स्वर्णिम आभा और दिव्य आलौकिक
प्रकाश पवित्र स्थल स्वर्ण मंदिर
दिव्य प्रकाश का तेज
सरोवर में देदीप्यमान स्वर्ण मंदिर
अद्भुत ,अकल्पनीय ,अवर्णनीय
चांद था ,चांदनी थी ,
झिलमिल सितारों की बारात थी
चांदनी की आगोश में सारा समा था
श्वेत, निर्मल,सादगी में सौंदर्य की चरमसीमा
सोलह कला सम्पूर्ण
आसमान से चांदनी बरस रही थी
सरोवर में यूं नहा रही थी मानों कई
परीयां जल में विहार कर रही हो

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

" हम जैसा सोचते हैं ,वैसा ही बनने लगते हैं "

👍 बचपन के खट्टे मीठे अनुभव👍😉😂😂

" कुदरत के नियम "