🎉🎉🎉🌺🌺 🎉" हाँ मैं औरत हूँ 🎉🌺🌺🏡☕️🏡📖📖🌹🌹🎉🎉

🌺 हाँ मैं औरत हूँ 🌺
मुझ बिन धरती का
अस्तित्व अधूरा है ,
कोई मुझे कुचलता है
तो इसमें मेरा क्या दोष .......
निर्दयी हैं वो ,पापी हैं वो 🌺
क्रूर हैं वो ,
रावण या कंस से भी घिनौने हैं वो
जो अपने ही बाग़ों में खिले गुलाबों
को , कलियों को कुचलते हैं
हाँ मैं औरत हूँ मुझसे ही महकता
सरा जहाँ है ,मैं ही तो सारे जहाँ की 🌺
रौनक़ हूँ ।🌺
मैं स्वयं सिद्धा हूँ ,स्वयं में सम्पूर्ण हूँ ।🌸
मुझमें आत्म बल की सम्पूर्णता है 🎉🎉

🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

टिप्पणियाँ

  1. बहुत खूबसूरत रचना....हार्दिक शुभकामनाएँ

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  2. सुन्दर ... मैं पूर्ण हूँ सम्पूर्ण हूँ ...
    सही है इस श्रृष्टि में यदि कोई पूर्ण है तो वो है नारी ... नमन है इस शक्ति को ....

    जवाब देंहटाएं
  3. जी दिगम्बर नवासा जी धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

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