" राम नाम धन "

      " राम नाम धन "



    सिमरन ,सिमरन सिमरन
   नाम धन जो मैंने पाया,
मैंने तो मानों संजीवनी
खजाना पायो ।

सुमधुर सुरमयी
रूप माधुरी स्वरूप
तुम्हारो मनमोहिनी
नज़र हटे ना,नजर झुके ना
हर पल तुमको निहारूं।

जब कोई प्रभु  दिल से पुकारूं
तुम तब-तब  उसको जीवन सवारों

तुम ही जग के पलानहार
तुम ही सबको पार उतारो
तुम सबके दिल की जानो


तुम हो जो पुष्पों में सुगन्ध
प्रकृति में ज्यों प्राणवायु
आकाश में विद्युत तरंगे ।

भाव प्रेम और श्रद्धा हो तो
बड़ी सरलता से तुम मिल जाते
तर्क-वितर्क हो तो ना कोई तुमको
जाने ना पहचाने ।


मिलते तुम प्रभू उसी को
जो निर्मल मन से तुम्हें पुकारे ।


आओ अच्छा बस अच्छा सोचें

 आओ कुछ अच्छा सोचें अच्छा करें , अच्छा देखें अच्छा करने की चाह में इतने अच्छे हो जायें की की साकारात्मक सोच से नाकारात्मकता की सारी व्याधिया...