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*मीठा,सरल ,सीधा बचपन*

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मीठा,सरल,सीधा बचपन
बच्चे थे तो अच्छे थे आसमान से भी ऊंचे सपने थे दादी,नानी से किस्से सुनते थे
वीरों के पराक्रम और
महापुरूषों प्रेरक प्रसंग
नैतिकता का देते परिचय
बन जीवन का प्रेरणास्रोत
उन जैसा बनने को करते प्रेरित .....  स्वर्ग से अप्सराएं आती थीं
परियां जादू की झडियों
 से मन की मुरादी बातें पूरी करती थीं चंदा को मामा कहते थे  पक्षियों की तरह चहचहाते थे ऊंची -ऊंची उड़ाने भरते थे खेलकूद ही अपना जीवन था भविष्य तो बड़ों का सपना था दोस्ती भी खूब निभाते थे  कट्टी-अप्पा से रूठते मनाते थे बचपन में बड़प्पन दिखाकर सबको खूब हंसाते थे  सबके मन को भाते थे  शायद तब हम सच्चे थे  अक्ल के थोड़े कच्चे थे  पर बच्चे थे तो अच्छे थे  मैं मुझमें मेरा बचपन बेफिक्र
 होकर जीवन भर जीना चाहता हूं

शब्दों की कारीगरी

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**आत्मविश्वास**

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आत्मविश्वास Like  Rate आत्मविश्वास
© Ritu Asooja Inspirational  1 Minutes 206  5 प्रतिस्पर्द्धा प्रतिस्पर्द्धा के युग में दौड़ता भागता मनुष्य सुधारने को अपना भविष्य अपना वर्तमान दाव पर लगाता

उपहार में अपनी मुस्कान दे आया 😀😄😀😃😀😀😃 .......

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उपहारों की होड़ लगी थी
कीमती से कीमती उपहारों
का आदान -प्रदान हो रहा था
मुझे भी देना था कोई उपहार
साधारण नहीं ,सामान्य भी नहीं
अद्भुत,अतुलनीय ,बेशकीमती
उपहारों की खोज बीन में मैंने बहुत
समय गवांया फिर भी मुझे कुछ ना
समझ में आया
अब कहां से और
क्या लाता उपहार
उपहार ने बिगाड़ा मेरा व्यवहार
मैं तो भूल बैठा अपना संस्कार
अब कहां से लाऊं अनोखा उपहार
सब कुछ लग रहा था बेकार
अब किसी चमत्कार का था इंतजार
आखिर जश्न का समय आ गया
मैंने शुभकामनाओं का टोकरा
लुटाया , गले लगाया
 उपहार में अपनी मुस्कान दे आया सारा माहौल खुशनुमा बना आया उपहार में अपना सर्वश्रेष्ठ दे आया ।




*शब्दों ने मुझे संवारा*

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*दिलों में प्रकाशित परस्पर प्रेम की दीपावली * शुभ दीपावली*

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*इस दीपावली दिलो में भी
 सकारात्मक सोच का दीपक जलाएं
 दीपोत्सव
दीपों का उत्सव
दीपों के प्रकाश का
भव्य भ्व्यतम था नज़ारा
मानों स्वर्ग को धरती पर हो उतारा

प्रकाश ही प्रकाश
तिमिर का अंश मात्र भी नहीं
स्वछता नवीनता और प्रकाश
का अद्भुत जलवा
फिर भी मेरे मन के कोने
में कहीं कोई कश्मकश थी बाकी
मन में छुप कर बैठी थी उदासी
शिकवे -शिकायतों का संसार
तभी दीपावली पर स्वच्छता
नवीनता और प्रकाश का तात्पर्य
ज्ञात हुआ
 मैंने मन को ना किया था स्वच्छ
पुरानी चीजों यानि पुराने शिकवों को
ना था बाहर  निकाला, तत - क्षण
मन से पुरानी शिकायतों को बाहर
 निकाल कूड़े दान में दे डाला
नए शुभ सकारात्मक विचारों से
मन में किया उजाला
अब दीपावली का तात्पर्य समझ में आया
अब मन के भीतर और बाहर सब और था उजाला बस उजाला .....




*दीपोत्सव *

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