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भावों का सार

विचार अभिव्यक्ति को विचारों का मंथन तो अवश्य होता है किन्तु भावों की उलझन में भावों की खिचड़ी ही बन जाती है ।ना भाव रहते हैं ना भावों का सार सारा रस ही समाप्त हो जाता है और वास्तविक विचार स्वाहा हो जाता है विचार अभिव्यक्ति की उलझन में ।विपरीत परिस्थितियां विपरीत हालात फिर भी जीने का हो मस्त अंदाजजिंदादिली से जीने कला हौसलों में हो उड़ान ,मुश्किलों को हंसकर पार कर जाना जिसकी शान  किस्मत के हाथों बदल ही जाते हैं उसके हालत । 





प्रयास

प्रयास करना ए मानव तुम कभी ना छोड़ना आस  उम्मीद के साथ हौसलों को सदा संग रखना कर्मठता पर  अपनी विश्वास जिन्दगी जीत का जश्न भी है तो हार त्रुटियों को सुधार ने की कलाहार निराशा नहीं परीक्षा भी है ज़रा संभल कर चलना ए मानव कहीं ऊंचे पहाड़ हैं तो कई गहरी खाई भी खूबसूरती के आकर्षण में कांटो की चुभन भी बहुत है कहीं ऊंचे पहाड़ हैं तो कई गहरी खाई भी परिश्रम जिन्दगी का एक पहलू जीत है तो एक हार भी  जीत के जश्न में अहंकार के नशे के संग हार का दर्द भी है 

हिंदी हिंदुस्तान का गौरव

"हिन्दुस्तान" का गौरव ,हिंदी मेरी मातृ भाषा, हिंदुस्तान की पहचान हिंदुस्तान का गौरव "हिंदी" मेरी मातृ भाषा का इतिहास सनातन ,श्रेष्ठ,एवम् सर्वोत्तम है ।भाषा विहीन मनुष्य पशु सामान है ,भाषा ही वह साधन है जिसके द्वारा हम अपने विचारों को शब्दों और वाक्यों के माध्यम से एक दूसरे से अपनी बात कह सकते हैं और भव प्रकट कर सकते हैं ।हिंदी मात्र भाषा ही नहीं, हिंदी संस्कृति है,इतिहास है,हिंदी इतिहास की वह स्वर्णिम भाषा है जिसमें अनेक महान वेद ग्रंथो के ज्ञान का भण्डार संग्रहित है । अपनी मातृ भाषा को छोड़कर किसी अन्य भाषा को अपनाना स्वयं का एवम अपने माता - पिता  के अपमान जैसा हैं ।मातृ भाषा से मातृत्व के भाव झलकते है ।हिन्दी मेरी मातृ भाषा मां तुल्य पूजनीय है ।जिस भाषा को बोलकर सर्वप्रथम मैंने अपने भावों को प्रकट किया उस उस मातृ भाषा को मेरा शत-शत नमन ।जिस प्रकार हमें जन्म देने वाली माता पूजनीय होती है उसी तरह अपनी मातृ भूमि अपनी मातृ भाषा भी पूजनीय होनी चाहिए ।मातृ भाषा का सम्मान ,यानि मां का सम्मान मातृ भूमि का सम्मान ।  मां तो मां होती ,और मां सिर्फ एक ही होती है ,बाकी सब मा…

*जमाना खराब है *

"होश की बातें करते हैं वो जो नशे में सदा रहते हैं स्वयं आदतों के गुलाम है और दुनियां की आजादी की बातें करते हैं ""देकर उदहारण ,जमाना खराब काकैद में रखकर आजादी कोस्वतंत्रता , स्वालभिलंब,एवम् शसक्तीकरण का ऐलान करते हैंनियत खराब है ,कहने वालों नियत जिसकी खराब है ,दोषी वह है ,जिसकी सोच बुरी है  फिर सच्चाई के पैरों में जंजीरे क्यों""कैद करना है सजा देनी है तो उस गलत सोच को दो जो अच्छाई को भी अपनी बुरी और गलत  सोच और दृष्टि से दूषित करने की सोचती है ""बेडीयां डालनी है जो  जमाना खराब है उस खराब जमाने पर डालो अच्छाई की सांसोंको खुली हवा में सांस लेने दो "



*वाइरस *

आज के युग में विषेले जीवाणु को  पहचान पाना आसान है ,बजाय  मनुष्य के ......मन में पनप रहे नफरत के जहर को वाइरस के संक्रमण का डर सच्चा है  उसमें संक्रमण है वो छुपता नहीं किंतु मनुष्य की क्या कहिए किसके  भीतर कितना और कैसा जहर भरा है वह अदृश्य ही रहता है ।  चेहरे पर मुस्कान मीठी  छुरी शब्दों की चासनी दिलों में जहर धोखा बेईमानी  भरी जो अदृश्य इसलिए मनुष्य से बेहतर तो वह  जीवाणु ही है जिस के संक्रमण का  डर साक्षात है जिससे स्वयं की  रक्षा के बचाव किए जा सकते हैं  किन्तु मनुष्यों के मन में भरे जहर  नकारात्मक विचारों के जहर का क्या कीजिए हम मनुष्य हैं शिव तो नहीं जहर को पीकर अमर होना हमें नहीं आता नफरत ,लोभ , कपट का जहर  जीवन का  कहर  रोग मधुमेह का बन जीवन का जब होता है अंत सामने वाला बन संत  लुत्फ उठाता है जीवन के कतल का घिनौना अंत । किन्तु सत्य तो शाश्वत है ,सनातन है  कब तक छिपेगा कोहरे में सत्य का सूरज  जब कोहरा हटेगा ,तब होगा सत्य के प्रकाश का उजाला।

जागृति की मशाल

कविता मात्र शब्दों का मेल नहींवाक्यों के जोड़ - तोड़ का खेल भी नहींकविता विचारों का प्रवाह हैआत्मा की गहराई में से समुद्र मंथन के पश्चात निकली शुद्ध पवित्र एवम् परिपक्व विचारो के अमूल्य रत्नों का अमृतपान है धैर्य की पूंजी सौंदर्य की पवित्रताप्रकृति सा आभूषण धरती सा धैर्यअनन्त आकाश में रोशन होते असंख्य  सितारों के दिव्य तेज का पुंज चंद्रमा सी शीतलता का एहसास सूर्य के तेज से तपती काव्य धारा स्वच्छ निर्मल जल की तरलता का प्रवाहकाव्य अंतरिक्ष के रहस्यमयी त्थयों की परिकल्पना का सार  है, साका रत्मक विचारो के जागृति की  मशाल होती है।





मनमर्जीयां

इस उम्र मैं यह सब अच्छा नहीं लगता तुम पर मां ...      .. लोग क्या कहेंगे मां..   मां हैरान थी, अपनी बेटी की बातें सुनकर , सोच रही थी क्या यही क्या यह वही बेटी है जिसे कल मैंने उंगली पकड़कर चलना सिखाया था सही और गलत में भेद बताया था आज यही बेटी मुझे सही और गलत का भेद बता रही है यूं तो मां मन ही मन गर्व महसूस कर रही थी कि उसकी बेटीअब इतनी समझदार हो गई है कि वह अपनी मां को अच्छा और बुरा समझा सकें, परंतु आज मां स्वयं को जीवन के एक ऐसे मोड़ पर खड़ा पा रही थी जहां मनुष्य जीवन में एक बदलाव जरूर आता है।
     मांअपने बच्चों की बातें सुनकर कुछ पल के लिए अतीत की यादों में खो गई, उसे याद आने लगे वह पल जब उम्र के एक पड़ाव में उसके बच्चों में एक बदलाव आने लगा था जिसे देख कर मां के मन में भी कुछ विचार उमड़-घुमड़ करने लगे थे।
    आज इस स्थिति में मां को महसूस हो रहा था की जिंदगी के कुछ पड़ाव ऐसे होते हैं ,  जब इंसानी प्रवृत्ति में बदलाव आता है यही बदलाव मां ने अपने बच्चों में उस वक्त देखा था जब वह बचपन से जवानी की और बढ़ रहे थे मां अपने बच्चों के क्रियाकलापों पर हर पल ध्यान रखती थी उसका ध्यान रखना भ…

मित्र मेरी फिक्र

मेरे आने की आहट भी वो पहचानता है वो मेरी फिक्र करता है वो अक्सर दिन रात मेरा ही जिक्र करता हैमुझे बेझिझक डांटता है मुझ पर ही हुक्म चलाता है मेरी कमियां गिन गिन कर मुझे बताता है कभी कभी वो मुझे मेरा हम मीत मेरा दुश्मन सा लगता है मगर वो मुझे अपने आप से भी अजीज हैवो मेरा मित्र मेरे जीवन का इत्र जिसका मैं अक्सर और वो मेरा अक्सर करता है जिक्र मेरा मित्र मेरे जीवन का है इत्र ।उसे मेरी और मुझे उसकी हरपल रहती है फिक्र ।

वक़्त बदलता है

वक़्त के बदलते रूप  वक़्त कभी एक सामान नहीं रहता  वक़्त का पहिया निरंतर चलता ही रहता है वक़्त बदलना प्रकृति का नियम है  वक़्त बदलना आवयश्कता का रूप है वक़्त एहसास कराता है 
धूप छांव दिन-रात साक्षात उदहारण है,  बदलते वक़्त के .... युग बदलते हैं ,सभ्यता संस्कृति सोच  एवम् कार्य करने के ढंग बदलते है  वक़्त एवम् काल नए आविष्कारों के भी जननी है आवयश्क है वक़्त का बदलना भी  बदलाव एवम् परिवर्तन हमें एहसास कराता है की आज सुख है तो कल कष्ट भी हो सकता है  कहीं रास्ते समतल है तो कहीं पथरीले भी हो सकते हैं  कहीं ऊंचे पहाड़ तो कहीं गहरी खाई  भी हो सकती है ,सुख-दुःख हार-जीत  मनुष्य को जीवन सहनशीलता एवम्  धैर्य  के गुण सिखाता है बचपन,जवानी,बुढ़ापा,मानव जीवन के रथ का  पहिया जो नए रूप दिखाता है  स्वस्थ जीवन मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है किसी काल में कोई महामारी  मनुष्य प्राणों पर करती है प्रहार   संयम,धैर्य,एवम् सावधानी ही होता है जिसका उपचार बदलते संसार का बदलता व्यवहार
यूं तो कभी नहीं रुकता संसार
प्राकृतिक संपदाओं की वसीयत मनुष्य जीवन को दिव्य भेंट  सृष्टि की संरचना  प्राणियों की उत्पति धरती पर जीवन  परमात्मा द्वारा सुव्यवस्था सुंदरतम उपहार  जीविका के साधनों की भरमार रहस्यमयी प्रकृति अनमोल  प्राकृतिक संपदाओं केअद्वितीय स्रोत सूर्य का दिव्य तेज जीवन जीने का वेग  परमात्मा की अद्भुत भेंट मनुष्य मन समाहित  प्रकृति जिससे धरती पर जीवन  यह कहना अतश्योक्ती होगी कि प्राणियों से प्रकृति है ,प्रकृति प्राणियों की  परमात्मा प्रदत अनमोल सम्पदा है सम्पदा का संरक्षण सदुपयोग जीवन को   दीर्घ आयु स्वस्थ एवम् समृद्ध रखता है  वहीं दुरुपयोग स्वयं के ही पैरो पर कुल्हाड़ी के सामान है हे मनुष्य सम्भल प्रकृति धरती की सम्पदा है  वसीयत है जो परमात्मा से धरती पर प्राणियों को मिली है वसीयत की कर संभाल तुम्हारे बुरे समय की ढाल प्रकृति का के संरक्षण जीवन का 










*लेखनी*

**** स्वर्ग  से सुंदर समाज की कल्पना
     यही एक लेखक की इबादत होती है
     हर तरफ खूबसूरत देखने की एक
     सच्चे लेखक की आदत होती है ***
     अन्याय, अहिंसा, भेदभाव,
     देख दुनियां का वयभिचार ,अत्याचार
     एक लेखक की आत्मा जब रोती है
     तब एक लेखक की लेखनी
     तलवार बनकर चलती है
     और समाज में पनप रही वैमनस्य की
     भावना का अंत करने में अपना
     महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करती है
     विचारों की पवित्र गंगा की धारा
     सर्व जन हिताय हेतु ,
     सुसंस्कृत,सुशिक्षित, समाज की स्थापना
     का आदर्श लिए , शब्दों के तीखे, बाणों
     के जब तीर चलाती तब ,वो इतिहास रचती है ,
     युगों-युगों तक आने वाले समाज का मार्गदर्शन
     करती है ।
     लिखने को तो लेखक की लेखनी लिखती है
     एक अद्वितीय शक्ति उसको प्रेरित करती है
     तभी तो ऐतिहासिक,रहस्यमयी, सच्ची घटनाओं
    की तस्वीरें कविताओं ,कहानियों आदि के रूप में
    युगों- युगों तक जन मानस के लिए प्रेरणास्रोत        बन जन मानस के हृदयपटल पर राज करती हैं ।


aksshaygaurav@gmail.com स्वर्ग से सुंदर समाज की कल्पना यही एक लेखक की इबादत …

श्रम

*श्रम ही धर्म* श्रम की अराधना से मिटती है मुझ  श्रमिक के जीवन  की हर यातना  होकर मजबूर बनकर मजदूर    अपनों से दूर  जीविका की खातिर रुख करता हूं शहरों की ओर गांव की शांति से दूर शहरों का  भयावह शोर, ढालता हूं स्वयं को तपाता हूं तन को,बहलाता हूं मन को शहरों की विशाल,भव्य इमारतों में मुझ श्रमिक का रक्त पसीना भी चीना जाता शहरों की प्रग्रती और समृद्धि की  नींव मुझ जैसे अनगिनत श्रमिकों की देन है कभी -कभी शहर की भीड़ में खो जाता हूं  जब किसी महामारी के काल में, बैचैन, व्याकुल पैदल ही लौट चलता हूं ,मीलों मील अपनों  के पास अपने गांव अपने घर अपनों के बीच  अपनत्व की चाह में । स्वरचित :- ऋतु असूजा ऋषिकेश ।

धरा के भगवान

कैसे कह दूं उन्हें मात्र इंसान
कहते हैं जिन्हें धरा के भगवान
या कहें फ़रिश्ते ए आसमान
जीव विज्ञान का अद्भुत ज्ञान
कठिन साधना का परिणाम
जीव विज्ञान का अद्भुत ज्ञान
जीवन एक तपस्या जिनकी
दूर करने को प्रतिबद्ध शारीरिक एवं
मानसिक समस्या असाध्य रोंगों से घिरा
इंसान ढूंढ़ता है एक चिकत्सक के रूप में भगवान
 जब खतरे में होती है मनुष्य जीवन के प्राण
जीवन और मृत्यु की जंग में बनकर रक्षा प्रेहरी
करते हैं समस्त प्रयास और देते हैं जीवन दान
हमें गर्व है  आप सब चिकित्सकों पर, महान योद्धा ओं पर महामारी के संकटकाल में जब देश के सभी लोग अपने -अपने घरों में बैठे होते हैं, आप सभी स्वास्थ्य योद्धा, डटे हुए रहते हैं स्वास्थ्य लाभ देते हैं अपनी जान जोखिम में डालकर ।
 नमन है,नतमस्तक हैं, महामारी में बनकर योद्धा
सरहद पर तैनात सिपाही करता है
दुश्मनों से देश की रक्षा
वहीं धरती पर दूसरे योद्धा जो
जो सदैव तैयार रहते हैं करने को दूर
शारीरिक समस्या दिलाते हैं असहनिय दर्द से
मुक्ति ,पास इनके होती है निष्ठा और कठीन
साधना की शक्ति
धरती पर परमात्मा की सौगात
दिव्य जीवन का आशीर्वाद,स्वस्थ जीवन
जीने का देते हैं महादान ।

कै…

अभिशाप का वरदान

वरदान बनकर फलित
 होता है नियति से मिला
 जीवन का अभिशाप
 समाहित होता है श्राप के
 मध्य एक संताप स्वयं
 के कर्मों का हिसाब।
बुद्धिजीवी टूट कर भी 
नहीं बिखरते,वरन संवरते
अभिशाप का प्रसाद
कर स्वयं के
जीवन में स्वीकार
बेहद का तिरस्कार
जीवन की जंग में
अकथनीय बहिष्कार
विषम परिस्थितियों
को मान जीवन का वरदान
तत्पर रहता है जो
कर्मठ कर्मप्रधान
जूझता है जो विपत्तियों
को परीक्षा मान
अभिशाप भी बन निखर
जाता है प्राप्त होता है सम्मान।
अभिशाप के दर्द का मर्म
 धैर्यवान समय बलवान
वक़्त बदलता है सत्य
शाश्वत बलवान ।







जीवन में सरलता

जीवन में सरलता
स्वभाव मेरा तरलता
मुझमें निहित स्वच्छता
गुण मेरा निर्मलता

क्योंकि मैं तरल हूं
इसलिए मैं सरल हूं
इसलिए मैं निश्चल हूं
मैं प्रतिबद्ध हूं

अग्रसर रहना मेरी प्रकृति
शीतलता देना मेरी प्रवृति
मुझमें अथाह प्रवाह
मुझमें ऊर्जा का भंडार
बांधे जो मुझमें बांध
हुए ऊर्जा का संचार

जीवन का अद्भुत व्यवहार
देना जीवन का आधार
ऊर्जा का कर दो संचार
तभी दूर होगा अन्धकार
सही जीवन का यही उपचार
जीवन का सगुण संस्कार









नमन ,वंदन

श्रद्धा की डोर,विश्वास का बन्धन आत्मा के दर्पण में दिव्य ज्योत के दर्शन  मन के सारे मैल और दुविधाओं का जब  हो जाता अंत ,भावनाओं के समुन्दर में करके मंथन ,उलझनों का हो जब अंत प्राप्त हो संतुष्टता का धन जीवन में जागे  नई उमंग, शुभ कर्मों का ही हो बस संग  दिव्य गुरु के आशीर्वाद का संग नमन, नतमस्तक परम श्रद्धेय गुरु देव जी को नमन एवम् सहृदय वंदन ।

*जीने की कला *

जिन्दगी के सफ़र में हैं
कर्मों के बीजों से अपनी फसल
तैयार कर रहे हैं ।
ज्यादा सम्भल कर ,
बेहतरीन सोच कर
धरती एक सराय है
कर्मों का कारवां तैयार
किया है स्वयं को समर्पित
कर खुशियों के बहाने ढूढ़ कर
खुशियां रोप रहे हैं
जिन्दगी के सफ़र में जीविका
की दौड़ में बेहतरीन कर गुजरने को
स्वयं से और हालातों से सामंजस्य
बना कर अपने अस्तित्व में नए रंग
भर रहे हैं ,अपने व्यक्तित्व को निखार
रहे है,किन्तु ऐसा कदापि नहीं की हम
बदल रहे हैं ,हम जीने के हुनर बांट रहे हैं
यूं ना कहो की हम बदल रहे हैं
वक़्त अनुसार अपने किरदार में ढल रहे हैं
जीवन जीने की कला में में निपुण हो रहे हैं ।

*धरा के भगवान*

चित्र
धरती पर मनुष्यों के भगवान
कैसे कह दूं उन्हें मात्र इंसान
कहते हैं जिन्हें धरा के भगवान
या कहें फ़रिश्ते ए आसमान
जीव विज्ञान का अद्भुत ज्ञान
कठिन साधना का परिणाम
जीवन एक तपस्या जिनकी
दूर करने को प्रतिबद्ध शारीरिक एवं
मानसिक समस्या असाध्य रोंगों से घिरा
इंसान ढूंढ़ता है एक चिकत्सक के रूप में भगवान
 जब खतरे में होती है मनुष्य जीवन के प्राण
जीवन और मृत्यु की जंग में बनकर रक्षा प्रेहरी
करते हैं समस्त प्रयास और देते हैं जीवन दान
हमें गर्व है  आप सब चिकित्सकों पर, महान योद्धा ओं पर महामारी के संकटकाल में जब सभी जन अपने -अपने घरों में बैठे होते हैं, आप सभी स्वास्थ्य योद्धा, डटे हुए रहते हैं स्वास्थ्य लाभ देते हैं अपनी जान जोखिम में डालकर ।
 नमन है,नतमस्तक हैं, महामारी में बनकर योद्धा
सरहद पर तैनात सिपाही करता है
दुश्मनों से देश की रक्षा
वहीं धरती पर दूसरे योद्धा जो
जो सदैव तैयार रहते हैं करने को दूर
शारीरिक समस्या दिलाते हैं असहनिय दर्द से
मुक्ति ,पास इनके होती है निष्ठा और कठीन
साधना की शक्ति
धरती पर परमात्मा की सौगात
दिव्य जीवन का आशीर्वाद,स्वस्थ जीवन
जीने का देते हैं महादान ।

जिन्दगी इतनी भी सस्ती नहीं

आता है मुझे दुविधाओं से लड़ना
आता है अपनी ख्वाहिशों पर कुर्बान होना
आता है इंतजार करना।

जिन्दगी मेरी इतनी सस्ती भी नहीं
करूं मैं आत्महत्या ,जिन्दगी मेरी अपनी है
किसी और की नहीं है।
कई लाख योनियों के उपरांत मनुष्य
जीवन पाया है ।

नहीं जाने दूंगी जीवन को जाया मैं
माना की आज मेरी किस्मत से दुश्मनी है
मेरी जिन्दगी दौराहे पर खड़ी है।
यह बात भी ना कम बड़ी है
उम्मीद की डोर मैंने भी आखिरी दम
तक पकड़ी है ।

मेरे भाग्य की मुझसे जिद्द बड़ी है उसे मुझे हराने की
और मुझे उससे जीतने की जिद्द बड़ी है ।
मेरे अकेले पन का हमराही मेरा दर्द ही सही
मेरा हमदर्द भी वही है ।

मैंने जिन्दगी के हर दौर से समझौते की
सीखी कारीगरी है
उसकी और मेरी जिद्द में अब समझौते की घड़ी आ गई है ।





* संकल्प शक्ति की सार्थकता*

मैं भारत माता गौरवान्वित
हो जाती हूं अपने वीर जवानों
की संकल्प शक्ति पर
सार्थकता तब ही
सिद्ध होती है जब
उसमें सत्यता निस्वार्थ
प्रेम, निश्चलता और शांति
का समावेश होता है
सहन शक्ति में छिपी
अदृश्य शक्ति अद्वितीय होती है
हां मैं शांति प्रिय हूं
हां किसी को आहत
करने में विश्वास में
मेरा विश्वास नहीं
हां मैं किसी पर
आक्रमण करने की
पहल नहीं करती
और सदा सर्वदा
शांति और सद्भावना
को अपने स्वभाव में
संजोकर रखता हूं ।
किसी अन्य की सम्पत्ति,
वस्तु,जायदाद को मैं कभी
छीनना मेरा स्वभाव नहीं
किन्तु जब कोई मेरे अपनों की
भी वस्तु पर नजर रखता है
या छीनने का प्रयास करता है उसे
सबक सीखना मुझे खूब आता है
मैं भारत माता हूं ,मुझे गर्व है मेरे वीरों पर
जो मेरी रक्षा के लिए शून्य डिग्री के तापमान
में तैनात रहकर मेरे लिए अपने प्राणों को
दांव पर लगाना अपनी शान समझते हैं
और शहीद होना उनके लिए गौरव होता है।




*निधि आत्मबल की *

* मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी निधि है उसका आत्मबल* ए मानव,तुम्हारे जीवन में कई अच्छी कई बुरी और बुरी से बुरी परिस्थितियां आएंगी ,तुम इन विषम परिस्थितियों से घबराना नहीं हारना नहीं ।

  ए मनुष्य तुम अपने पास *आत्मबल का धन* अवश्य रखना तुम अपने आत्मबल रूपी निधि का साथ कभी नहीं छोड़ना ,जिस दिन तुम्हारा विश्वास इस निधि से उठ  जायेगा उस दिन से तुम कमजोर पड़ने लगोगे ।
और कई नकारात्मक शक्तियां तुम्हारे ऊपर राज करने लगेंगी ,और तुम्हें कमजोर करके तोड़ देंगी और तुमसे अपना स्वार्थ सिद्ध कराने लग जाएंगी  ।
 मैंने जीवन को जितना समझा है ,मनुष्य जीवन विचारों और भावनाओं का खेल है सारा ।
सुख दुःख हार जीत आशा -निराशा यह सब मनुष्य जीवन के हिस्से है ,किसी के पास आवयश्कता से अधिक सुख और किसी के पास दुःख ही दुःख होता है ,यह सब कर्मों का खेल है सारा जैसे बीज बोओगे वैसा ही फल प्राप्त होंगे आवयश्कता है जीवन की किसी भी परिस्थिति में सम्भल के सोच समझ कर चलने की .....

सत्य भी है ,संसार में जितने प्रकार के जीव हैं जिनमें मानव सर्वश्रेष्ठ सर्वोत्तम है ।
मनुष्य जीवन सर्वश्रेष्ठ है ,मनुष्य जीवन में आकर मनुष्य जो कर सकत…

आत्मबल का धन सदा ही संग रखना

चित्र
ऐ मानव तुम कभी मत टूटना
आत्मबल का धन सदा ही अपने संग रखना
आत्मसंयम की निधि भी संग तुम्हारे
धैर्य के खजाने की कूजी
विश्वास की शक्ति भी संग तुम्हारे
सशक्त शक्तियों के दिव्य खजाने भी तुममें निहित
ऐ मानव तुम मत टूटना
तुम मत बिखरना
जीवन की कसौटी पर खरे उतरना तुम्हें है
किसी भी विप्पत्ति में कमजोर मत होना
तुममें निहित आत्म ज्योत जलाकर
साकारात्मक सोच को सदा ही अपने संग रखना
नकारात्मकता की कई दुविधाएं तुम्हें आजमाएगी
परीक्षाओं में तुम्हें है खरे उतरना
तुम मत हारना विपत्तियों में हौसलों को सदा ही संग रखना ,संयम संग धैर्य की डोर को तुम थामें रखना
जिन्दगी में परीक्षाओं के दौर से मत हारना
तुम हो दिव्य तेज़ का पुंज
सकरारात्मक प्रकाश का उजाला
अपनी शक्तियों को सदा ही संग रखना
धैर्य संग स्वयं में विश्वास को सदा ही जीवित रखना
ऐ मानव तुम मत टूटना
आत्मबल का धन सदा ही संग रखना ।
क्रमांक१ - सभीव्यंजन (बिनास्वरके) एकमात्रिकहोतेहैं जैसे - क, ख, ग, घ, च, छ, ज, झ, ट ... आदि१मात्रिकहैं । क्रमांक२ - अ, इ, उस्वरवअनुस्वरचन्द्रबिंदीतथाइनकेसाथप्रयुक्तव्यंजन