विचार,एहसास और भाव

मैं लिखती हूं की
मेरे पास भाव हैं 
एहसास हैं।
विचार हैं , 
स्वयं में पनपते 
विचारों को सही दिशा
रूप -रेखा एवं आकार देकर
या यूं कहिए अपने विचारों को
सजा संवार कर एक दुल्हन की तरह
सीमा पर तैनात रक्षप्रहरी की भांति
विद्यालय में शिक्षक की तरह ,घर में माता और
गुरुजन की तरह तैयार करके समाज के समक्ष 
प्रस्तुत करती हूं।
मेरे विचार मेरी निजी संपत्ति है ।
मेरा मेरे विचारों पर पूर्ण अधिकार है ।
अगर मेरे विचार किसी के कहने देखने और बहकाने 
से भड़कते हैं तो इसका तात्पर्य  मैं कमजोर हूं 
गुलाम हूं ,मुझे अपने विचारों पर अपना नियंत्रण करना ही नहीं आया ।
अतः मेरा तो यही मानना है पहले स्वयं के विचारों पर नियंत्रण करना सीखिए । किसी अन्य को दोष देने से कुछ नहीं होगा ।
अपने विचारों को इतना श्रेष्ठ बनाइए की बदल जाए  
दुनियां आपके विचारों से प्रेरित होकर ।


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