नकारत्मकता से सकारात्मकता की और***

**नकारत्मकता से सकारात्मकता की और***
                ****************************💐💐

**करने को तो मैं कुछ अच्छा चला था जमाने में,
 एक रोग मुझे लग गया ।
 दूसरों की बुराइयाँ ,और कमियाँ निकालने में मैं व्यस्त हो    गया ।😢

☺व्यस्त इतना हुआ कि ?

करने को तो मैं कुछ अच्छा चला था जमाने में
मुझे ही रोग लग गया ,बुराइयाँ देखते-देखते
मैं ही अब बुरा हो गया ।😢

अचानक मेरी दृष्टि बदली,मेरी आत्मा से आवाज आयी
वो मुझे धिक्कारने लगी......
शर्म से मेरी आँख झुक गयी
अश्रुओं ने मेरी की धुलाई😢😢

मेरी आत्मा ने ,परमात्मा के आगे
शीश झुका के क़सम अब खायी
नहीं देखूँगा ,में किसी की बुराई।☺

बुराई को अच्छाई में बदलने की मेरी सोच बन आयी
नकारात्मक से सकारात्मक दृष्टि मैंने पायी
नकरात्मक सोच से करके विदाई
अब सकारत्मकता के बीज मैं बोता हूँ 💐

बुराईयों की झाड़ काट-काट कर
अब अच्छाइयों के बीज बोता रहता हूँ💐💐
भले ही कुछ वक्त लगे ,पर एक दिन तो
बुराइयाँ खत्म हो जायेंगी ,अच्छाइयों
की फ़सल लहलहायेगी ।💐💐💐💐💐

टिप्पणियाँ

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 23 जून 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    उत्तर
    1. यशोदा जी धन्यवाद आभार ,मेरी लिखी रचना को halchalwith5links में शामिल करने के लिये ।

      हटाएं
  2. सत्य कहा आदरणीय हमें दूसरों की अच्छी बातों की ओर गौर करना चाहिए न की बुरी सुन्दर ! प्रेरणादायक
    आभार। "एकलव्य"

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    1. ध्रुव सिंह जी आपकी टिप्पणी मेरे लिये बहुत महत्वपूर्ण है।

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  3. खुद के अंदर झांककर खुद का मूल्यांकन करना बहुत जरूरी होता है । बहुत ही खूबसूरत रचना की प्रस्तुति हुई है । बहुत खूब आदरणीया ।

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    1. राजेश कुमार जी आपका शुक्रिया ।

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  4. दूसरो की बुराई करने मे जो वक्त जाया करते हैं
    वही अपनी मंजिल से अक्सर भटकते फिरते है
    बहुत सुन्दर सीख देती रचना...

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    1. सही कहा सुधा जी आपकी टिप्पणी मेरे उत्साह वर्जन के लिये बहुत महत्वपूर्ण है ।

      हटाएं
  5. आत्म निरीक्षण को प्रेरित करती सुंदर रचना।

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    1. जी रविन्द्र जी आभार सहित धन्यवाद ।

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  6. आमीन ... काश ऐसा ही हो और सभी में ऐसी चेतना आए तो समाज की कल्पना सुखमय हो जायेगी ...

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    1. जी दिगम्बर नवासा जी आपकी टिप्पियाँ हमारा उत्साह बढ़ाती हैं ।

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  7. जिस दिन हम दूसरों की बुराइयां देखने की आदत छोड़कर अच्छाइयां देकह्ने की आदत डालेंगे उस दिन सहीं मायने में हम अच्छाइयों की ओर अग्रेसर होंगे। सुंदर प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  8. जी ज्योति जी आभार हम सब को अपनी सोच को नकरात्मक से सकारात्मक की और ले जानी होगी

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  9. जी ज्योति जी आभार हम सब को अपनी सोच को नकरात्मक से सकारात्मक की और ले जानी होगी

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