जिन्दगी कोई रेस तो नहीं

जिन्दगी है साहब 
कोई रेस नहीं
इतना दौड़ कर जाओगे 
कहां ? जिन्दगी कोई प्रतिस्पर्धा
नहीं ,जीवन के आरम्भ और अंत
 का खेल है सारा

भागना सिर्फ भागना
ही तो नहीं जिन्दगी 
थोड़ा संभलकर चलें
जिन्दगी स्वयं की है 
सीमित रफ्तार से चलें

यात्रा पर हो
सफ़र का आनंद लो
यात्रा पर यात्रा
ना दो स्वयं को यातना
स्वयं ही स्वयं की प्रताडना
मनुष्य की विचित्र विडम्बना

सिलसिला है, सफ़र का
बेहतरीन यादों का सिलसिला
संग ले जाईए
कुछ लाज़वाब दे जाइए
कुछ सर्वश्रेष्ठ कर्मों के कर्मफल
का मुनाफा ले जाइए ।






आओ अच्छा बस अच्छा सोचें

 आओ कुछ अच्छा सोचें अच्छा करें , अच्छा देखें अच्छा करने की चाह में इतने अच्छे हो जायें की की साकारात्मक सोच से नाकारात्मकता की सारी व्याधिया...