगे हैं कृष्ण कन्हैया

श्री राधे रानी,जब से मैंने तुम्हारे नाम
का सहारा लिया है ,कृष्ण नाम के अमृत
से पवित्र होने लगी है मन मन्दिर की बगिया
हे कन्हैया , मैं जानता हूं तेरे नाम की रसधारा
में डूबकर ही पार लगेगी जीवन की नैया
श्री राधे -राधे


**शिक्षकों का स्थान सर्वोच्च **

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कभी सिर पर हाथ फेर कर
कभी डांट कर,
कभी दुत्कार कर
कभी मूर्ख, कभी मंदबुद्धि
कहकर , माना की मेरा दिल
बहुत जलाया ......
परंतु उसी आग ने मेरे अंदर
के स्वाभिमान को जगाया
उस चिंगारी से सर्वप्रथम
मैंने स्वयं को जगाया एक
बेहतर इंसान बनाया
फ़िर समाज के लिए कुछ
कर गुजरने के जनून ने
मुझे मेरे कर्म मार्ग में निरंतर
आगे की और बड़ने को प्रेरित किया
मैं आज जो कुछ भी हूं
मेरे शिक्षकों द्वारा दी गई शिक्षा के फलीभूत....
या यूं कहिए मेरे अंदर की
ज्ञान की चिंगारी को मशाल का
रूप देकर समाज को रोशन किया
धन्य -धन्य ऐसे शिक्षकों को
जिन्होंने मेरे और मेरे जैसे कई
मनुष्यों के जीवन को सही मार्ग दिखाने
के लिए स्वयं के जीवन को चिराग बनाया
उनका जीवन सफल बनाया..

 शिक्षकों के सम्मान में
एक अच्छा शिक्षक नदिया के
बेहते जल की तरह होता है
जिसके ज्ञान की निर्मल धारा में
कोई भी अपनी प्यास बुझा सकता है और
उसकी बेहती जल धारा, गन्दगी रूपी अज्ञान को
बाहर निकाल देती है ।



स्वागतम् गणपति महाराज जी आपका ....

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माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ,
हे गणपति,हे गणेशा
मैं सदा ,सरल हृदय से
शुद्ध बुद्धि से तेरा नाम
गुणगान गवां ,तेरा नाम सिमरन
कर नित -नए भोग लगवां
हे गणपति मैं निश दिन प्रतिपल
तुझे ही मनावां
रिद्धि, सिद्धि
शुभ , लाभ
लक्ष्मी और सरस्वती
समस्त सिद्धियों के तुम स्वामी
तुम अन्तर्यामी ,
सब के मन की जानी
विश्व भ्रमण का सुख
माता -पिता के चरणों
में पाया, हे, लम्बोदर
बड़े-बड़े रहस्यों को
विशाल ललाट मस्तक में
सिद्धि विनायक ने
विवेक बुद्धि ,ज्ञान से
वेद, ग्रंथों ,आदि महाकाव्यों
की रचना कर जगत को
ज्ञान विवेक का पाठ सिखाया
हे ,विनायक हे लम्बोदर
तेरे नाम लेने से तर जाएं सातों समुन्दर



कीमती सामान

चित्र
बहुत दिन से मां कह रही थी ,आलमारी का सामान ठीक करना है ,सारा सामान उलट-पलट करके रखा है ।
 मैं भी बाल मन दस साल मेरी उम्र ....
एक दिन अपना समान ढूंढ़ते वक़्त बाकी सब सामान अस्त -व्यस्त अब अलमारी में रखे सामान की ऐसी स्थिति थीं की ढूंढने पर भी कोई सामान आसानी से नहीं मिलने वाला था।
 मां चिल्लाई ये क्या किया राघव कबाड़ी भी इससे अच्छी तरह रखते होंगे घर में सामान और तुमने क्या हाल कर दिया है ....
मां झ्ट से अाई और अलमारी का सारा सामान बा हर की तरफ निकाल दिया , अब ये सामान ऐसे ही रहेगा ठीक करना अपने आप ,फिर मां खुद ही सारा सामान समेटने लगी ....
मैं पलंग पर बैठा हुआ तिरछी निगाहों से मां को देख रहा था ,तभी मेरी नजर अलमारी के बाहर फैले सामान पर पड़ी ,मेरी जासूस निगाहें उस समान में से ना जाने क्या खोजने लगा कब मैं जाकर उस समान के पास बैठ गया मुझे भी नहीं पता चला। ,तभी मां चिल्लाई तू फिर आ गया तंग करने, मां एक मिनट कहते ही मेरी नज़र कपड़ों के नीचे पड़ी एक कीमती चीज पर पड़ी ,मैंने झट से उसे निकाल लिया और अपने पास रख लिया,और फिर मेरी जासूस निगाहें और कुछ ढूंढने लगी ,रंगों वाले पेन का पैकेट मैन…

*परियां और उनकी रहस्यमयी दुनियां *

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अरे वाह!
    इतना सुन्दर क्या है यह किसी रथ सा प्रतीत होता है ,चार श्वेत मखमली अश्व जो रथ के आगे खड़े थे ,अरे वाह श्वेत मखमली हंस,कोई चमत्कारी रथ लगता है यह.....

   इतने में हवा के संग मीठी सुंगध की लहर सारे वातावरण को महका गई ,सब कुछ रहस्यमयी सा प्रतीत हो रहा था ,तभी मीठी आवाज में हंसने ,खिखिलाने की गूंज से वातावरण और भी मीठा हो गया ,उत्सुकतावश मैंने उस हंसने की आवाज का पीछा किया ...कुछ दूर चलने के बाद मैंने पेड़ों की ओट से देखा श्वेत मखमली वस्त्रों में जिनके कोमल-कोमल से श्वेत पंख भी हैं ,विहार कर रही हैं कुछ झरने के निर्मल जल में स्नान कर रही हैं कुछ पुष्पों को क्यारियों में तितलियों को भांति उड़ रही हैं ,बहुत ही सुंदर दृश्य था , मैं स्वप्न लोक की परियों को साक्षात देख पा रही थी , एक बार को सोचा जाकर उनसे मिली कुछ बातें करूं .... फिर लगा कहीं यह मेरी आहट सुनकर लुप्त ना हो जाए , अब तो मुझे
मुझे यकीन हो गया था यह परियां उसी रथ में बैठकर  आयी हैं । मैं रथ की समीप जाकर छुप गई और परियों के आने का इंतजार करने लगी , आसमान की तरफ देखा तो आसमान में तारे  टिमटिमा रहे थे ,चन्द्रमा भी सोलह कल…

*सवाल *

सवाल क्या है
सवाल होना भी इक सवाल है
सवाल कुछ भी नहीं
और सवालों के सिवाय
जिन्दगी भी कुछ नहीं
सवालों से जन्मा हर
 एक नया सवाल है
हर एक नए सवाल 
का उत्तर ही सवाल का
जवाब है ।

** चिंगारी **

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*** जब लौ बनकर दीपक
में जली सभी दिशाओं
 को  प्रकाशित किया  मैं तेज़ का पुंज, प्रकाश की किरण  चिंगारी थी ,सिमट गई तो  सार्थक हुई,  बिखरी तो तितर -बितर हुई स्वयं भी स्वाहा हुई जहां गिरी वहां  सब राख किया
मेरी चमक में कई बहके -भटके
कईयों ने तो अपने घर भी जलाए
उपयोग की उपयोगिता को तब
सही राह मिली, जब मेरा संयोजन हुआ मैं चिंगारी ,मेरा अस्तित्व प्रकाश
मेरी उपयोगिता तब सार्थक हुई
जब भटकते हुओं को सही राह मिली.....




*सोच *

*ये सोचना की
मृत्यु के बाद शांति मिलेगी मृगतृष्णा सा है
मृत्यु के बाद की किसने जानी
जीवन एहसासों और भावनाओं का बड़ा समुंदर है ,सुख-दुख शांति -अशांति सब मनुष्य मन के भीतर     ही है  *

**खुद को बदलो **

* खुद को बदलो
दूसरों को बदलने की
कोशिश में अपना वक़्त जाया ना करें
स्वयं को बदल कर तो
देखो ,क्या पता आप में सकारात्मक
 बदलाव देखकर जमाना स्वयं में
 बदलाव शुरू कर दे**

*श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव*

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यशोदा के लला
गपियों के गोपाल
मुरलीधर , छलिया
भक्तों के केशव,मनमोहन
श्यामसुंदर ,माधव जिसने
जिस -जिस नाम से पुकारा
कृष्ण दामोदर हो गए उसके प्यारे
अनन्त,अद्वितीय
अलौकिक,निरांकर
मुझमें ही समस्त
सृष्टि का सार
सुव्यवस्थित करने को
सृष्टि पर आचरण और व्यवहार
मुझ अद्वितीय शक्ति को
पड़ता है ,धरती पर अवतार
श्री राम -सीता ,राधे-कृष्ण
नामों का आधार धरती पर
सकारात्मक ऊर्जा का संचार
भादों की कृष्ण जन्माष्टमी पर
पर श्रद्धा ,विश्वास ,और प्रेम से
मनाया जाता है , का हो उद्धार
भाद्र पद की कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है  कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार  मुबारक हो सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार........



*****श्री कृष्ण जन्मोत्सव की शुभकामनाएं

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श्री कृष्ण जन्मोत्सव का पर्व ......
मंदिरों में जगह -जगह श्री कृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी जोरों पर थीं।
बाल गोपाल श्री कृष्ण जन्म के पर्व के लिए बाजारों में सुन्दर -सुन्दर लड्डू गोपाल उनके झूलने के लिए सुन्दर झूले, आकर्षक वस्त्र ,बांसुरीयां मोर पंख आदि सज -सज्जा के सामान सजे हुए थे ,मन तो करता था सब ले लो ,परंतु हमने अपनी आव्यशकता अनुसार सुन्दर-सुन्दर सामान ले लिया था ।
  इसी दौरान हमारा हमारे घर के समीप वाले श्री कृष्ण भगवान के मंदिर जाना हुआ... मंदिरों में भी श्री कृष्ण जी के जन्म उत्सव की खूब तैयारियां चल रही थी कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर चर्चा चल रही थी ,हम भी थोड़ी देर के लिए उस चर्चा को सुनने लगे ।
 तभी एक महिला अपना दुखड़ा रोने लगी ,कहने लगी पंडित जी मैं बहुत परेशान हूं ,मेरी सास को मेरा कोई काम पसंद नहीं आता बस टोकती रहती है ,मेरा पति भी बहुत गुस्से वाले स्वभाव के हैं ।
पंडित जी कुछ उपाय बताईए जिससे मेरी परेशानी दूर हो।
 पंडित जी मुस्कराए और बोले ,बेटी तुम क्या दुःखी होगी तुमसे ज्यादा दुखी और लोग भी  है इस दुनियां में ...
हमेशा दुख का रोना रोने से दुख कम नहीं होता ,त…