संदेश

“मोहब्बत खुदा है “

“मोहब्बतों की डोर से बँधे हैं
        हम सब
मोहब्बत ना होती तो हम बिखर
 जाते तितर-बितर हो जाते “

“चाहतों की भी एक फ़ितरत है
चाहता भी उसे है ,जो नसीब में
     नहीं होता”

कहते हैं की मोहब्बत में इंसान खुदा हो जाता है
    खुदा हो जाता है शायद इसीलिए सबसे
             जुदा हो जाता है ।

“ना जाने क्यों लोग मोहब्बत को बदनाम
किया करते हैं ,मोहब्बत तो दिलों में पनपा करती है
         मोहब्बत के नाम पर क्यों ?
        क़त्ल ए आम किया करते हैं “

“मोहब्बत तो रूह से रूह का मिलन है
मिट्टी का तन सहता सितम है “

“मोहब्बत तो जलते हुए चिराग़ों
     में शमा बनकर रहती है ,
जितनी जलती है उतनी ही पाक
        हुआ करती है “

“मोहब्बत के चिराग़ों के हौसलें भी
क्या ख़ूब होते है , आँधियाँ आती हैं
तूफ़ान आते हैं सब स्वाहा हो जाता है
पर मोहब्बत के चिराग़ रूहों में बड़े शान से जलते
रहते हैं “

मोहब्बत ख़ुदा है तभी तो ज़माने से जुदा है
मोहब्बत खुदा की बखशी हुई नियामत है
जो हर किसी को नसीब नहीं होती ।

मोहब्बत की आग से जो ख़ुद को रोशन करता है
वो आबाद है ,परन्तु जो आग संग खेलता है
 उसको जलकर राख हो ही जाना पड़ता है ।









आओ अपने -अपने घरों की रौनक़ें बड़ायें “

👶👧🏼आओ अपने -अपने घरों
   की रौनेकें बड़ायें
   दीवारों पर लगे जाले हटायें
   धूल मिट्टी की परतें हटाएँ ।”

    🧚‍♀️खिलौनों से घर भर जाएँ
    गुड्डे-गुड़िया ,राजा -रानी की
    कहानियाँ सुने सुनायें🧜‍♀️
    कहीं रेडू चलाएँ ,
   लट्टु घुमाये ,लट्टु घुमा-घुमा कर
   सारी दुनिया के चक्कर लगायें
   धरती पर रेंगते -रेंगते बड़े हो जायें
   जिस धरती पर गिर -गिर के सम्भले
    सम्भलते -सम्भालते आज समाज को
   सम्भालने लगे ,आसमा की ऊँचाइयाँ छूने
   लगे हैं ,उस धरती माँ से जुड़े रहें
   आगे बड़े ,परन्तु आगे बड़ने की होड़ में
   अपनी माओं को ना भूल जायें
   एक जन्म देने वाली ,पालना करने वाली
   और एक धरती माँ
  इनका ना अपमान करें ,
  जिनकी ऊँगली पकड़ तुमने
  सम्भालना सीखा ,जिनकी शिक्षाओं
  ने तुम्हें अच्छे संस्कारों से सींचा
 उस माली को ना भूल जाना जिस धरती माँ
की गोद में गिर -गिर के सम्भले
उस माँ से जुड़े रहना
जाओ बच्चों आसमान की ऊँचाइयाँ छूना
परन्तु लौट के घर को आना
ये मतायें आज भी तुम्हारी राह देखती है
कोई फिर से मिट्टी के घर बनायें
माँ के हाथ की सुखी रोटी भी प्रसाद बन जाये ।












“ कन्या दान ,अभिमान ,सम्मान “

🎉💫घर में शादी का माहौल था , चार दिन बाद बहन की शादी है ,भाई को चिंता हो रही थी कहीं कोई कमी ना रह जाये ,
जबकि भाई अपनी बहन से दो साल छोटा था ,लेकिन बहन की शादी के समय था ,इसलिये शायद थोड़ा ज़्यादा समझदारी की बातें करने लगा था ।

  🎉🎉  घर पर दिन  भर मेहमानों का आना जाना लगा रहता था,कभी कोई चाचा ,मौसा ,ताऊजी सभी को अलग -अलग ज़िम्मेदारी सौंप दी गयी थी  ,सभी पूरी तन्मयता से बेटी की शादी की तैयारियों में लगे हुए थे ।
रात्रि का भोजन हुआ था ,सभी बैठे थे , कौन क्या पहनेगा सभी अपनी -अपनी पसन्द बता थे ।
तभी पापा जी बोले ,तुम सबको अपनी -अपनी पड़ी है ,और भी बहुत काम हैं , कितने लोगों को बुलाना है ,फ़ाइनल लिस्ट तैयार करो ,किसको क्या देना है सब लिखो , तभी भाई बोला किसको क्या दोगे बस देते रहो।
पापा जी बोले बेटा बात देने की नहीं होती ,बात तो शगुन की है ,ये सब रीत -रीवाज हैं इन्हें निभाना ही पड़ता है ।
भाई थोड़ा भावुक हो गया ,बोला पापा नहीं पापा  हम अपने जीवन की अनमोल चीज़ अपने दिल का टुकड़ा दे रहे हैं
,मैं अपनी बहन आप और मम्मी अपनी बेटी दे रहे हैं ,अपना सब कुछ तो दे रहे हैं ,अपना सब कुछ अपने कले…

“आग है लगी हुयी “

जिधर नज़र दौड़ायी
 नज़र आया बस कूड़ा ही कूड़ा
 कूड़े के ढेर पड़े हुए हैं
 जगह -जगह ......
 आग लगी हुई है
 चमकते चेहरों पर जब
 नज़र टिकती है ........
तब नज़र आती है एक आग
आग विचारों रूपी
कूड़े के ढेरो की आग
कूड़ा बस कूड़ा ही कूड़ा
जब गहरायी में उतरा तो
नज़र आयी गंदगी ही गंदगी
गन्दगी में पनपते ज़हरीले जीवाणु .....
कीचड़ !कीचड़ में खिलते हुए नक़ली कमल
दिखावटी कमल ,सुगन्ध रहित, पुष्प
उजले वस्त्र,मैले मन
खिलते बगीचों की गहरायी में दलदल
का अन्धा कुआँ
अंतहीन ,लोभ ,भ्रष्टाचार का दलदल
चंद पलों की आनन्द की चाहत में
अँधेरी गुमनाम गलियों में भटकता मानव
बाहर भी कूड़ा , मन के अंदर भी कूड़ा
सिर्फ़ तन को चमकाता ,सजता ,सँवरता
आज का मानव ,बस -बस करो
साफ़ करो ये गन्दगी,
अमानवीयता के अवग़ुणो को जला कर राख करो
बाहर  और भीतर सब साफ़ करो ।



“ ना जाने क्यों भटकता रहता हूँ “

दिन भर दौड़ता रहता हूँ
सुकून की तलाश में ....

सुख की चाहत में
दर्द से सामना करता रहता हूँ
दुखों से लड़ता रहता हूँ

आधी उम्र बीत गयी
सुखों को सहेजने की कोशिश में
जो सुख -शान्ति मिली भी
उन्हें भी ढंग से जी नहीं पाया

सारी उम्र सहेजता रहा ख़ुशियाँ
उन्हें जीने की चाह में
मैं दर्द जीवन में जीवन जीता चला गया

ये मुस्कराहट भी कितने सुन्दर भाव है
चेहरे पर आते ही सारे दर्द छिपा लेती है

अब मैं आज जो है ,उसको जीना सीख गया हुआ हूँ
जो वर्तमान है वही ख़ूबसूरत है ,सत्य है
भविष्य की चिंता में अपना आज खराब नहीं करता
अपने आज को ख़ूबसूरत बनाओ
कल ख़ुद ब ख़ुद ख़ूबसूरत ख़ुशियों भरा हो जाएगा ।



🥀"अक्षय अनन्नत सम्पदा "🥀☘️🌳🌳

🌍🚶‍♀️🏃🏻‍♀️जीवन - मनुष्य और संसार  ............
          ये सृष्टि , सृष्टि में अनेकों ग्रह ....🌕🌝🌒🌏
   इस सृष्टि का सबसे सुंदर ग्रह "पृथ्वी "
परमात्मा ने जब इस सृष्टि की रचना की ,हम मनुष्यों के लिये जो परमात्मा के ही अंश हैं यानि परमात्मा की संताने .....जिस प्रकार एक माता -पिता अपनी संतानों के सुंदर जीवन के लिए व्यवस्था करते हैं ..........
परमशक्ति ,परमात्मा द्वारा पृथ्वी नाम के इस ग्रह को असंख्य सुविधाओं से भर दिया गया  ,प्रकृति में
इतनी सुन्दर व्यवस्था की गयी है ,कि प्रकृति की अनमोल सम्पदाओं के भण्डार कभी ख़ाली नहीं हो सकते ।

सोचने -समझने की अनुपम भेंट ,जिसे हम बुद्धी कहते हैं ।
अच्छा और बुरा परखने की शक्ति .....
प्रकृति की अनमोल सम्पदा, धरती पर परमशक्ति  द्वारा असंख्य खनिज पदार्थों की देन ......

"अविष्कार आव्य्श्क्ता की जननी है "प्रग्रति उन्नति का सूचक है ।
परंतु उन्नति के नाम पर प्रकृति से इतनी अधिक छेड़छाड़ भी उत्तम नहीं कि प्रकृति का स्वरूप ही बिगड़ जाये ।

मेरा आज का विषय है , जबकि प्रकृति द्वारा इस सृष्टि पर सम्पूर्ण व्यवस्था की गयी है इसके बावजूद …

" प्रकृति अनमोल सम्पदा "

🥀🥀  ☘️🍀🌲☘️
    मीठी -मीठी सी शीतल हवाओं का झोंका
    सर्दी के मौसम को अलविदा कहती
    सूर्य की तेज़ ,तपिश का एहसास
    प्रातःक़ालीन शांत वातावरण में
    प्रकृति का आनंद लेता मन
    हरी-भरी घास का श्रृंगार
    करती ओस की बूँदे
    शांत वातावरण
    पक्षियों के चहकने
    की मीठी आवाज
    मानों वातावरण में
    गूँजती संगीत की मधुर तान
    प्रकृति स्वयं में ही सम्पूर्ण
    स्वयं का शृंगार करती 🎉🎉
    दिल कहे बस यहीं ठहर जाये पग
    भागती-दौड़ती ज़िन्दगी से अब थक गया है मन
    हरी -भरी घास पर बैठ कर यूँ ही बीत जाए जीवन
   जाने क्यों भगता -दौड़ता रहता है मन
   प्रकृति में निहित है जीवन का सम्पूर्ण आनंद
   प्रकृति से ना छेड़-छाड़ करो
   उसमें ना ज़हर घोलो
   प्रकृति है अमुल्य सम्पदा
  अनमोल धरोहर प्रकृति का संरक्षण करो ।🌸🌹🥀🥀☘️🍀