आदतों के गुलाम मत  बनो
  मनुष्य आदतों का गुलाम बनारहता है।  आदतें क्या हैं ,जिन्हें हम कई बार छोड़ना तो चाहतें हैं ,परन्तु छोड़ नहीं पाते। किसी भी आदत के आभाव में जब मनुष्य स्वयं को असहज महसूस करता है,तब वह आदत उसकी कमजोरी बन जाती है। आदतें क्या हैं ,आदतें दो प्रकार की  होती हैं ,एक अच्छी आदतें ,दूसरा बुरी आदतें। परन्तु आदतें अच्छी हों या बुरी  उनका गुलाम बन जाना उचित नहीं।

वास्तव में होता क्या है ,कि कोई मनुष्य किसी आदत को छोड़ना भी चहता है पर छोड़ नहीं पाता ,सोचता है की लोग क्या कहेगे ,मनुष्य स्वयं के बारे से ज्यादा  समाज के बारे में सोचता है. मनुष्य को समाज की चिंता अधिक होती है। मनुष्य अगर स्वयम में बदलाव भी लाता है तो समाज को ध्यान में रखकर लता है।
आज के आधुनिक समाज में अपना प्रभाव दिखाने के लिए कई बुरी आदतों को अपना लिया जाता है ,अंजाम चाहे जो भी हो,उदाहरण  के लिए ,अरे यार कुछ तो अपना लाइफ स्टाइल बदलों अगर मेरे पास इतना पैसा होता ,तो मेरा लाइफ -स्टाइल देखते बिलकुल बदल जाता। मेरे तो पैर ही जमीन पर नहीं पड़ते। दो -चार नौकर गाड़ीयाँ तो जरुर रखता समाज में आज तुम्हारी पहचान है। बदलाव तो लाना ही होगा। मनुष्य स्वयम के लिए नहीं वरन समाज के कई आदतों का संग करता है।

प्रत्येक व्यक्ति की अपनी ज़िन्दगी है। किसे क्या चाहिए उसे मालूम होता है।  वह स्वयं को नहीं बदलना चाहता है ।  प्रत्येक मनुष्य की इच्छा है वो जो चाहे करे।

बदले तो यूँ   बदले आपके लिए समाज स्वयं को बदलने लगे।  समाज आपसे प्रभावित हो जाये।  आपका आचरण आपकी आदतें  ज़िन्दगी की रोशनी बढ़ाये , आपकी और समाज की प्रगति हो जाये।  अच्छी  आदतों का संग करें , बुरी आदतों को कभी न स्वीकारें।  

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