संदेश

" अमीरी"

अगर विचार ही संकीर्ण हों तो ,
 कोई क्या करे
  विचारों की अमीरी ने अपने जुनून और
  कर्मठता के बल पर ,कई लोगों को बादशाह
  बना दिया इतिहास इसका गवाह है ।

निर्धनता को दूर किया जा सकता है
धनकमा कर ..निर्धन होना इतना बुरा नहीं
क्योंकि परमात्मा द्वारा मनुष्य को
आत्मबल की जो अमूल्य सम्पदा प्राप्त है
उसके उचित उपयोग द्वारा निर्धन धनवान बन सकता है

परन्तु ग़रीबी ........ग़रीबी तो पनपती है मनुष्य के मन में
अगर कोई अमीर होना ही ना चाहे तो कोई क्या करे
हाँ धन की अधिकता संसाधनों मई वृद्धि अवश्य करती है ।

धन का क्या है कहीं ज़्यादा कहीं कम
अमीर बनिये दिल के अमीर ,
खाता हर कोई रोटी ही है
निधन सबका निश्चित है
अमीर और ग़रीब जाती सबकी झोली ख़ाली है ।


💐इन्तजार💐

💐इन्तजार नहीं-नहीं..... मुझे किसी का भी इन्तजार नहीं
पर शायद दिल के किसी के कोने में
करता तो हूँ, मैं भी किसी का इन्तजार
पर किसका ,नाम नहीं जानता उसका
दरवाजे पर खड़ा अक्सर झाँकता रहता हूँ
कोई नहीं है, फिर भी ना जाने किसका
इंतजार रहता है ।
शायद कोई मीठी सी महक 💐
मन्द मधुर समीर का झोंका
कोई मीठा सा एहसास दे जाये
कोई आये मुस्कराहटों की बौछार ले आये
हम भी मुस्करायें, वो भी मुस्करायें
सारा जहाँ मुस्कराना सीख जाये
नहीं किसी भी चेहरे पर
उदासी की झलक नज़र आये
सभी गिले-शिकवे ख़त्म हो जायें
आये तो अब बस बहारों के ही मौसम आयें
इन्तजार मैं रहता हूँ,अक्सर
कोई ईर्ष्या,द्वेष लोभ, अहँकार जैसी
जहरीली बिमारियों को खत्म करने की
दवा ले आये।
अब जो भी ईंसान नज़र आये
निस्वार्थ प्रेम की औषधी संग
जीने की वज़ह लेकर आये ।।💐💐💐💐💐💐💐💐
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*सुकून *

**** मेरे पड़ोस में रहने वाली बूढ़ी अम्मा ,दिन भर घर के द्वार पर ही नज़र आती ।
सब गली मोहल्ले वाले अपने काम से आते-जाते बूढ़ी अम्मा का आशीर्वाद जरूर लेते ।
पहले तो अम्मा द्वार पर खड़ी रहती,पर जब थक जाती तब
बूढ़ी अम्मा अपने घर के द्वार के बाहर अधिकतर एक छोटी सी चौकी लगाकर बैठ जाती ।
आते -जाते सबको देखती रहती ,कभी किसी के पास फुर्सत होती तो दो पल अम्मा के पास खड़ा होकर बातें भी कर लेता ,
बस अम्मा का सारा दिन यूँ ही बीत जाता ।
हम सब आस-पास के गली -मोहल्ले वाले अम्मा को न्यूज़ रिपोटर भी कहते ,कयोंकि अम्मा को कोई काम तो था ,नहीं और सत्तर साल की उम्र में उनके बस की बात भी नही थी कोई काम करने की ।
सुबह सवेरे ही अम्मा रोज का नियम कर्म करके नाश्ता करके बाहर आ जाती ,  और चलते-फिरते कोई न कोई उन्हें कुछ न कुछ जो भी कुछ अलग हो रहा होता आस-पास तो बता देता ,जैसे कोई बीमार है, कोई कहीं बाहर घूमने गया है ,किसी ने कुछ नया खरीदा ,किस की बहू कैसी है, वगैरा-वगैरा  आस-पास देश दुनियाँ में क्या कुछ नया हो रहा है खबर दे देता ।
अम्मा सबकी सुनती ,फिर अपने ढंग से सबको बताती रहती।
हमें भी इंतजार रहता कि अगर कुछ…

सफ़र

सफ़र की शुरुआत
बड़ी हसीन थी
हँसते थे ,मुस्कुराते थे
चिड़ियों संग बातें करते थे
सपनों की ऊँची उड़ाने भरते थे
हर पल मुस्कुराते थे
वो बचपन के दिन भी कितने अच्छे थे
सफ़र ये कैसा सफ़र
प्रतिस्पर्धा की दौड़ मैं
चेहरे की मुस्कान छिन गयी
चिंता की रेखाएँ चेहरे पर पर बोलती हैं
जाने क्यों हम बड़े हो गए
मन में हज़ारों द्वेष पल गए
संग्रह करते -करते हम
विभाजित हो गये
अपराधी हो गए
व्यवसायिक हो गए
व्यवहारिकता स्वार्थी हो गयी
इंसान तो रहे ,इंसानियत गुम गयी
जीवन एक
सफ़र है,सब को है ज्ञात
सफ़र में सुविधाओं के लिए
धरती लहुलोहान हो गयी
मिट्टी के तन की मिट्टी पहचान हो गयी
फिर भी अकड़ ना गयी
जिस जीवन की ख़ातिर आतंक फैलाया
वही आतंकवाद जीवन का विनाश कर रहा
जीवन एक सफ़र है किसी का लम्बा
किसी का छोटा ,
सफ़र का अन्त तो निश्चित है
फिर क्यों आतंकवाद से सफ़र का मज़ा किरकिरा करना
हँसना ,मुस्कराना जीवन के सफ़र को
आनंद मयी यादगार और प्रेरणास्पद बनाना ।





"सकरात्मकता का व्रत"

"जब से मुझे सकारात्मकता के बीज
मिले हैं ,मानों मैं तो मालामाल हो गया
अरे, ये तो बहुत कमाल हो गया ।
अब तो मैं सकारात्मकता के बीज
डालकर सकारात्मकता की फ़सल
उगा रहा हूँ ,नकारात्मकता की सारी
झाड़ियाँ काट रहा हूँ "
एक व्रत जो मैंने हर वक़्त लिया है ठान
आव्य्श्क्ता से अधिक में खाता नहीं 
अन्न को दुरुपयोग होने से बचाता हूँ
सिर्फ़ अन्न का ही नहीं
अनावश्यक विचारों को स्वयं में
समाहित होने देता नहीं
नकारात्मक विचारों को स्वयं से
दूर रखने का लिया है
मैंने जीवन भर का व्रत ठान
स्वच्छ निर्मल जल में हो
प्रतिबिम्बित यही मेरी  पहचान ।


"मुस्कराना सदा मुस्कराना है"

💐संसार के रंगमंच पर
मुझे अपना किरदार बखूबी
निभाना है ।💐
खुशी हो या ग़म
मुस्कराना सदा मुस्कराना है
माना की जीवन एक पहेली है
ये पहेली ही तो मेरी सहेली है ।

जन्म और मृत्यु का खेला है
जन्म और मृत्यु के बीच का
जीवन ,बचपन,जवानी,बुढापा
उतार-चढ़ाव का रेला है ।
जीवन है तो जीना है
कर्मों के बल पर अपना
आशियाना तो बनाना है पर उस पर
अधिकार नहीं जताना है
क्योंकि एक दिन छोड़ कर आशियाने को तो
जाना है ।
जीवन का सफ़र
सुख-दुख का मंजर है
जो जीता वही सिकन्दर है
जो उलझा ,वो उलझता चला गया
सफ़र का आनन्द लेना है
जीने का अंदाज सबका
अपना-अपना है ,कोई सबकुछ
खोकर भी मुस्कराता है
कोई सब कुछ पाकर भी रोता रहता है
जीवन एक सफ़र है
किसी का छोटा ,किसी का लम्बा सफ़र है
सफ़र में तमन्नाओं का बोझ कम रखो
सफ़र हल्का -फुलका और मजेदार होगा
और वापिसी में उतना ही आराम होगा ।💐

**आओ साईकिल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनायें**

आओ बच्चों इस *बाल दिवस*पर  एक प्रण निभायें,चलो साईकिल चलाये सिर्फ बाल दिवस ही नहीं , प्रतिदिन का यह नियम बनाये   ** साईकिल चलायें**  साईकिल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

   **हाथ हों हैण्डल पर     पैर हों पैंडल पर     दृष्टि हो, चहुँ ओर,     आओ जीवन की         रफ़्तार बढ़ायें ।  तन-और मन को स्वस्थ बनायें शुद्ध वातावरण में श्वासों की पूंजी बढ़ायें  पेट्रोल, डीज़ल की जहरीली गैसों से  वायुमण्डल को प्रदूषित होने से बचाएं।
*परमात्मा ने यह धरती हम मनुष्यों के रहने के लिये बनायी ,और हम मनुष्यों ने अपने लोभ और स्वार्थ में इस धरती का हाल बुरा कर दिया। आओ बच्चों ,धरती माँ को प्रदूषण मुक्त बनायें धरा को स्वर्ग सा सुन्दर, बनायें   पुष्पों की कतारें सजाये,    फलों के वृक्ष लगायें ,  खेतों में पौष्टिक अनाज की पौध लगायें
प्राकृतिक व्यायाम के साधन अपनायें,
व्यायामों को महँगे खर्च से छुटकारा पायें
आओ तन-मन और वायुमण्डल को स्वस्थ बनाये
आओ साईकिल को अपने दिनचर्या का
 महत्वपूर्ण  हिस्सा बनाये ।