*दर्द भी मुझे प्यारे हैं *

दर्द भी मुझे प्यारे हैं
सुख-और दुःख जीवन
की नदिया के दो किनारे हैं।

वक्त की मार भी
क्या खूब चीज़ है
जिस- जिस पर पड़ती है।
उस-उसकी कायापलट देती है।
कोई दर्द से बिखर जाता है ,
कोई दर्द में अपना अस्तित्व ही खो बैठता है ।
पर कुछ विरले ही होते हैं जो,
चोट खा-खाकर ,निखर जाते हैं ।
कुछ दर्द से टूट-टूट कर बिखरते तो है
पर बिखर-बिखर कर यूँ सवंरते हैं कि,
फौलाद से ऊँचे उनके इरादे ,
उनकी मिसाल क़ायम करते हैं ।
माना कि ,मैं भी टूट कर बहुत बिखरा
परन्तु उस दर्द का,उस वक्त का
बहुत-बहुत शुक्रिया ,जिसने मुझे
जीना सीखा दिया ।
दर्द भी मुझे अपने से प्यारे से लगे
क्योंकि उन दर्दों ने ही ,मुझे मुश्किलों से
लड़ना सिखाया ,हालात कैसे भी
हों ,मुस्कराना सिखाया ,मुश्किल हालातों
में टूट कर बिखरने की बजाय सम्भलना
और निखरना सिखाया ।
दर्द भी मुझे बहुत प्यारे हैं ।
क्योंकि मेरे मुश्किल हालातों के
यही तो खेवनहारे हैं।।








टिप्पणियाँ

  1. रितु जी, सही कहा आपने कि दर्द भी मुझे बहुत प्यारे हैं ।
    क्योंकि मेरे मुश्किल हालातों के
    यही तो खेवनहारे हैं।।

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  2. वाह्ह...बहुत सुंदर कविता रितु जी।

    जवाब देंहटाएं

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