गर्मी, गर्मी, गर्मी.....

गर्मी, गर्मी, गर्मी
क्या इस बार कुछ विशेष है कि इस बार गर्मी अधिक पड़ रही है बताइए?
नहीं बता सकते ना, जानते आप सब हैं इस सब का कारण हम मनुष्य ही हैं जंगलों का कटान वृक्षों का कम होना ऊंची ऊंची इमारतें फिर अप्राकृतिक साधनों का अधिक से अधिक उपयोग करना यातायात के लिए अत्याधिक वाहनों का होना फिर उन से निकलती जहरीली गैसों का वायु मंडल में फैलना आप बताओ वायु प्रदूषण तो स्वयं ही हुआ ना तापमान का बढ़ना भी स्वाभाविक है
क्या परमात्मा ने इस बार गर्मी बढ़ा दी है
तापमान इतना क्यों बढ़ गया है हे भगवान, इटनी गर्मी क्यों हो रही है ।
अब बताओ क्या इसका भी कारण भगवान हैं।
 अरे नहीं भगवान ने तो धरती बनाई सूरज चांद सितारे यथावत अपने अपने कार्यों में संलग्न है ।

क्या सूर्य का तापमान बढ़ गया है

जी नहीं दोषी तो हम मानव ही हैं हमारे ही कर्मों का फल है तापमान में इतनी वृद्धि पिघलते ग्लेशियर ओजोन परत में छिद्र प्रदूषण इन सब का कारण हम मनुष्य ही हैं हम मनुष्य का स्वार्थवाद..

मनुष्य आगे बढ़ने की होड़ में सिर्फ भागता चला जा रहा है बस आगे बढ़ना है होड़ लगी है उसके लिए चाहे कोई भी और कैसा भी उपाय करना पड़े चाहे अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारना पड़े।
 और हो भी रहा है मनुष्य स्वयं ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है अपने ही वातावरण को जिसमें वह स्वयं रहता है उसी वायु को दूषित कर रहा है यातायात के साधनों का अधिकतम से  अधिकतम उपयोग कर आज मनुष्य स्वयं को महारथी समझ रहा है इसके परिणाम को जानते हुए भी नहीं जानना चाह रहा है,
 बस दिखावे की जिंदगी जी रहा है आज का मानव

 वायु प्रदूषण तापमान में तेजी , ए मनुष्य तुम्हें किसी को भला- बुरा कहने का हक नहीं है किसी भी परिवर्तन का मुख्य कारण तुम स्वयं ही हो अगर तुम चाहते हो यह धरती फिर से पहले जैसी हो जाए तो अधिक से अधिक वृक्षों का रोपण करो ।

लग्जरी संसाधनों का कम से कम उपयोग करो अपनी शान शौकत दिखाने के लिए महंगी गाड़ियों के उपयोग पर लो रोक लगाओ जब धरती ही तुम्हारे रहने लायक नहीं रहेंगे तो बताओ यह शानो शौकत किस काम की होगी।
 पहले धरती को यानी धरती मां को सुरक्षित करो ऐसे संसाधन जिससे तुम्हारी धरती मां को जिस में तुम रहते हो जिसमें तुम्हारे आशियाने हैं उसे सुंदर बनाओ।
 उसका दुरुपयोग नहीं करो फिर देखो धरती भी तुम्हें स्वर्ग जैसी लगेगी

टिप्पणियाँ

  1. बेहतरीन लेख लिखा आपने अभी भी देर नहीं हुई है यदि इंसान प्रकृति को सहेजना शुरू कर दें नदियों में कचरा डालना छोड़ दे तो हमारी धरती हरी-भरी और नदियों का जल निर्मल हो सकता है। बहुत सुंदर प्रस्तुति ऋतु जी

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 03/06/2019 की बुलेटिन, " इस मौसम में रखें बच्चो का ख़ास ख़्याल - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. आदरणीय शुक्रिया आभार मेरे द्वारा रचित लेख को ब्लॉग बुलेटिन में शामिल करने के लिए

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  4. नमस्कार !
    आपकी लिखी रचना "साप्ताहिक मुखरित मौन में" शनिवार 8 जून 2019 को साझा की गई है......... "साप्ताहिक मुखरित मौन" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आदरणीया आभार मेरी लिखी रचना को साप्ताहिक मुखरित मौन में सम्मलित्त करने के लिए जी शुक्रिया

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  5. बेहतरीन समसामयिक आलेख.लिखा हे आपने विचारणीय तथ्य और प्रश्न हैं।

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