*चिकित्सकों के सम्मान में*

**चिकित्सक **
**परमात्मा तन के पिंजरे में आत्मा रूपी ज्योत देकर जीवनदान देता है।
धरती पर जीवन जीते -जीते तन में कई संक्रमण हो जाते हैं जिससे शरीर रोगी बन कष्ट भोगता है ।
कई बार कुछ ऐसे संक्रमण भी होते हैं  जो शरीर के लिए अत्यन्त कष्टदाई और जानलेवा होते हैं ।
तन की ऐसी कई बीमारियों और कष्टों से छुटकारा पाने के लिए धरती पर कई जड़ी-बूटियां औषधि रूप में उपलब्ध हैं जिसके लिए गहन अध्ययन और शोधों की आवयश्कता पड़ती है ।
 रसायन विज्ञान के गहन अध्ययन व कठिन शिक्षा करने वाला एक चिकित्सक ,यानि एक डॉक्टर बनता है यह राह इतनी आसान भी नहीं पूरी पद्धति और कई वर्षों के गहन अध्ययन के बाद एक चिकित्सक तैयार होता है ।
एक चिकित्सक शपथ प्रार्थी होता है कि पूरी निष्ठा और भेदभाव के किसी भी रोगी के रोग का दूर करने में अपना सर्वोत्तम देगा ।
यह कभी नहीं सोचना की डॉक्टर को कोई लालच होता है,एक डॉक्टर का संपूर्ण जीवन लोगों के कष्ट दूर करने में ही व्यतीत हो जाता है।
अतः परमात्मा द्वारा प्राप्त आत्मा की ज्योत तो नित्य अमर है ।
परंतु यही ज्योत जब शरीर में प्रवेश करती है,तब मनुष्य जीवन का प्रारम्भ होता है ,
धरती पर रहते-रहते शरीर को कई असहनीय कष्ट और बीमारियां हो जाती हैं जिन कष्टों और बीमारियों से एक डॉक्टर बाहर निकलने में अपना संपूर्ण सहयोग प्रदान करता है ।

अतः एक चिकित्सक का संपूर्ण सम्मान कीजिए जब कोई भी मनुष्य किसी बीमारी के कष्ट से पीड़ा में होता है, तब वह एक चिकित्सक के पास ही जाता है चिकित्सक भी पूरी निष्ठा से रोगियों के रोग को दूर करने के लिए औषधियां देता है और यथायोग्य उपचार करता है ।

टिप्पणियाँ

  1. सही कहा आपने ऋतु जी डॉक्टर दिन-रात एककर मरीजों की सेवा में समर्पित रहते हैं। बेहतरीन प्रस्तुति

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  2. सामान जरूर होना चाहिए... डाक्टर को भी अपने गर्ताव्य का भान होना चाहिये ... ये महत्त्व दोनों और से बना रहना जरूरी है ... और वैसे भी क़ानून हाथ में लेना बिलकुल गलत है ...

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