****तस्वीर***

चेहरे की तस्वीरें तो बहुत देखीं काश कोई मन के भीतर  क्या चल रहा है ,तस्वीर खींच कर लाताऔर तस्वीर का असली रूप नज़र आता
Add caption

     **तस्वीर**

 ****  तस्वीर के भी दो पहलू होते हैं

तस्वीर के दो पहलू होते हैं 
जो प्रत्यक्ष है वो सत्य है
किन्तु जो अप्रत्यक्ष है
वो शाश्वत है निसंदेह सत्य है
जैसे की दुग्ध में मक्खन का होना
तस्वीर के वाह्य स्वरूप के
भीतर का सत्य जान पाना ही
तस्वीर के असली स्वरूप को जान पाना है
कहते हैं की तस्वीर किसी भी
मनुष्य के व्यक्तित्व का
आईना होती  है
व्यक्तित्व की ,
परछाई होती है
मनुष्य की पहचान
होती है ,कहते हैं
लोग तस्वीर देखकर
किसी के रूप गुण और स्वभाव
को समझ जाते हैं
और कुछ लोग आकर्षक
तस्वीर देखकर उस पर मोहित हो जाते हैं
क्या तस्वीर हमेशा सच बोलती है
अब तस्वीर निकालने से पहले लोग
वास्तविक परिचय पर लीपा-पोती करा लेते हैं
तस्वीर का असली चेहरा ही छिपा लेते हैं
संभवतः तस्वीर में प्रत्येक स्वयं को आकर्षक
दिखाना चाहता है अपनी एक अलग छवि बनना चाहता है ,काश की ऐसा हो
जैसा हम तस्वीर में दिखना चाहते हैं
वास्तविक जिन्दगी में भी वही गुण धारण कर ले
और जीवन की तस्वीर चेहरे से नहीं अपितु
आचरण से भी अच्छी लगने लगे

चेहरा मनुष्य के व्यक्तित्व का आईना बन जाए*****


टिप्पणियाँ

  1. जैसा हम तस्वीर में दिखना चाहते हैं
    वास्तविक जिन्दगी में भी वही गुण धारण कर ले
    और जीवन की तस्वीर चेहरे से नहीं अपितु
    आचरण से भी अच्छी लगने लगे... सही कहा आपने.. बेहद खूबसूरत रचना

    जवाब देंहटाएं
  2. सुन्दर भाव ... सच है इंसान शुद्ध रहे मन से तो तन पे भी ये बात अक्सर आ ही जाती है ...
    अच्छी रचना है ...

    जवाब देंहटाएं
  3. सत्य और सार्थक भाव सृजन तस्वीर पर ।

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

👍 बचपन के खट्टे मीठे अनुभव👍😉😂😂

" हम जैसा सोचते हैं ,वैसा ही बनने लगते हैं "

"आज और कल"