दीपक तो हम जलाएंगे ही


*दीपक तो हम जलाएंगे ही
अंधेरा भी दूर भी भगाएंगें ही
 विरासत में जो हमें उच्च
 नैतिक संस्कारो की सम्पदा
 की वसीयत मिली है *

*हम विचारों को उच्चतम स्तर पर
पहुंचाकर मन के अन्धकार को दूर
करने को उच्च संस्कारों के बीज बोते हैं
आने वाले समाज को प्रकशित करने की
जो हमने ठानी है।

परस्पर प्रेम की ज्योति से
उच्च संस्कारों की तरलता से
अमन ,शांति के दीपक से
धरती को हम स्वर्ग बनाएं ।

भारतीयों की विरासत में
रामायण ,भागवतगीता ,वेद,उपनिषद्
आदि ग्रंथ प्रदान किए जाते है
भारतीय परम्परा लेने में नहीं देने में विश्वास करती है
और देता वही है जो स्वयं में बड़ा हो वृक्ष हो
जिसे अपनी जड़ों पर सम्पूर्ण विश्वास हो
ध्रुव,प्रहलाद की दृढ़ इच्छाशक्ति
विवेकानंद जैसी आत्मशक्ति
घर घर प्रेम की ज्योत जलेगी
वसुंधरा तब स्वर्ग बनेगी





2 टिप्‍पणियां:

  1. परस्पर प्रेम की ज्योति से
    उच्च संस्कारों की तरलता से
    अमन ,शांति के दीपक से
    धरती को हम स्वर्ग बनाएं ।
    बहुत सुंदर रचना, रितु।

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