* मुश्किलों का हल*

  तू ही ढूंढेगा तेरी
  मुश्किलों का हल
   ऐ मानव तू चपल-चंचल
 व्यथित है, क्यों हर पल
 भरकर कमल नयन में जल
 क्यों उदास है जीवन में
 जो तेरे भर गया है मल
 माना कि अवरुद्ध है
तेरा मार्ग, लड़ जा
कर जा बाधाओं को पार
बन जा दरिया का बहता जल
निरंतर प्रवाहित,निर्मल,निश्चल
हो जाएगा जीवन सफल
माना की तू कमल
कीचड़ में तेरा जन्म
अपनी नियति को समझ
तू पूजनीय है
तेरा जीवन है सफल
यही जीवन का सच ।



   

आओ अच्छा बस अच्छा सोचें

 आओ कुछ अच्छा सोचें अच्छा करें , अच्छा देखें अच्छा करने की चाह में इतने अच्छे हो जायें की की साकारात्मक सोच से नाकारात्मकता की सारी व्याधिया...