पोस्ट

भावों का सार

विचार अभिव्यक्ति को विचारों का मंथन तो अवश्य होता है किन्तु भावों की उलझन में भावों की खिचड़ी ही बन जाती है ।ना भाव रहते हैं ना भावों का सार सारा रस ही समाप्त हो जाता है और वास्तविक विचार स्वाहा हो जाता है विचार अभिव्यक्ति की उलझन में ।विपरीत परिस्थितियां विपरीत हालात फिर भी जीने का हो मस्त अंदाजजिंदादिली से जीने कला हौसलों में हो उड़ान ,मुश्किलों को हंसकर पार कर जाना जिसकी शान  किस्मत के हाथों बदल ही जाते हैं उसके हालत । 





प्रयास

प्रयास करना ए मानव तुम कभी ना छोड़ना आस  उम्मीद के साथ हौसलों को सदा संग रखना कर्मठता पर  अपनी विश्वास जिन्दगी जीत का जश्न भी है तो हार त्रुटियों को सुधार ने की कलाहार निराशा नहीं परीक्षा भी है ज़रा संभल कर चलना ए मानव कहीं ऊंचे पहाड़ हैं तो कई गहरी खाई भी खूबसूरती के आकर्षण में कांटो की चुभन भी बहुत है कहीं ऊंचे पहाड़ हैं तो कई गहरी खाई भी परिश्रम जिन्दगी का एक पहलू जीत है तो एक हार भी  जीत के जश्न में अहंकार के नशे के संग हार का दर्द भी है 

हिंदी हिंदुस्तान का गौरव

"हिन्दुस्तान" का गौरव ,हिंदी मेरी मातृ भाषा, हिंदुस्तान की पहचान हिंदुस्तान का गौरव "हिंदी" मेरी मातृ भाषा का इतिहास सनातन ,श्रेष्ठ,एवम् सर्वोत्तम है ।भाषा विहीन मनुष्य पशु सामान है ,भाषा ही वह साधन है जिसके द्वारा हम अपने विचारों को शब्दों और वाक्यों के माध्यम से एक दूसरे से अपनी बात कह सकते हैं और भव प्रकट कर सकते हैं ।हिंदी मात्र भाषा ही नहीं, हिंदी संस्कृति है,इतिहास है,हिंदी इतिहास की वह स्वर्णिम भाषा है जिसमें अनेक महान वेद ग्रंथो के ज्ञान का भण्डार संग्रहित है । अपनी मातृ भाषा को छोड़कर किसी अन्य भाषा को अपनाना स्वयं का एवम अपने माता - पिता  के अपमान जैसा हैं ।मातृ भाषा से मातृत्व के भाव झलकते है ।हिन्दी मेरी मातृ भाषा मां तुल्य पूजनीय है ।जिस भाषा को बोलकर सर्वप्रथम मैंने अपने भावों को प्रकट किया उस उस मातृ भाषा को मेरा शत-शत नमन ।जिस प्रकार हमें जन्म देने वाली माता पूजनीय होती है उसी तरह अपनी मातृ भूमि अपनी मातृ भाषा भी पूजनीय होनी चाहिए ।मातृ भाषा का सम्मान ,यानि मां का सम्मान मातृ भूमि का सम्मान ।  मां तो मां होती ,और मां सिर्फ एक ही होती है ,बाकी सब मा…

*जमाना खराब है *

"होश की बातें करते हैं वो जो नशे में सदा रहते हैं स्वयं आदतों के गुलाम है और दुनियां की आजादी की बातें करते हैं ""देकर उदहारण ,जमाना खराब काकैद में रखकर आजादी कोस्वतंत्रता , स्वालभिलंब,एवम् शसक्तीकरण का ऐलान करते हैंनियत खराब है ,कहने वालों नियत जिसकी खराब है ,दोषी वह है ,जिसकी सोच बुरी है  फिर सच्चाई के पैरों में जंजीरे क्यों""कैद करना है सजा देनी है तो उस गलत सोच को दो जो अच्छाई को भी अपनी बुरी और गलत  सोच और दृष्टि से दूषित करने की सोचती है ""बेडीयां डालनी है जो  जमाना खराब है उस खराब जमाने पर डालो अच्छाई की सांसोंको खुली हवा में सांस लेने दो "



*वाइरस *

आज के युग में विषेले जीवाणु को  पहचान पाना आसान है ,बजाय  मनुष्य के ......मन में पनप रहे नफरत के जहर को वाइरस के संक्रमण का डर सच्चा है  उसमें संक्रमण है वो छुपता नहीं किंतु मनुष्य की क्या कहिए किसके  भीतर कितना और कैसा जहर भरा है वह अदृश्य ही रहता है ।  चेहरे पर मुस्कान मीठी  छुरी शब्दों की चासनी दिलों में जहर धोखा बेईमानी  भरी जो अदृश्य इसलिए मनुष्य से बेहतर तो वह  जीवाणु ही है जिस के संक्रमण का  डर साक्षात है जिससे स्वयं की  रक्षा के बचाव किए जा सकते हैं  किन्तु मनुष्यों के मन में भरे जहर  नकारात्मक विचारों के जहर का क्या कीजिए हम मनुष्य हैं शिव तो नहीं जहर को पीकर अमर होना हमें नहीं आता नफरत ,लोभ , कपट का जहर  जीवन का  कहर  रोग मधुमेह का बन जीवन का जब होता है अंत सामने वाला बन संत  लुत्फ उठाता है जीवन के कतल का घिनौना अंत । किन्तु सत्य तो शाश्वत है ,सनातन है  कब तक छिपेगा कोहरे में सत्य का सूरज  जब कोहरा हटेगा ,तब होगा सत्य के प्रकाश का उजाला।

जागृति की मशाल

कविता मात्र शब्दों का मेल नहींवाक्यों के जोड़ - तोड़ का खेल भी नहींकविता विचारों का प्रवाह हैआत्मा की गहराई में से समुद्र मंथन के पश्चात निकली शुद्ध पवित्र एवम् परिपक्व विचारो के अमूल्य रत्नों का अमृतपान है धैर्य की पूंजी सौंदर्य की पवित्रताप्रकृति सा आभूषण धरती सा धैर्यअनन्त आकाश में रोशन होते असंख्य  सितारों के दिव्य तेज का पुंज चंद्रमा सी शीतलता का एहसास सूर्य के तेज से तपती काव्य धारा स्वच्छ निर्मल जल की तरलता का प्रवाहकाव्य अंतरिक्ष के रहस्यमयी त्थयों की परिकल्पना का सार  है, साका रत्मक विचारो के जागृति की  मशाल होती है।





मनमर्जीयां

इस उम्र मैं यह सब अच्छा नहीं लगता तुम पर मां ...      .. लोग क्या कहेंगे मां..   मां हैरान थी, अपनी बेटी की बातें सुनकर , सोच रही थी क्या यही क्या यह वही बेटी है जिसे कल मैंने उंगली पकड़कर चलना सिखाया था सही और गलत में भेद बताया था आज यही बेटी मुझे सही और गलत का भेद बता रही है यूं तो मां मन ही मन गर्व महसूस कर रही थी कि उसकी बेटीअब इतनी समझदार हो गई है कि वह अपनी मां को अच्छा और बुरा समझा सकें, परंतु आज मां स्वयं को जीवन के एक ऐसे मोड़ पर खड़ा पा रही थी जहां मनुष्य जीवन में एक बदलाव जरूर आता है।
     मांअपने बच्चों की बातें सुनकर कुछ पल के लिए अतीत की यादों में खो गई, उसे याद आने लगे वह पल जब उम्र के एक पड़ाव में उसके बच्चों में एक बदलाव आने लगा था जिसे देख कर मां के मन में भी कुछ विचार उमड़-घुमड़ करने लगे थे।
    आज इस स्थिति में मां को महसूस हो रहा था की जिंदगी के कुछ पड़ाव ऐसे होते हैं ,  जब इंसानी प्रवृत्ति में बदलाव आता है यही बदलाव मां ने अपने बच्चों में उस वक्त देखा था जब वह बचपन से जवानी की और बढ़ रहे थे मां अपने बच्चों के क्रियाकलापों पर हर पल ध्यान रखती थी उसका ध्यान रखना भ…