****रोना बंद करो ****

      *"*मेरे मित्र तुम्हें क्या हो गया है, आजकल ....,तुम तो ऐसे नहीं थे ।   तुम रोते हुए अच्छे नहीं लगते ।
 **अमन याद है , तुम्हें ,जब में अपने जीवन से निराश और हताश होकर अपना जीवन ही समाप्त करने चला था, तब तुम ढाल बनकर मेरे आगे खड़े हो गए थे । तुमने मुझमें  मेरा आत्म विश्वास वापिस जगाया था । वरना में तो अपनी जिंदगी से हार मान चुका था।  अब तुम्हारा आत्मविश्वास कहां गया , अमन तुम तो इतने कमजोर नहीं हो  ,अच्छा नहीं लगता,  तुम्हारे मुंह से नकारात्मक बातें सुनना , तुम तो वो   सोच हो जो अंधेरे में भी जगमगाए ..... पत्थरों को भी जीवंत कर दे । वीराने में भी मंगल दीप जला दे ।

   ** हां मेरे मित्र "सजग" कई दिनों से ना जाने क्या  हो गया है मुझे ,
 मैं भी बस रोना ही रो रहा हूं ।
 रोना ...... हा _हा,  हां रोना .....
बस हालातों को दोष दे रहा हूं । मैं भी बस जन सामान्य की तरह ,अगर ऐसा होता तो मैं ऐसा होता , मैं ये कर पाता वो कर पाता । कुछ मेरे जैसा ही नहीं ,तो मैं क्या करूं मैं तो  किस्मत को ही  दोष
 दूंगा । अगर मेरे हक में सब होता तो सही होता।
 मेरी किस्मत ही ऐसी है ......
    तुम्हारा स्वास्थ्य ही बिगड़ा है ,मेरे दोस्त अमन .............   आज रसायन विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है ,तुम बहुत जल्दी ठीक हो जाओगे ।
 अभी तुम्हें बहुत से आशा के दीप जलाने हैं । नकारत्मक विचारों की कंटीली झाड़ियों को नष्ट कर सकारात्मक विचारों के बीज बोने हैं ।
     हां मेरे मित्र "सजग"तुम्हारी बात  सही है ,परंतु यह बात भी तो सत्य है कि जीवन एक सफ़र है ।
मेरे जीवन का सफ़र बहुत बेहतरीन रहा , मैंने जीवन के हर _ पल को भरपूर जिया , हताश होना तो मानों मैंने सीखा ही नहीं था ,बहुत से हताश लोगों को आशा की राह भी दिखाई ।
बस मैं तो यही चाहूंगा ,की सब अपने जीवन को जाने समझे ,देखो साधारण सी बात है ,जब हम गाड़ी चलाते हैं ,तो सफ़र में कई तरह के मोड़ आते हैं ,सफ़र है ,रास्ते कैसे भी हों ,चलना तो पड़ता ही है । तो क्यों ना हंसी खुशी अपने सफ़र को पूरा करे ।
"सजग "ने अपने मित्र "अमन" को अपने गले से लगा लिया ,दोनो मित्रों के नेत्रों से प्रेम की अश्रु धारा बह निकली .....

आओ अच्छा बस अच्छा सोचें

 आओ कुछ अच्छा सोचें अच्छा करें , अच्छा देखें अच्छा करने की चाह में इतने अच्छे हो जायें की की साकारात्मक सोच से नाकारात्मकता की सारी व्याधिया...