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तुम ना बदलना मेरे अपनों

चित्र
बदलेंगी तिथियां बदलेंगे वर्ष
बदलेंगे दिन बदलेंगी रातें
पर तुम ना बदलना
मेरे अपनों तुमसे मेरे जीवन
में प्रेमरस ...
शाश्वत प्रेम की धाराओं में
जीवन की नव नूतन आशाओं
से रोशन रहे जीवन का हर पल
सहर्ष ...
नई खुशियों की नई तारीखें
लेकर आए यह वर्ष

शुभ हो सबके लिए नववर्ष ...

नई तारीखें*******

अब वक़्त आ गया है
 बदल ही दूंगा मैं पुराने
ख्वाबों को नए ख्वाबों में
पुरानी तारीखों को नई तारीखों में
नए इतिहास की नई तस्वीर बनाने को
सुलझा देना है  पुराने सुस्त पड़े
कई मुद्दों को आजाद करने के लिए....

**वक़्त तो वक़्त है
जैसा है उसमें ही
शुभ कर्मों के अंकुर उगा लो
वक़्त के इंतजार में वक़्त जाया ना करो
वक़्त रुकता नहीं किसी के लिए
वक़्त रहते वक़्त की कदर करो
गिनती की सांसों पर कुछ तो रहम करो
बीते वर्षों की और उम्र की
वापिसी नहीं होती
ये तो बस बड़ती हैं
और पल-पल घटती हैं
और अलविदा कहकर
नयी तारीखें लिखती हैं।


स्मरणीय यात्रा

यात्रा यानि जीवन को एक नई ऊर्जा नया उत्साह प्रदान करना। रोजमर्रा की भागती -दौड़ती जिन्दगी ैऔर वही हर दिन ैएक जैसे जीवन प्रक्रिया ,कभी -कभी नीरसता और थकान का कारण बन जाती है। याद है मुझे मेरी वो यात्रा जब हम सब परिवार वाले एकत्र होकर माता वैष्णानों देवी के दर्शनों को गए थे ,लगभग बीस लोग थे हम सब परिवार वाले । हेमकुंड एक्सप्रेस ट्रेन से हम लोग जम्मू पहुंचे ,जम्मू से हम कटरा तक के लिए एक बस में बैठ गए रात भर ट्रेन का सफ़र किया था कटरा तक का रास्ता भी थोड़ा पहाड़ी और घुमाओ दार था हम लोगों को नींद पूरी ना होने के कारण सभी लोग ट्रेन में नींद के झोंकों में एक दूसरों के ऊपर गिर रहे थे कभी कोई एक को जगाता कभी कोई दूसरे को लगभग डेढ़ घंटे के बाद हम कटरा पहुंच गए । कटरा पहुंच कर हमने एक होटल में कमरे लिए अपना सारा समान कमरों में पहुंचाया थोड़ी देर आराम करने के बाद हम सब तैयार होकर हम लोग होटल से निकले ,आखिर भूख भी लग रही थी एक अच्छे से रेस्टोरेंट में बैठकर हमने नाश्ता किया सबने अपने मनपसंद का खाना खाया मैंने तो वहां के राजमा और परांठा खाया जम्मू के राजमा का स्वाद बहुत ही लजीज होता है । अब…

*जीवन मूल्य*

जीवन मूल्यों के उच्च संस्कारों के आदर्शों को धारण करके व्यक्तित्व में निखार आता है।
लेबल लगे उत्पादों से कोई बड़ा नहीं होता यह सिर्फ भ्रम पैदा करता है बड़ा होने का लेबल लगे मंहगे उत्पादों तो पुतले की भी शोभा बढ़ाते हैं।
व्यक्तित्व में निखार आता है सादगी से, सत्यता से ,विनम्रता से परस्पर प्रेम से.... चेहरे पर मेकअप लगा कर तो सिनेमा में लुभाया जाता है।
धन -दौलत को सर्वोपरि समझने वालों सम्मान दो उस शिक्षकों को, शिक्षा को जिसके ज्ञान से तुम्हें ऊंचे पदों प्राप्त हुए।
सम्मान तो वास्तव में उच्च जीवन मूल्यों और उच्च आदर्शों का और नैतिक मूल्यों का ही होता है ,जो जीवन को सर्वसंपन्न कराती है मनुष्य को देखो साधनों को औकात समझ कर इतराते फिरते हैं।

* भारतीय संस्कृति *

*भारतीय संस्कृति एक अमूल्य धरोहर*
    भारत मेरी जन्म भूमि मेरे लिए मां तुल्य पूजनीय है विविध संस्कृतियों विविध धर्मों को स्वयं में समेटे हुए भारतीय संस्कृति अनेकता में एकता का प्रतीक है।
हिन्दू ,सिख,जैन,मुस्लिम,ईसाई आदि कई धर्मों का पालन अपनी -अपनी परम्पराओं से करते हुए भी हम सब हिन्दू हैं हिदुस्तानी हैं ।
भारतीय संस्कृति हमें हर धर्म का सम्मान करना सिखाती है।
रंगों का त्यौहार होली हर रंग में घुलमिल जाने का त्यौहार है ।
दीपावली का त्यौहार प्रकाश उत्सव यानि जीवन के अन्धकार को दूर करना अन्धकार जो मनुष्य मन के भीतर अज्ञान का अन्धकार का अंधेरा है उसे दूर करके सब और ज्ञान का प्रकाश फैलाने का त्यौहार है ।
हम भारतीय जितने उल्लास से होली, दीवाली मनाते हैं उतना ही उत्साह ,अन्य धर्मों के त्यौहारों के मौके पर भी दिखाते हैं ,क्योंकि हम भारतीय प्रस्पर प्रेम और अपनत्व की खेती करते हैं ,भेदभाव, छल -कपट से हम कोसों दूर रहते हैं ।
हम भारतीयों के लिए हर दिन उत्सव है ।
 हां आधुनिक समाज को संदेशा है जितना मर्जी आप पाश्चात्य संस्कृति को अपनाओ  परंतु अपना भला ,बुरा देखकर अपनी भारतीय संस्कृति और सभ्यता को …

डर किस बात का ....

अमन:- अरे भाई क्या कर रहे हो ,इतना दंगा, फसाद  तोड़-फोड़ क्यों और किस लिए .....

 अमान :- देश में नागरिकता बिल आया है सुना है उससे देश की जनता को बहुत परेशानियां झेलनी पड़ेगी देश को नुकसान होगा ।

अमन:- देश को नुकसान वो भी नागरिकता बिल से ऐसे कैसे हो सकता है सरकार तो चाहती है जितने भी शरणार्थी हैं उनको यहां की नागरिकता दे दी जाए और जो नहीं लेना चाहते नागरिकता तो वो यहां रहने के नियमों का पालन करें ...

अमान:- नहीं -नहीं देश में इतनी हिंसा हो रही है कोई तो वजह होगी ।

अमन:- वजह है ,जानकारी का अभाव ,पहले अच्छे से समझो इस बिल में है क्या फिर ......करना जो ठीक लगे ,कुछ विपक्षी लोगों के भकने मात्र से चिंगारी लगाई जाती है ,और वो हिंसा की चिंगारी इतने बड़ी हिंसा का रूप ले लेती है।

अमन :-अच्छा ये बताओ तुम क्या चाहते हो।

अमान:-मैं कुछ नहीं बस सब लोग अच्छे से अमन और चैन से रहें ।

अमन :-अच्छा ये बताओ क्या तुम स्वयं को भारत का नागरिक मानते हो।

अमान:- हां बिल्कुल मैं भारत में जन्मा ,मेरे दादा, पिताजी सब पहले से ही यहीं पर रहते हैं ,उनका पुश्तैनी कारोबार है और शहर में लोग हमारे परिवार की बहुत इज्जत भी…

*दिखावा*

नए में  शुनभागमन करना था तो कोई शुभ कार्य भी करना था, इसलिए हमने *मां जगदम्बा माता रानी* के जागरण का आयोजन किया था ।
 सभी रिश्तेदारों सगे-संबंधियों को और मित्रों को न्योता दिया गया था ।  रात्रि जागरण सर्दियों का मौसम सभी व्यवस्था यथोचित हो आखिर हमारे अतिथि हमारे देव होते हैं   और उनका ध्यान रखना हमारा कर्तव्य, अपनी और से हमने सभी व्यवस्थाएं अच्छे से सुनियोजित की थीं।  लगभग सभी अतिथि मातारानी के जागरण में उपस्थित हुए जिन्हें हमने बुलाया था सभी ने बहुत उत्साह पूर्वक हिस्सा लिया सब बहुत प्रसन्नचित्त थे की उनका स्वागत अच्छे से हुआ और नए घर की बधाइयां देते हुए घर सुन्दर बना है उपमा देते रहे ।  अगला दिन था सब कुछ मातारानी का जागरण सभी कुछ अच्छे से हो गया था मैंने मातारानी को शुक्रिया अदा किया ।  आखिर एक परम्परा और निभानी थी कौन -कौन लोग आए थे क्या-क्या उपहार लाए थे देखने का सिलसिला शुरू हुआ ,लगभग सभी मेहमान आए थे जिनको हमने बुलाया था । तभी एक एक कीमती उपहार पर नजर पड़ी ... अरे ये मेरा बचपन का मित्र है आज बहुत बड़ा आदमी बन गया है,फिर भी इसका बड़पन्न है ये हमारे घर  आया ये मेरा मित्र बचपन …