मां तुम कैसे हो

 माँ  के  बिन उदास है दिल मां कभी तो आ कर मुझसे मिल
आंख भर आती है
जब कानों में मां -मां आवाज आती है
दिल तड़फ उठता है
एक आह निकलती है
दिल की पीर दिल में ही
दफ़न हो जाती है
मां तू कैसी होती है
सुना है तुम फरिश्ता ए आसमान होती हो
मां मैं भी तो किसी मां का ही लाल हूं
मां मैं भी छोटा था क्यों मेरी उंगली पकड़ने
के चलने के दिनों में मुझे अकेला छोड़ गई
तुझे मुझ पर तरस भी नहीं आया मैं गिरता संभलता
मां -मां करता आज बड़ा हो गया हूं
फिर याद आती हो तुम मां
 मैं जानता हूं तुम्हारी भी कोई मजबूरी होगी
तुममें मेरी जान पूरी होगी
तुम जहां होगी वहां भी कहां चैन से होगी
अब अगले जन्म में मिलेगी ना जब मां तब
मेरा हाथ ना छोड़ना मेरा साथ ना छोड़ना
अगर तुम्हें जाना पड़े दूर मुझको भी संग अपने ले चलना तेरे बिन मां बड़ा मुश्किल है दुनियां में जीना
तेरे संग संग है मुझे रहना तेरे बिन नहीं दुनियां की महफ़िल में रहना नहीं मुझे भाता
तुझ संग झोपड़ी भी राजमहल लगेगी
मां तुम साथ रहोगी तो दुनिया जन्नत लगेगी।





आओ अच्छा बस अच्छा सोचें

 आओ कुछ अच्छा सोचें अच्छा करें , अच्छा देखें अच्छा करने की चाह में इतने अच्छे हो जायें की की साकारात्मक सोच से नाकारात्मकता की सारी व्याधिया...