Ritu Asooja Rishikesh , जीते तो सभी है , पर जीवन वह सफल जो किसी के काम आ सके । जीवन का कोई मकसद होना जरूरी था ।परिस्थितियों और अपनी सीमाओं के अंदर रहते हुए ,कुछ करना था जो मेरे और मेरे समाज के लिए हितकर हो । साहित्य के प्रति रुचि होने के कारण ,परमात्मा की प्रेरणा से लिखना शुरू किया ,कुछ लेख ,समाचार पत्रों में भी छपे । मेरे एक मित्र ने मेरे लिखने के शौंक को देखकर ,इंटरनेट पर मेरा ब्लॉग बना दिया ,और कहा अब इस पर लिखो ,मेरे लिखने के शौंक को तो मानों पंख लग
वक्त का सिलसिला
उद्देश्य मेरा सेवा का पौधारोपण
उद्देश्य मेरा निस्वार्थ प्रेम का पौधारोपण
अपनत्व का गुण मेरे स्वभाव में
शायद इसी लिए नहीं रहता अभाव में
सर्वप्रथम खड़ा हूं पंक्ति में
समाज हित की पौध लिए
श्रद्धा के पुष्प लिए भावों की
ज्योत जलाएं चाहूं फैले च हूं और
उजियारा निस्वार्थ दया धर्म
का बहता दरिया हूं बहता हूं निरंतर
आगे की ओर बढ़ता सदा निर्मलता
का संदेश देता भेदभाव का सम्पूर्ण
मल किनारे लगाता सर्व जन
हित में उपयोग होता सर्वप्रथम खड़ा हूं पंक्ति में
निर्मलता का गागर भरता ।
आओ अच्छा बस अच्छा सोचें
आओ कुछ अच्छा सोचें अच्छा करें , अच्छा देखें अच्छा करने की चाह में इतने अच्छे हो जायें की की साकारात्मक सोच से नाकारात्मकता की सारी व्याधिया...
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"आज और कल " लोग कहते हैं ,की,आज कल से बेहतर है ,मेरा तो मनाना है ,कि जो कल था ,वो आज से...
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दिन भर दौड़ता रहता हूँ सुकून की तलाश में .... सुख की चाहत में दर्द से सामना करता रहता हूँ दुखों से लड़ता रहता हूँ आधी उम्र बीत गय...
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💐 **कृषकों को नमन**💐 💐💐सर्वप्रथम जीने के लिये *अन्न है आवयशक । * मैं कृषक मैं खेत जोतता हूँ उसमें बी...

