संदेश

''कुछ तो लोग कहेंगे ''

जब ज़िंदगी के कैनवास के रंग लगने लगे  बेरंग-------- उसी क्षण  बदल  लेना अपने  जीवन जीने  का ढंग , उदासियों  का न  करना  कभी  संग , उदासियों  के कोहरे को  चीरते  हुए  आगे निकल जाना। 
 माना  कि जीवन है ,'जंग ' फिर भी  जीवन  के हैं कई  रंग।  दिल कि  सुनना , कुछ  तो  लोग कहेंगे , लोगों का ,काम  है कहना। ' रँग बिरंगे रंगो  से जीवन सजा लेना ,
परस्पर प्रेम  का दीप  जला लेना , उम्मीद कि नई किरण ढूंढ लेना , किरण जो ले जाए उजाले कि ओर, तुम्हें रोशन  करे और  सारे  जहाँ को रोशन कर जाए। 
जिंदगी  की जंग  में ,जगा के नई  उमंग।  खुशियों  के संग ,जब होगी नई तरंग।  तब होगा जीवन का शुभ आरम्भ।    

कहते हैं ना,देर आए पर दुरुस्त

सफलता  पर  सभी  का  अधिकार  है। कठिन  परिश्रम सच्ची  लगन  पूर्ण निष्ठा  से  कर्म  करने  के  बावजूद  कभी- कभी  हताशा  और  निराशा  मिलती  है । छोटी -छोटी  बातों  पर अमल  करके  सफलता  की  सीड़ियाँ  चढ़ा  जा  सकता  है। सीधा   सरल  सच्चा  रास्ता  थोड़ा लम्बा  और  कठनाइयों  भरा  हो  सकता  है परंतु   इसके  बाद  जो  सफलता मिलती है। वह चिरस्थाई   और  कल्याणकारी   होती                       “  कहते      हैं    ना  ,     देर     आए    पर    दुरुस्त     आए  ”      कई  बार  व्यक्ति  रातों -रातों  रात  सफल  होना  चाहता  है  वह कई  गलत   तरीके  अपनाता  है । और  सफल  भी  हो  जाता  है  परन्तु  वह  सफलता  टिकती नहीं  क्योंकि  खोखले  कमजोर  साधन  मजबूती  कैसे  दे  सकते  है । फिर शर्मिंदगी  का  सामना करना  पड़ता है।मन में किसी  तरह  का  द्वेष  किसी  का अहित  करने   की भावना या किसी का  अहित  होने का  भाव भी  हमारी  सफलता  में  बहुत बड़ी  बाधा  होता   है। अक्सर  लोग  मानते  हैं की  जितने  भी बड़े  सफल व्यक्ति  हैं।  उनकी  सफलता  के  पीछे  छल -कपट   की  बड़ी  भूमिका  होती  है परन्तु यह  बहुत  ही  गलत  सोच  …
चित्र
''  जिस दिल में मॊहब्बत होती है ''

बस यूँ ही मुस्कराता है गुनगुनाता है ,मुस्कराहटें लुटाता है। मोहब्ब्तों में सब सुंदर हो जाता है , मोहब्ब्तों  में इंसान खुदा  हो जाताहै। मोहब्बतों जिन दिलों में होती हैं उन चेहरों कि रौनके ही ख़ास होती है , दुनियाँ को देखने कि उनकी निगाहें भी ख़ास होती हैं आत्मिक सौन्दर्य से परिपूर्ण , वह  दिल नहीं मन्दिर होता है। प्रेम का समुन्दर लिए इतराता इठलाता अधरों पर गीत बन गुनगुनाता है।   प्रेम , बस यूँ ही मुस्कराता है , मीठी कशिश ,अनकहे शब्दों में सब कह जाता ,   प्रेम , तपती दोपहरी में वृक्ष कि छाया 'संगीत में सुरों कि तरह हवा में सुगंध कि तरह विलीन हो जाता है प्रेम , स्व्यं के लिए तो सभी जीते  है , जो दूसरों के  जीने के लिए जी जाता है , वही है, सच्चा प्रेम।
'''नया  जमाना  आएगा ''

अभी तक जितने नेता हुए , वह नेता जनता के वोटों के आधार पर चुनाव में जीतकर , भिन्न -भिन्न पदो पर मंत्री बन उस पद के कार्यक्षेत्र  कि अर्थव्यवस्था  का कार्य-भर सँभालते  हुए , राजा  बन राज्य करते आए।

आज़ दिन तक सभी नेता देश व् समाज कि भलाई व् सुरक्षा से अधिक  सवयं कि भलाई पर अधिक धयान देते आए हैं।    
जनता कि आवश्यक आवश्कताओं को पूरा करने कि बजाये अपनी आर्थिक  उन्नति पर विशेष ध्यान केन्द्रित करते आये हैं।
मंत्री बनते ही नेताओं के तेवर बदल जाते हैं। वेह मंत्री जो देश व् समाज कि रक्षा के लिए होता है।  सबसे पहले उसकी सुरक्षा के कड़े इन्तजाम हो जाते हैं ,फिर चाहे देश कि सुरक्षा ,उसके लिए जान कि बाजी लगते हैं , हमारे सुरक्षा अधकारी ,देश कि पुलिस और देश का सैनिक।

दूसरी तरफ देश का महा नायक ''अरविन्द केजरीवाल जी ''अपनी सुरक्षा के इंतजामों को ठुकरा कर एक आम  आदमी कि तरह रहना चाहा , यह उनकी महानता को दर्शाता है ,   शायद इसी को  कहते हैं ,


'' सिंपल लिविंग हाई थिंकिंग  ''    पहली बार…
'' अग्निकुंड ''   


  क्रोध यानि उत्तेजना ,क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।
 क्रोध करने वाला स्वयं के लिए अग्नि-कुंड बनाता है ,और उस अग्नि में सवयं को धीरे -धीरे जलाता है। कुछ लोग मानते हैं
 कि ,क्रोध उनका हथियार है ,सब उनसे डरते हैं ,उनकी ईज्जत करते हैं।
परन्तु क्रोधी स्व्भाव का व्यक्ति यह नहीं जानता कि जो लोग उसके  सामने आँखे नीची करके बात करते हैं ,जी -हजूरी करते हैं वह सब दिखावा है
। वास्तव में वह  क्रोधी व्यक्ति कि इज्ज़त नहीं करते ,पीठ पीछे
 क्रोधी व्यक्ति को खडूस ,नकचढ़ा ,एटमबम ,इत्यादि ना जाने क्या -क्या नाम   देते है। इसके विपरीत सीधे सरल लोगों के प्रति सम भाव रखते हैं।

आज के मानव ने सवयं के आगे पीछे बहुत  कूड़ा -करकट इ क्क्ठा कर रखा है। सवयं के बारे में सोचने का आज के मानव के  पास समय ही नहीं है।  वास्तव में मानव को यह ज्ञात ही नहीं या यूँ कहिए कि ,उसे ज्ञात ही नहीं कि वास्तव में वह चाहता क्या है। 
क्यों कहाँ कैसे किसलिए  वह जी रहा है
। सामाजिक क्रिया -कलापों में सवयं को बुरी तरह जकड़ कर रखा है। बस करना है  ,चाहे रास्ता पतन कि और क्यों न ले जाए।  
 क्योंकि सब चल रह…
''दिल रो पड़ा ''
यात्राएं तो मैने बहुत कि हैं। पर कुछ यात्राएं असमरणीय होती हैं। दिलों दिमाग़ पर अमिट छाप छोड़ जाती हैं। 
महानगरों कि यात्राएं सुविधाओं से पूर्ण होती हैं। 
परन्तु एक बार हमने एक यात्रा के दौरान ट्रैफिक से बचने के लिए हाईवे का रास्ता छोड़ उस रास्ते से यात्रा करनी चाही जिस पर ट्रैफिक का नाम न हो।हाईवे के मुक़ाबले वेह रास्ता काफी कम समय में हमें हमारी मन्जिल तक पहुँचा सकता था। समय बचाने के चक्कर में हमने शार्ट -कट रास्ता अपनाया ,वह रास्ता गावों से होकर जाता था। गावों कि कच्ची सडकें ,समझ नहीं आ रहा था कि सड़को में गढ्ढो हैं या गढ्ढो में सड़क ,गाड़ी में बैठे -बैठे हम उछल रहे थे ,तीन घण्टों में एक भी पल हम चैन से नहीं बैठे ,इतने झूले बचपन में झूले -झूले भी उसके आगे कुछ नहीं थे। गावों के कच्ची मिट्टी से बने घऱ जो एक परिवार के लिए बस सर छिपाने के लिए बस छत भर ही थे ,बरसात के पानी से बचने के लिए छतों पर बिछाये गयी त्रिपाल इत्यादि ठिठुरती सर्दी में तन दो साधारण वस्त्र उस पर शाल या साफ़ा पैरों में मौजों का नाम नहीं बस  साधारण सी चप्पल, उन्हें दे…

सुख समृद्धि

"लक्ष्मी जी संग सरस्वती जी भी आति  आवशयक  है"
शुभ दीपावली ,दीपावली में लक्ष्मी जी के पूजन का विशेष महत्व है,क्यों ना हो लक्ष्मी जी विशेष स्थान ,क्योंकि लक्ष्मी जी ही तो हैं जो,ऋद्धि -सिद्धि धन ऐश्वर्य कि दात्री हैं। परन्तु कहते हैं ,लक्ष्मी चंचल होती है वह एक जगह टिकती नहीं ,इसलिये लक्ष्मी जी के साथ सरस्वती जी का स्वागत भी होना चहिये ,सरस्वतीजी बुद्धि ज्ञान विवेक कि दात्री हैं,लक्ष्मी का वाहन उल्लू है ,यह बात तो सच है कि लक्ष्मी के बिना सारे ऐश्वर्य अधूरे हैं ,परन्तु एक विवेक ही तो है जो हमें भले -और बुरे में अन्तर बताता है।
दीपावली के दिन स्व्छता का भी विशेष महत्व होता  है ,क्योंकि स्व्च्छ स्थान पर देवों का वास होता है। दीपावली के दिन  ऋद्धि- सिद्धि कि देवी सुख समृद्धि के साथ जब घर -घर जायें तो उन्हें सवच्छ सुंदर प्रकाश से परिपूर्ण वातावरण मिले और वो वहीं रुक जाएँ। दीपावली के दिन पारम्परिक मिट्टी के दीयों को सुंदर ढंग से सजाकर पारम्परिक रंगों से रंगोली बनाकर माँ लक्ष्मी का स्वागत करना चाहिए।  आवश्यक नहीं की मूलयवान सजावटी समानो से ही अच्छा स्वागत हो सकता है। भगवान  तो भाव …